नई दिल्ली: भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने इतिहास रचते हुए एक नई उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग पर इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इसे भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्पेस इकोसिस्टम की ताकत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता दिखाती है कि अब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
केवल 8 वर्षों में हासिल की बड़ी सफलता
सफल ऑर्बिटल मिशन के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने महज आठ वर्षों के भीतर ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विकसित कर लिया और पहले ही प्रयास में उसे सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाना किसी भी स्टार्टअप के लिए असाधारण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि इतने कम समय में इस स्तर की तकनीक विकसित करना और मिशन को सफल बनाना भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की क्षमता का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मजबूत हुआ स्पेस सेक्टर
इसरो प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्पेस इकोसिस्टम लगातार मजबूत हुआ है। पहले जहां अंतरिक्ष कार्यक्रम मुख्य रूप से इसरो तक सीमित था, वहीं अब निजी कंपनियां भी तेजी से इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह पूरे देश और विशेष रूप से अंतरिक्ष समुदाय के लिए गर्व का क्षण है। भारत आज ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के सहयोग से अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
“यह भारत का अपना ऐतिहासिक पल है”
इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) के चेयरमैन पवन गोयनका ने भी विक्रम-1 की सफलता को भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इसकी तुलना किसी अन्य देश या कंपनी से नहीं की जानी चाहिए।
गोयनका ने कहा कि अक्सर लोग पूछते हैं कि भारत का “स्पेसएक्स मोमेंट” कब आएगा, लेकिन आज जो हुआ वह भारत का अपना ऐतिहासिक पल है। इसे किसी दूसरे देश की उपलब्धि से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
मिशन ने लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया
पवन गोयनका ने औपचारिक रूप से घोषणा करते हुए बताया कि भारत के निजी क्षेत्र का पहला ऑर्बिटल लॉन्च पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने कहा कि विक्रम-1 ने केवल अपने निर्धारित मिशन लक्ष्य को ही पूरा नहीं किया, बल्कि उससे बेहतर प्रदर्शन करते हुए लॉन्च टावर से उड़ान भरने के बाद सीधे 453 किलोमीटर ऊंची कक्षा (ऑर्बिट) तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
उन्होंने इसे भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक मील का पत्थर बताया।
श्रीहरिकोटा से हुआ ‘मिशन आगमन’ का सफल प्रक्षेपण
स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट मिशन है, जिसने देश के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई पहचान दिलाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता के बाद भारत में निजी स्पेस कंपनियों के लिए निवेश, अनुसंधान और वैश्विक लॉन्च सेवाओं के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही भारत की स्पेस इकोनॉमी को भी इससे बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह सफलता?
विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। इससे यह साबित हुआ है कि भारतीय निजी कंपनियां अब जटिल ऑर्बिटल लॉन्च मिशनों को भी सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। आने वाले वर्षों में यह उपलब्धि भारत को वैश्विक कमर्शियल लॉन्च मार्केट में मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


