नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट ने मिशन आगमन के तहत शनिवार को सफल ऑर्बिटल लॉन्च कर भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि को उद्योग जगत ने भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिशन ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय निजी कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने और जटिल मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं।
उद्योग जगत के अनुसार, विक्रम-1 की सफल उड़ान से भारत के कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी और सैटेलाइट लॉन्च, स्पेस डेटा तथा अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे। इस मिशन को भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग की ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जा रहा है।
निजी क्षेत्र के पहले ऑर्बिटल मिशन की सफलता
इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) और स्पेस एनालिटिक्स कंपनी सुहोरा टेक्नोलॉजीज ने अलग-अलग बयान जारी कर विक्रम-1 मिशन को भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
इंडियन स्पेस एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए.के. भट्ट ने कहा कि विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल उड़ान भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने इसे देश का पहला पूरी तरह निजी क्षेत्र द्वारा संचालित ऑर्बिटल मिशन बताया।
उन्होंने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने इस मिशन के जरिए यह साबित किया है कि भारत का घरेलू उद्योग अब डिजाइन, निर्माण से लेकर लॉन्च तक पूरे अंतरिक्ष मिशन को स्वतंत्र रूप से पूरा करने की क्षमता रखता है।
ए.के. भट्ट ने कहा, “स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 (मिशन आगमन) की सफल ऑर्बिटल उड़ान भारत की अंतरिक्ष यात्रा में मील का पत्थर है। देश की पहली पूरी तरह निजी ऑर्बिटल उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा कर स्काईरूट ने पुरानी सीमाओं को तोड़ा है।”
अत्याधुनिक पेलोड की सफल तैनाती
विक्रम-1 मिशन की सफलता के साथ कई महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी डेमो पेलोड्स को भी सफलतापूर्वक तैनात किया गया। इनमें कॉसमोसर्व स्पेस का ईएमबीआरएसीई रोबोटिक आर्म शामिल है, जिसे अंतरिक्ष में ऑर्बिटल डेब्रिस यानी अंतरिक्ष कचरे को हटाने के लिए विकसित किया गया है।
इसके अलावा स्काईरूट का अपना स्कोप और ग्रहा स्पेस का सोलारास एस3 सैटेलाइट भी इस मिशन का हिस्सा रहे।
ए.के. भट्ट ने कहा कि इन जटिल और अत्याधुनिक पेलोड्स की सफल तैनाती यह दर्शाती है कि भारत का निजी स्पेस इकोसिस्टम अब अंतरिक्ष स्थिरता, अर्थ ऑब्जर्वेशन और भविष्य की अंतरिक्ष सेवाओं के लिए वैश्विक स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय कंपनियों की तकनीकी क्षमता और नवाचार को दुनिया के सामने पेश करती है।
भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर बना वैश्विक निवेश के लिए आकर्षण
ए.के. भट्ट ने कहा कि स्काईरूट का भारत का पहला स्पेस टेक्नोलॉजी यूनिकॉर्न बनना वैश्विक निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत है। उन्होंने कहा कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब भरोसेमंद, प्रतिस्पर्धी और छोटे सैटेलाइट लॉन्च की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने में सक्षम हो चुका है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत छोटे उपग्रहों, स्पेस डेटा सेवाओं और अंतरिक्ष आधारित एप्लिकेशन के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो सकता है।
सस्ती और तेज लॉन्च सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
वहीं, सुहोरा टेक्नोलॉजीज के सीईओ और को-फाउंडर कृषाणु आचार्य ने विक्रम-1 मिशन को पूरे भारतीय स्पेस इकोसिस्टम के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।
उन्होंने कहा कि कम लागत और तेज लॉन्च सेवाओं की उपलब्धता से भारतीय सैटेलाइट ऑपरेटर अपने सैटेलाइट समूहों को तेजी से तैनात और अपडेट कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि इससे अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा की उपलब्धता, निगरानी की क्षमता और रियल टाइम जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया में बड़ा सुधार होगा।
स्पेस स्टार्टअप्स के लिए खुलेंगे नए अवसर
कृषाणु आचार्य ने कहा कि विक्रम-1 की सफलता से भारत में उभर रहे स्पेस एप्लिकेशन और डाउनस्ट्रीम टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलेगा।
अब छोटी कंपनियां अपनी जरूरतों के अनुसार सैटेलाइट विकसित कर उन्हें अंतरिक्ष में भेजने और संचालित करने के लिए बेहतर विकल्प हासिल कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई दिशा देगा और आने वाले समय में देश को वैश्विक स्पेस मार्केट में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा।
विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल उड़ान को भारत में निजी अंतरिक्ष क्रांति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल भारतीय कंपनियों की तकनीकी क्षमता को साबित करती है, बल्कि भारत को वैश्विक स्पेस टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
–आईएएनएस


