देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में 2.61 रुपये से लेकर 2.87 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया। पिछले दो हफ्तों से कम समय में यह चौथी बार है जब ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही 15 मई के बाद से अब तक कुल बढ़ोतरी लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर होता रुपया और बढ़ती आयात लागत इसकी बड़ी वजह हैं। लगातार बढ़ते फ्यूल प्राइस का असर अब आम लोगों की जेब से लेकर ट्रांसपोर्ट, सब्जियों, दूध, ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा के सामान तक दिखाई देने लगा है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में जरा सी हलचल भी सीधे भारतीय बाजार को प्रभावित करती है।
लगातार चौथी बार बढ़े दाम
15 मई के बाद से अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई चरणों में इजाफा किया जा चुका है। पहले लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखा गया, लेकिन मई के दूसरे पखवाड़े से तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया।
अब तक कब-कब बढ़े दाम?
| तारीख | पेट्रोल वृद्धि | डीजल वृद्धि |
|---|---|---|
| 15 मई | ₹3.00 | ₹3.00 |
| 19 मई | ₹0.90 | ₹0.90 |
| 23 मई | ₹0.87 | ₹0.91 |
| 26 मई | ₹2.61-₹2.87 | ₹2.46-₹2.87 |
इन सभी बढ़ोतरी को जोड़ें तो कई शहरों में कुल वृद्धि 7.5 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है।
पेट्रोल की नई कीमतें
| शहर | नया रेट (₹/लीटर) | बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | ₹2.61 |
| कोलकाता | 113.51 | ₹2.87 |
| मुंबई | 111.21 | ₹2.72 |
| चेन्नई | 107.77 | ₹2.46 |
| औसत | 108.65 | ₹2.67 |
डीजल की नई कीमतें
| शहर | नया रेट (₹/लीटर) | बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | ₹2.61 |
| कोलकाता | 99.82 | ₹2.87 |
| मुंबई | 97.83 | ₹2.72 |
| चेन्नई | 99.55 | ₹2.46 |
कोलकाता इस समय देश के बड़े महानगरों में सबसे महंगे पेट्रोल वाले शहरों में शामिल हो गया है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ एक कारण से नहीं हो रही, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू फैक्टर एक साथ दबाव बना रहे हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड कई बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। ऊर्जा बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। निवेशकों को डर है कि यदि हालात और बिगड़े तो तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
यदि यह रूट लंबे समय तक बाधित रहता है तो एशियाई देशों, खासकर भारत, चीन और जापान को सबसे ज्यादा झटका लग सकता है। भारत के लिए यह रूट इसलिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला अधिकांश तेल इसी रास्ते से आता है।
3. कमजोर होता रुपया
कच्चे तेल का आयात डॉलर में किया जाता है। पिछले कुछ हफ्तों में रुपये में कमजोरी आने से भारत के लिए तेल खरीदना और महंगा हो गया है। जब डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर होता है तो तेल कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। यही अतिरिक्त लागत बाद में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दिखती है।
4. तेल कंपनियों का दबाव
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) देश के लगभग 90 प्रतिशत फ्यूल मार्केट को कंट्रोल करती हैं। इन कंपनियों पर लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने का दबाव था, लेकिन अब बढ़ती लागत के कारण कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में संशोधन कर रही हैं।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
पेट्रोल-डीजल सिर्फ वाहन चलाने का खर्च नहीं बढ़ाते, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं।
भारत में ट्रांसपोर्टेशन का बड़ा हिस्सा सड़क मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में डीजल महंगा होने का सीधा असर हर उस चीज पर पड़ता है जो ट्रक या कमर्शियल वाहन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचती है।
किन चीजों के दाम बढ़ सकते हैं?
दूध और डेयरी उत्पाद, सब्जियां और फल, ऑनलाइन डिलीवरी, कैब और ऑटो किराया, बस परिवहन, सीमेंट और स्टील, FMCG सामान, एयरलाइन टिकट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतों में यही तेजी जारी रही तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई फिर बढ़ सकती है।
क्या सरकार टैक्स कम कर सकती है?
पिछले वर्षों में कई बार केंद्र और राज्य सरकारों ने एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाकर राहत देने की कोशिश की थी। हालांकि इस बार सरकार अभी राजस्व दबाव में दिखाई दे रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो सरकार पर टैक्स घटाने का दबाव बढ़ सकता है।
क्या आगे और महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
ऊर्जा बाजार के जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा काफी हद तक तीन चीजों पर निर्भर करेगी:
- पश्चिम एशिया में तनाव कितना बढ़ता है
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई सामान्य होती है या नहीं
- डॉलर के मुकाबले रुपया कितना मजबूत या कमजोर रहता है
यदि भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतों में एक और बड़ी उछाल देखने को मिल सकती है। ऐसे में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यही वजह है कि हर वैश्विक संकट का असर भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता है। हालांकि सरकार पिछले कुछ वर्षों में रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल खरीद बढ़ाकर सप्लाई को विविध बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन पश्चिम एशिया अब भी भारत के ऊर्जा सुरक्षा ढांचे का सबसे अहम हिस्सा बना हुआ है।
निष्कर्ष
पेट्रोल-डीजल की ताजा बढ़ोतरी सिर्फ एक सामान्य प्राइस अपडेट नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा संकट, पश्चिम एशिया के तनाव और भारत की आयात निर्भरता की बड़ी कहानी भी बताती है। दो हफ्तों में चार बार कीमत बढ़ना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो ट्रांसपोर्ट से लेकर रसोई तक हर क्षेत्र में इसका असर दिखाई दे सकता है।
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