West Asia में जारी तनाव और सुरक्षा हालातों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा और सफल evacuation अभियान चलाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार अब तक 11 लाख से अधिक भारतीय नागरिक इस क्षेत्र से सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल भारत के विशाल प्रवासी समुदाय को दर्शाता है, बल्कि सरकार की तेज़ कूटनीतिक और लॉजिस्टिक क्षमता को भी उजागर करता है।
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब West Asia में ceasefire को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और 22 अप्रैल के बाद हालात बदलने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण भारत ने पहले ही सतर्कता बढ़ा दी थी और एयर रूट्स, चार्टर्ड फ्लाइट्स तथा वैकल्पिक मार्गों के जरिए अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने का काम तेज़ कर दिया।
विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान: 11 लाख से ज्यादा यात्रियों की वापसी
विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Gulf) असीम महाजन ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि 28 फरवरी के बाद से लगातार रेस्क्यू और ट्रैवल ऑपरेशन चल रहे हैं। अब तक लगभग 11,30,000 यात्रियों ने विभिन्न देशों से भारत की यात्रा की है।
उन्होंने बताया कि:
- UAE से प्रतिदिन लगभग 110 फ्लाइट्स भारत के लिए संचालित हो रही हैं
- Saudi Arabia और Oman से भी सीमित लेकिन नियमित उड़ानें जारी हैं
- Qatar Airways ने भी लगभग 10–11 फ्लाइट्स की योजना बनाई है
- Bahrain और Gulf Air भी सीमित ऑपरेशन में शामिल हैं
इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है, भले ही एयरस्पेस की स्थिति आंशिक रूप से बाधित क्यों न हो।
Iran, Iraq और Israel से निकासी में विशेष चुनौती
West Asia का यह संकट सबसे ज्यादा उन देशों में महसूस किया जा रहा है जहां एयरस्पेस या तो बंद है या आंशिक रूप से खुला है।
Iran से रूट बदलाव
भारत ने अपने नागरिकों को Iran से Armenia और Azerbaijan के रास्ते निकालने की व्यवस्था की है। अब तक:
- 2,423 भारतीय नागरिक Iran से बाहर निकाले गए
- इनमें 1,091 छात्र शामिल हैं
- 657 मछुआरे भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए गए
यह ऑपरेशन जमीनी और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।
Iraq और Israel की स्थिति
- Iraq में सीमित फ्लाइट ऑपरेशन जारी है
- Israel से यात्रियों को Jordan और Egypt के रास्ते भारत लाया जा रहा है
यह multi-route evacuation strategy भारत की विदेश नीति और emergency response का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।
Indian Missions की 24×7 निगरानी और कंट्रोल रूम सिस्टम
MEA ने बताया कि दिल्ली में एक dedicated control room लगातार काम कर रहा है। इसके अलावा सभी भारतीय दूतावासों में round-the-clock helpline शुरू की गई है।
इस सिस्टम के मुख्य उद्देश्य:
- भारतीय नागरिकों को तुरंत सहायता देना
- एयर ट्रैवल अपडेट साझा करना
- इमरजेंसी में वैकल्पिक रूट उपलब्ध कराना
- seafarers और छात्रों की विशेष सहायता
सरकार ने यह भी कहा है कि Indian seafarers की सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि वे अक्सर संकट के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
Gulf क्षेत्र में भारतीयों की भूमिका और रणनीतिक महत्व
Gulf और West Asia में लाखों भारतीय काम करते हैं। यह क्षेत्र भारत के लिए सिर्फ रोजगार का केंद्र नहीं बल्कि:
- ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत
- remittance inflow का बड़ा हिस्सा
- रणनीतिक कूटनीतिक साझेदार
इसी कारण भारत किसी भी अस्थिरता को हल्के में नहीं लेता। MEA ने स्पष्ट किया है कि भारत लगातार Israel, Palestine और Iran सभी पक्षों से संपर्क में है ताकि अपने हित सुरक्षित रखे जा सकें।
NSA अजित डोभाल की Saudi Arabia यात्रा
इस घटनाक्रम के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की Saudi Arabia यात्रा भी चर्चा में रही। MEA के अनुसार:
- बैठक सकारात्मक रही
- क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई
- bilateral cooperation को मजबूत करने पर सहमति बनी
यह यात्रा संकेत देती है कि भारत केवल evacuation ही नहीं बल्कि long-term stability पर भी काम कर रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह evacuation operation?
यह ऑपरेशन सिर्फ एक राहत अभियान नहीं बल्कि एक बड़े geopolitical संकट में भारत की रणनीतिक क्षमता का उदाहरण है।
मुख्य कारण:
- 11 लाख से अधिक लोगों का सुरक्षित रूट मैनेजमेंट
- कई देशों के एयरस्पेस और नियमों के बीच coordination
- continuous diplomatic engagement
- real-time crisis response mechanism
भारत ने यह साबित किया है कि global crises में भी वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है।
आगे क्या हो सकता है?
West Asia में स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है। ceasefire की समयसीमा 22 अप्रैल को खत्म होने वाली है, जिससे:
- एयर ट्रैवल में और बदलाव संभव हैं
- कुछ देशों में उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं
- evacuation operations को और तेज़ किया जा सकता है
सरकार पहले से ही contingency plans पर काम कर रही है ताकि किसी भी स्थिति में भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें।
निष्कर्ष
West Asia संकट के बीच 11 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी भारत की मजबूत विदेश नीति, तेज़ निर्णय क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक नेटवर्क का परिणाम है। यह अभियान दिखाता है कि आधुनिक समय में कूटनीति सिर्फ बातचीत नहीं बल्कि real-time action और coordination भी है।
भारत ने एक बार फिर साबित किया है कि चाहे स्थिति कितनी भी जटिल क्यों न हो, अपने नागरिकों की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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