LIC ICICI Bank Stake: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को ICICI Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति दे दी है। केंद्रीय बैंक की मंजूरी के बाद LIC अब निजी क्षेत्र के इस बड़े बैंक में अपनी कुल हिस्सेदारी 9.99% तक कर सकती है। हालांकि, इसके लिए LIC को RBI की मंजूरी की तारीख से एक साल के भीतर तय सीमा तक हिस्सेदारी हासिल करनी होगी।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर से LIC से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। RBI ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC को ICICI Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद LIC बैंक की पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स में कुल 9.99% तक हिस्सेदारी रख सकती है।
ICICI Bank ने शनिवार को स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई रेगुलेटरी फाइलिंग में RBI की इस मंजूरी की जानकारी दी। इससे LIC के लिए बैंक में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
जून 2026 तक ICICI Bank में LIC की कितनी हिस्सेदारी?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जून 2026 के अंत तक LIC के पास ICICI Bank की करीब 4.35% हिस्सेदारी थी। इस हिस्सेदारी की मार्केट वैल्यू लगभग ₹45,447.33 करोड़ बताई गई थी।
RBI की नई मंजूरी के बाद LIC अपनी हिस्सेदारी को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर अधिकतम 9.99% तक ले जा सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि LIC तुरंत इतनी हिस्सेदारी खरीद रही है। RBI ने केवल निर्धारित सीमा तक हिस्सेदारी हासिल करने की अनुमति दी है।
LIC को 9.99% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए मिला एक साल
ICICI Bank के अनुसार, बैंक को 4 सितंबर 2026 की रात करीब 9:09 बजे RBI का पत्र मिला। इस पत्र में केंद्रीय बैंक ने LIC को ICICI Bank की पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स का कुल 9.99% तक हिस्सा हासिल करने की मंजूरी दी।
इस मंजूरी की एक महत्वपूर्ण शर्त समय सीमा से जुड़ी है। LIC को RBI के पत्र की तारीख से एक साल के भीतर हिस्सेदारी बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यानी LIC के पास यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए 4 सितंबर 2027 तक का समय है। अगर वह निर्धारित अवधि के भीतर मंजूर सीमा तक हिस्सेदारी हासिल नहीं कर पाती है, तो RBI की यह मंजूरी स्वतः समाप्त हो जाएगी।
RBI की मंजूरी किन शर्तों के साथ मिली?
केंद्रीय बैंक ने LIC को हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति कुछ नियामकीय शर्तों के अधीन दी है। LIC को हिस्सेदारी बढ़ाते समय लागू वैधानिक और नियामकीय प्रावधानों का पालन करना होगा।
ICICI Bank ने यह जानकारी SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements (LODR) Regulations, 2015 के Regulation 30 के तहत सार्वजनिक की है।
TCS, Infosys और HCL Tech से LIC को हुआ बड़ा फायदा
LIC की ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी ऐसे समय आई है, जब हाल के महीनों में उसकी प्रमुख IT कंपनियों में हिस्सेदारी के मूल्य में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, LIC की TCS, Infosys और HCL Technologies में हिस्सेदारी की मार्केट वैल्यू जून के अंत में करीब ₹1.05 लाख करोड़ थी। यह वैल्यू 4 अगस्त तक बढ़कर लगभग ₹1.26 लाख करोड़ पहुंच गई।
इस तरह करीब 35 दिनों की अवधि में इन तीन IT कंपनियों में LIC की हिस्सेदारी के मूल्य में लगभग ₹21,032 करोड़ की बढ़ोतरी हुई। यह फायदा मार्क-टू-मार्केट या कागजी लाभ के रूप में देखा गया।
LIC के लिए क्यों अहम है ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका?
ICICI Bank देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल है। ऐसे में बैंक में 9.99% तक हिस्सेदारी हासिल करने की RBI की अनुमति LIC के निवेश पोर्टफोलियो के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
हालांकि, LIC वास्तव में अपनी हिस्सेदारी कितनी बढ़ाएगी और किस समय कितने शेयर खरीदेगी, यह उसके निवेश फैसलों पर निर्भर करेगा। RBI की मंजूरी केवल अधिकतम अनुमत सीमा तक हिस्सेदारी हासिल करने की अनुमति देती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
LIC के पास ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ाने का विकल्प खुलने से बैंक के शेयर में LIC की संभावित खरीदारी को लेकर बाजार की नजर बनी रह सकती है। दूसरी ओर, LIC के लिए भी यह अपने बड़े इक्विटी निवेश पोर्टफोलियो को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
हालांकि, केवल इस मंजूरी के आधार पर ICICI Bank या LIC के शेयरों में तेजी या गिरावट का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। NewsJagran किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह जरूर लें।


