Foreign Investment News: विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए सरकार का बड़ा प्लान
नई दिल्ली। भारत सरकार विदेशी निवेशकों को फिर से भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों और आर्थिक मामलों से जुड़े लोगों के अनुसार, केंद्र सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए सरकारी बॉण्ड (Government Securities) में निवेश पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को समाप्त करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही बॉण्ड से मिलने वाले ब्याज पर लगने वाले टैक्स ढांचे में भी राहत दी जा सकती है।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बढ़ते वैश्विक तनाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, अमेरिकी बॉण्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के कारण भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से विदेशी पूंजी का बहिर्गमन देखा जा रहा है।
इस समय विदेशी निवेशकों पर कितना टैक्स लगता है?
मौजूदा नियमों के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को भारतीय बाजार में किए गए कुछ निवेशों पर टैक्स देना पड़ता है। यदि कोई विदेशी निवेशक किसी लिस्टेड शेयर या बॉण्ड को 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड करता है, तो उसे 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) देना पड़ता है।
इसके अलावा सरकारी बॉण्ड से प्राप्त ब्याज आय पर 20 प्रतिशत विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू होता है। इससे विदेशी निवेशकों की वास्तविक कमाई प्रभावित होती है और कई बार वे उन देशों को प्राथमिकता देते हैं जहां कर ढांचा अधिक अनुकूल होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन करों में राहत देती है तो भारतीय डेट मार्केट की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत हो सकती है।
क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?
विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार निकासी सरकार और बाजार नियामकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 2.47 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 में निकाले गए लगभग 1.04 लाख करोड़ रुपये से दोगुने से भी अधिक है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी निकासी का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता। इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है, विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है और कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना महंगा हो सकता है।
रुपये को कैसे मिलेगा फायदा?
जब विदेशी निवेशक भारत में निवेश करते हैं तो उन्हें डॉलर को रुपये में बदलना पड़ता है। इससे रुपये की मांग बढ़ती है और भारतीय मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रुपया कई बार दबाव में दिखाई दिया है। ऐसे में सरकार चाहती है कि विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर से मजबूत हो ताकि मुद्रा बाजार में स्थिरता बनी रहे।
सरकारी बॉण्ड बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत का सरकारी बॉण्ड बाजार दुनिया के सबसे बड़े डेट मार्केट्स में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सरकारी बॉण्ड्स को कई वैश्विक बॉण्ड इंडेक्स में शामिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
यदि विदेशी निवेशकों को कर राहत मिलती है तो सरकारी बॉण्ड्स में उनकी भागीदारी बढ़ सकती है। इससे सरकार के लिए उधारी की लागत कम हो सकती है और इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सड़क तथा अन्य विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाना आसान हो सकता है।
2019 की तरह बड़ा आर्थिक कदम?
यह पहली बार नहीं होगा जब सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए कर ढांचे में बड़ा बदलाव करेगी। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स दरों में ऐतिहासिक कटौती की थी। उस फैसले को देश में निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार माना गया था।
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों को टैक्स राहत देने का प्रस्ताव भी उसी तरह का एक रणनीतिक कदम साबित हो सकता है, जिसका उद्देश्य भारतीय वित्तीय बाजारों को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
वित्तीय बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की लंबे समय से मांग रही है कि भारत में बॉण्ड निवेश पर टैक्स व्यवस्था को और प्रतिस्पर्धी बनाया जाए। कई एशियाई देशों में विदेशी निवेशकों को कम टैक्स देना पड़ता है, जिससे वे उन बाजारों को प्राथमिकता देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि LTCG टैक्स और विदहोल्डिंग टैक्स में राहत दी जाती है तो विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और भारतीय बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिल सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
यदि विदेशी निवेश दोबारा तेजी से लौटता है तो इसका असर केवल सरकारी बॉण्ड बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। शेयर बाजार में तरलता बढ़ सकती है, रुपया मजबूत हो सकता है और कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की लागत कम हो सकती है।
इसके अलावा बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाएं और पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े क्षेत्रों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
भारत सरकार विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए टैक्स राहत जैसे महत्वपूर्ण कदमों पर विचार कर रही है। ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितता और पूंजी निकासी भारतीय बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है, यह फैसला निवेश माहौल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो इससे रुपये को समर्थन मिलने, सरकारी बॉण्ड बाजार को मजबूती मिलने और विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।


