Video: महंगे सैलून और मॉडर्न हेयरकट के दौर में टेक प्रोफेशनल यश भारद्वाज का एक अनोखा डिजिटल प्रयोग सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Salon.wtf नाम की इस वेबसाइट ने लोगों को 90s के उस दौर की याद दिला दी, जब मोहल्ले की छोटी-सी नाई की दुकान पर हेयरकट के साथ गाने सुनना भी अनुभव का हिस्सा हुआ करता था।
आज हेयरकट का मतलब सिर्फ बाल कटवाना नहीं रह गया है। बड़े शहरों में प्रीमियम सैलून, हेयर स्पा, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और महंगे हेयर ट्रीटमेंट आम हो चुके हैं। लेकिन इंटरनेट पर सामने आया एक छोटा-सा डिजिटल प्रोजेक्ट लोगों को उस दौर में वापस ले जा रहा है, जब मोहल्ले की नाई की दुकानें ही लोगों के लिए एक तरह का सामाजिक ठिकाना हुआ करती थीं।
टेक प्रोफेशनल और डेवलपर यश भारद्वाज ने इसी पुरानी याद को डिजिटल रूप देने की कोशिश की है। उन्होंने Salon.wtf नाम से एक वेबसाइट बनाई है, जहां पुराने भारतीय बार्बरशॉप के माहौल से जुड़े गानों का अनुभव लिया जा सकता है। सोशल मीडिया पर प्रोजेक्ट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे अपने बचपन और पुराने दिनों की यादों से जोड़ना शुरू कर दिया।
खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की चर्चा सिर्फ आम इंटरनेट यूजर्स तक सीमित नहीं रही। Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर इस पहल की तारीफ की और इसे पुरानी भारतीय मोहल्ला बार्बरशॉप संस्कृति की यादों से जोड़कर देखा।
क्या है Salon.wtf?
I made a website that plays bangers from indian barbershops
before you became fancy and started visiting salons. you once went to a 'saloon'. ₹20 haircuts. simple hairstyles with music that could fix your soul. https://t.co/j3E8VfwiUU pic.twitter.com/LAsgeEfPAX
— Yash Bhardwaj (@ybhrdwj) August 8, 2026 यश भारद्वाज ने अपने इस डिजिटल प्रोजेक्ट को Salon.wtf नाम दिया है। इसका आइडिया काफी सरल है, लेकिन इसकी नॉस्टैल्जिया वैल्यू काफी ज्यादा है। वेबसाइट पुराने दौर की उस नाई की दुकान का डिजिटल अनुभव देने की कोशिश करती है, जहां हेयरकट के दौरान बैकग्राउंड में लोकप्रिय गाने बजते रहते थे।
यश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस प्रोजेक्ट को शेयर करते हुए उस दौर की यादों का जिक्र किया। उस समय मोहल्ले के छोटे सैलून में जाना आज के प्रीमियम हेयर स्टूडियो जैसा अनुभव नहीं था। सामान्य हेयरकट के लिए लोग स्थानीय नाई की दुकान पर पहुंचते थे और कम कीमत में बाल कटवाने के साथ-साथ गाने सुनते हुए समय बिताते थे।
90s और शुरुआती 2000s की यही संस्कृति आज की डिजिटल दुनिया में Salon.wtf के जरिए एक नए रूप में दिखाई दे रही है।
90s के गानों ने छेड़ी पुरानी यादें
Salon.wtf की सबसे बड़ी खासियत इसका संगीत अनुभव है। वेबसाइट पर ऐसे गानों को शामिल किया गया है, जिन्हें सुनकर कई इंटरनेट यूजर्स को पुरानी बार्बरशॉप का माहौल याद आ रहा है।
उस दौर में म्यूजिक सुनने के विकल्प आज की तरह अनगिनत नहीं थे। न Spotify जैसा स्ट्रीमिंग अनुभव था, न हर व्यक्ति के हाथ में हाई-स्पीड इंटरनेट वाला स्मार्टफोन। स्थानीय दुकानों में बजने वाले गाने ही कई बार आसपास के लोगों के लिए मनोरंजन का बड़ा जरिया बन जाते थे।
यही वजह है कि वेबसाइट को देखने और सुनने वाले कुछ यूजर्स ने इसे सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि एक तरह की डिजिटल टाइम मशीन जैसा अनुभव बताया।
इंटरनेट यूजर्स को क्यों पसंद आया यह आइडिया?
सोशल मीडिया पर Salon.wtf को लेकर कई लोगों ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। यूजर्स ने बताया कि यह प्रोजेक्ट उन्हें उस समय की याद दिलाता है, जब इंटरनेट आज की तरह जिंदगी के हर हिस्से में मौजूद नहीं था।
मोहल्ले की नाई की दुकान पर हेयरकट करवाने के दौरान आसपास के लोगों की बातचीत, रेडियो या म्यूजिक सिस्टम से बजते गाने और दुकानदार के साथ होने वाली छोटी-बड़ी बातचीत उस अनुभव का हिस्सा हुआ करती थी।
आज के समय में वही अनुभव काफी बदल चुका है। अपॉइंटमेंट पहले से बुक होती है, सैलून में अलग-अलग सर्विस पैकेज होते हैं और हेयरकट का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा व्यवस्थित और व्यावसायिक हो गया है।
ऐसे में Salon.wtf का कॉन्सेप्ट लोगों को उस साधारण लेकिन यादगार दौर की तरफ वापस ले जाता है।
वेबसाइट के गानों पर उठा कॉपीराइट का सवाल
हालांकि प्रोजेक्ट को सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिली, लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आया—वेबसाइट पर इस्तेमाल हो रहे संगीत का कॉपीराइट कैसे मैनेज किया गया है?
एक यूजर ने यश भारद्वाज से इसी तरह के प्रोजेक्ट में संगीत इस्तेमाल करने को लेकर सवाल पूछा। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की गई कि ऑनलाइन उपलब्ध गानों को किसी दूसरी वेबसाइट के इंटरफेस के जरिए इस्तेमाल करने पर कॉपीराइट से जुड़ी क्या स्थिति बनती है।
इस सवाल के जवाब में यश ने स्पष्ट किया कि वेबसाइट अपने सर्वर पर गानों को स्टोर नहीं करती।
YouTube प्लेबैक का इस्तेमाल करता है प्रोजेक्ट
यश भारद्वाज के मुताबिक, Salon.wtf में गानों के लिए YouTube की मौजूदा प्लेबैक व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। उनके अनुसार, वीडियो और मूल फ्रेम को वेबसाइट के इंटरफेस में इस तरह पेश किया गया है कि यूजर को मुख्य रूप से ऑडियो सुनने का अनुभव मिले।
इसका मतलब यह है कि वेबसाइट खुद संगीत फाइलों को अपने सर्वर पर होस्ट करने के बजाय YouTube के माध्यम से उपलब्ध प्लेबैक का इस्तेमाल करती है।
हालांकि, किसी वेबसाइट पर इस तरह से थर्ड-पार्टी कंटेंट के इस्तेमाल की कानूनी स्थिति कई बातों पर निर्भर कर सकती है। इसमें संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तें, कंटेंट के अधिकार और स्थानीय कॉपीराइट कानून शामिल हो सकते हैं। इसलिए केवल यह तथ्य कि कोई कंटेंट दूसरे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, अपने आप में उसके हर तरह के पुन: उपयोग की कानूनी अनुमति नहीं माना जा सकता।
विजय शेखर शर्मा ने भी की तारीफ
Salon.wtf की चर्चा सोशल मीडिया पर बढ़ी तो यह प्रोजेक्ट Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा तक भी पहुंचा।
उन्होंने X पर इस प्रोजेक्ट को शेयर करते हुए इसकी तारीफ की। उनकी प्रतिक्रिया ने इस छोटे से डेवलपर प्रोजेक्ट को और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद की।
विजय शेखर शर्मा की प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा और तेज हो गई कि किस तरह एक साधारण-सा आइडिया, अगर उसमें यादों और भावनाओं को सही तरीके से जोड़ा जाए, तो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो सकता है।
₹20 के हेयरकट से डिजिटल नॉस्टैल्जिया तक
Salon.wtf की कहानी सिर्फ एक वेबसाइट या पुराने गानों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे असल आकर्षण उस दौर की यादें हैं, जब छोटी-सी नाई की दुकान भी स्थानीय जीवन का हिस्सा हुआ करती थी।
आज के समय में जहां हेयरकट के लिए लोग बड़े सैलून चुनते हैं, ऑनलाइन बुकिंग करते हैं और अलग-अलग ग्रूमिंग पैकेज लेते हैं, वहीं कुछ दशक पहले साधारण हेयरकट के लिए मोहल्ले की दुकान ही काफी थी।
कई लोगों के लिए वह अनुभव ₹20 या कुछ रुपये में मिलने वाले हेयरकट से कहीं ज्यादा था। दुकान पर बजता गाना, आसपास बैठे लोग, नाई के साथ बातचीत और कुछ मिनटों का इंतजार—ये सभी छोटी-छोटी चीजें बाद में यादों का हिस्सा बन गईं।
यश भारद्वाज का डिजिटल प्रयोग इन्हीं चीजों को आधुनिक इंटरनेट के जरिए फिर से सामने लाता है।
Video: सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा?
Salon.wtf को लेकर वायरल हो रही पोस्ट और प्रतिक्रियाओं में सबसे ज्यादा चर्चा इसके 90s नॉस्टैल्जिया की है। टेक्नोलॉजी की मदद से बनाया गया यह प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि डिजिटल दुनिया केवल नई चीजें बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि पुरानी यादों को नए तरीके से पेश करने का जरिया भी बन सकती है।
यही वजह है कि एक डेवलपर का छोटा-सा प्रयोग टेक कम्युनिटी से बाहर निकलकर आम सोशल मीडिया यूजर्स और बिजनेस जगत से जुड़े लोगों तक पहुंच गया।
कुल मिलाकर, Salon.wtf एक दिलचस्प उदाहरण है कि कैसे टेक्नोलॉजी, म्यूजिक और नॉस्टैल्जिया को मिलाकर ऐसा डिजिटल अनुभव तैयार किया जा सकता है, जो लोगों को कुछ पल के लिए उनके पुराने दिनों में वापस ले जाए। 90s के गानों और मोहल्ले की नाई की दुकान से जुड़ी यादों को डिजिटल रूप देने वाला यह प्रयोग भले ही छोटा हो, लेकिन इसकी लोकप्रियता बताती है कि पुरानी यादों की अपील आज भी उतनी ही मजबूत है।


