Nifty Target: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए एक राहत भरी उम्मीद सामने आई है। लोटसड्यू वेल्थ एंड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ अभिषेक बनर्जी का मानना है कि निफ्टी इस साल के अंत यानी दिसंबर तक अपने ऑल-टाइम हाई का नया रिकॉर्ड बना सकता है। उनके मुताबिक, मौजूदा बाजार परिस्थितियों के बावजूद भारतीय इक्विटी मार्केट का लॉन्ग टर्म आउटलुक मजबूत बना हुआ है।
4 सितंबर को भी घरेलू शेयर बाजार में कई सत्रों के बाद रिकवरी देखने को मिली। हालांकि, प्रमुख इंडेक्स अभी भी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे हैं। ऐसे में एक्सपर्ट का यह अनुमान निवेशकों के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिसंबर तक नया रिकॉर्ड बना सकता है Nifty
अभिषेक बनर्जी भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं। उनका अनुमान है कि 2026 के अंत तक निफ्टी नई रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल कर सकता है।
हाल के दिनों में निफ्टी एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आया है। बाजार में ग्लोबल संकेतों, बॉन्ड यील्ड, टैरिफ और जियोपॉलिटिकल तनाव को लेकर चिंता बनी हुई है। इसके बावजूद बनर्जी का मानना है कि लंबी अवधि में भारतीय बाजार की बुनियाद मजबूत है।
उनके मुताबिक, मौजूदा कमजोरी को केवल जोखिम के तौर पर देखने के बजाय निवेशकों को वैल्यूएशन और सेक्टर आधारित अवसरों पर भी नजर रखनी चाहिए।
किन सेक्टर्स में दिख रहा है ज्यादा आकर्षण?
जब उनसे पूछा गया कि मौजूदा समय में निवेशकों को किन सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए, तो उन्होंने कुछ प्रमुख क्षेत्रों को आकर्षक बताया।
इनमें मुख्य रूप से:
- हेल्थकेयर
- कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी
- फाइनेंशियल सर्विसेज
शामिल हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर पर क्यों है भरोसा?
बनर्जी के अनुसार, अलग-अलग देशों में GDP ग्रोथ और हेल्थकेयर पर बढ़ता खर्च इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं। जैसे-जैसे लोगों की आय और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ती है, हेल्थकेयर की मांग भी बढ़ सकती है।
इसके अलावा भारत में इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ने से मेडिकल और हेल्थकेयर सेवाओं की मांग को आगे भी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
यही वजह है कि उन्हें हेल्थकेयर सेक्टर में दूसरे कई क्षेत्रों की तुलना में बेहतर लॉन्ग टर्म अवसर नजर आते हैं।
कंज्यूमर और फाइनेंशियल सर्विसेज भी फोकस में
हेल्थकेयर के साथ कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और फाइनेंशियल सर्विसेज को भी उन्होंने आकर्षक बताया है।
भारत में खपत बढ़ने, आय के स्तर में सुधार और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ने से इन सेक्टर्स को लंबे समय में फायदा मिल सकता है। खासकर फाइनेंशियल सर्विसेज में क्रेडिट ग्रोथ और इंश्योरेंस की बढ़ती पहुंच महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, किसी भी सेक्टर में निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन, कमाई, कर्ज और भविष्य की ग्रोथ क्षमता को देखना जरूरी है।
मध्यपूर्व संकट से भारत पर कितना असर?
मध्यपूर्व में जारी तनाव और उससे जुड़े जोखिमों पर बात करते हुए बनर्जी ने माना कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता का खतरा बना हुआ है। हालांकि, उनका मानना है कि लंबी अवधि में ऐसे जियोपॉलिटिकल संकटों का असर सीमित हो सकता है।
भारत के मामले में उन्होंने कई ऐसे फैक्टर्स का जिक्र किया जो देश को बाहरी झटकों से निपटने में मदद कर सकते हैं।
इनमें बेहतर क्रेडिट परिस्थितियां, रणनीतिक तेल खरीद, टैरिफ में कमी और फार्मा व इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत की मजबूत प्रतिभा शामिल हैं।
उनके अनुसार, इन कारणों से भारत अन्य कई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मौजूदा संकटों का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी एक्सपर्ट की नजर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक ऊंची रहने के सवाल पर बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय बैंकों के पास मौद्रिक नीति के जरिए बाजार और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के कई साधन होते हैं।
जब आर्थिक जोखिम बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों और अन्य नीतिगत उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते रहेंगे।
बनर्जी का अनुमान है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आने वाले समय में नीचे आ सकती है। ऐसे में लंबी अवधि के बॉन्ड में निवेश का अवसर भी बन सकता है।
शुक्रवार को बाजार में आई रिकवरी
भारतीय शेयर बाजार में 4 सितंबर को कई सत्रों की कमजोरी के बाद रिकवरी देखने को मिली। हालांकि, निफ्टी अभी भी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बना हुआ है।
शुक्रवार को निफ्टी 0.10 फीसदी यानी 24 अंक की बढ़त के साथ 23,897 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 0.48 फीसदी यानी करीब 362 अंक चढ़कर 76,515 के स्तर पर बंद हुआ।
इसके बावजूद दोनों प्रमुख इंडेक्स अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे हैं।
क्या अभी शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय है?
निफ्टी के दिसंबर तक रिकॉर्ड हाई बनाने का अनुमान निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। बाजार में ग्लोबल इकोनॉमी, ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, जियोपॉलिटिकल तनाव और विदेशी निवेश जैसे कई फैक्टर्स का असर पड़ सकता है।
हालांकि, मौजूदा गिरावट के कारण कुछ शेयरों और सेक्टर्स की वैल्यूएशन पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक नजर आ सकती है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा संतुलित रणनीति हो सकती है।
निवेशकों को केवल निफ्टी के संभावित टारगेट को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। किसी भी शेयर या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध बाजार जानकारी और एक्सपर्ट की राय पर आधारित है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


