Wheat Export Opportunity: भारत के लिए गेहूं एक्सपोर्ट के मोर्चे पर बड़ी संभावना बन रही है। दुनिया के कई बड़े गेहूं खरीदार अपने सप्लायर बेस में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में मजबूत घरेलू उत्पादन, पर्याप्त सरकारी स्टॉक और धीरे-धीरे दोबारा शुरू हो रहे निर्यात के दम पर भारत के सामने 1.5 अरब डॉलर यानी करीब ₹14,166 करोड़ से ज्यादा के बाजार पर पकड़ बनाने का अवसर है।
एसोचैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में भारत ग्लोबल गेहूं बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है। रिपोर्ट में इसके पीछे रिकॉर्ड उत्पादन, पर्याप्त स्टॉक, प्रतिस्पर्धी कीमत और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की बदलती रणनीति को प्रमुख कारण बताया गया है।
गेहूं एक्सपोर्ट के लिए बन रहा अनुकूल माहौल
भारत ने करीब चार साल तक गेहूं के निर्यात पर कई तरह के प्रतिबंधों का सामना किया। अब 2026 में एक्सपोर्ट को धीरे-धीरे दोबारा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। एसोचैम का मानना है कि इससे भारत के लिए वैश्विक गेहूं व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने का रास्ता खुल सकता है।
सरकार ने गेहूं और उससे जुड़े कुछ उत्पादों की एक्सपोर्ट पॉलिसी में भी बदलाव किया है। गेहूं, ड्यूरम गेहूं, गेहूं का आटा, मैदा और सूजी/रवा को प्रतिबंधित श्रेणी से हटाकर मुक्त (Free) कैटेगरी में शामिल किया गया है।
इस बदलाव से भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में गेहूं और इससे जुड़े उत्पाद भेजने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
रिकॉर्ड 12.07 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन
भारत में गेहूं का उत्पादन लगातार मजबूत बना हुआ है। 2025-26 में देश ने रिकॉर्ड 12.07 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन किया। इसके साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 मई 2026 तक सेंट्रल पूल में करीब 5.13 करोड़ टन गेहूं का स्टॉक मौजूद था। इसके मुकाबले 1 जुलाई के लिए तय बफर मानक करीब 2.75 करोड़ टन था।
यानी सरकारी स्टॉक बफर जरूरत से काफी ऊपर था। एसोचैम के अनुसार, इससे घरेलू खाद्य सुरक्षा को बनाए रखते हुए गेहूं के अतिरिक्त स्टॉक का इस्तेमाल निर्यात बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
भारत के गेहूं को मिल सकता है कीमत का फायदा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं के लिए कीमत भी एक अहम फैक्टर बन सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का गेहूं MSP करीब 268 डॉलर प्रति टन था।
वहीं, मई 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमत करीब 303 डॉलर प्रति टन रही। यानी दोनों कीमतों के बीच लगभग 35 डॉलर प्रति टन का अंतर था।
यह अंतर भारतीय गेहूं को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, वास्तविक एक्सपोर्ट कीमत में गुणवत्ता, परिवहन, पोर्ट खर्च, बीमा और अन्य लॉजिस्टिक्स लागत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बांग्लादेश भारत के लिए सबसे बड़ा मौका
एसोचैम की रिपोर्ट में बांग्लादेश को भारतीय गेहूं के लिए सबसे महत्वपूर्ण संभावित बाजारों में बताया गया है।
बांग्लादेश ने 2024-25 में करीब 67 लाख टन गेहूं का आयात किया था। भारत पहले से ही बांग्लादेश के प्रमुख गेहूं सप्लायर्स में शामिल है। दोनों देशों की भौगोलिक नजदीकी भी भारतीय निर्यातकों के लिए फायदा पैदा करती है, क्योंकि लंबी दूरी के मुकाबले परिवहन लागत और डिलीवरी समय को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
इसके अलावा मिस्र, इंडोनेशिया, अल्जीरिया, मोरक्को और फिलीपींस जैसे बाजारों में भी भारतीय गेहूं की पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
ग्लोबल सप्लाई में कमी भारत के लिए अवसर
रिपोर्ट में वैश्विक गेहूं उत्पादन को लेकर भी महत्वपूर्ण अनुमान दिया गया है। 2025-26 में दुनिया का गेहूं उत्पादन करीब 84.38 करोड़ टन रहा था। 2026-27 में इसके घटकर लगभग 81.9 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है।
गेहूं निर्यात करने वाले कुछ प्रमुख देशों में मौसम से जुड़ी चुनौतियां भी वैश्विक सप्लाई को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में आयात पर निर्भर देश अपने लिए नए और भरोसेमंद सप्लायर तलाश रहे हैं।
यही बदलाव भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। अगर भारतीय निर्यातक कीमत के साथ-साथ गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी की जरूरतों को पूरा करते हैं, तो वैश्विक गेहूं बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
सिर्फ उत्पादन पर्याप्त नहीं, इन चीजों पर देना होगा ध्यान
भारत के पास उत्पादन और स्टॉक के स्तर पर मजबूत आधार जरूर है, लेकिन लंबे समय तक ग्लोबल गेहूं सप्लायर बनने के लिए केवल ज्यादा उत्पादन पर्याप्त नहीं होगा।
एसोचैम के अनुसार, भारत को गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज, टेस्टिंग सुविधाओं और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार करना होगा।
विदेशी खरीदारों के लिए लगातार एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही बंदरगाहों तक गेहूं की तेज और कम लागत वाली पहुंच, पर्याप्त वेयरहाउसिंग और बेहतर टेस्टिंग सुविधाएं निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
एक्सपोर्ट पॉलिसी में स्पष्टता और स्थिरता भी जरूरी होगी, ताकि भारतीय निर्यातक लंबे समय की कारोबारी रणनीति बना सकें।
भारत के पास ग्लोबल गेहूं बाजार में जगह बनाने का मौका
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन, जरूरत से ज्यादा सरकारी स्टॉक, प्रतिस्पर्धी कीमत और दुनिया के खरीदारों की सप्लाई डायवर्सिफिकेशन रणनीति भारत के पक्ष में जाती दिखाई दे रही है।
करीब 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा के संभावित निर्यात बाजार का मौका भारत के लिए कृषि क्षेत्र और एक्सपोर्ट इंडस्ट्री दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। बांग्लादेश जैसे पड़ोसी बाजारों में मजबूत स्थिति के साथ अगर भारत मिस्र, इंडोनेशिया, अल्जीरिया, मोरक्को और फिलीपींस जैसे बाजारों में भी अपनी पकड़ बढ़ाता है, तो देश ग्लोबल गेहूं सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, इस अवसर को स्थायी सफलता में बदलने के लिए गुणवत्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और नीति स्थिरता पर लगातार काम करना जरूरी होगा।


