Air India Pilot News: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद अब पायलट के कथित डोप टेस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि फ्लाइट के कैप्टन का पोस्ट-फ्लाइट डोप टेस्ट कथित तौर पर साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए पॉजिटिव आया। हालांकि, एयर इंडिया ने अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि टेस्ट के आधिकारिक नतीजे उसे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कथित टेस्ट रिपोर्ट उसी फ्लाइट से जुड़ी है, जिसमें उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस हुई थी और विमान की ऊंचाई में करीब 300 फीट की कमी दर्ज की गई थी। इस घटना में यात्रियों और क्रू के कई सदस्य घायल हुए थे। अब पूरे मामले की जांच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA कर रहा है।
पायलट के डोप टेस्ट को लेकर क्या दावा सामने आया?
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AI फ्लाइट टर्बुलेंस में बड़ी खबर
पायलट का डोप टेस्ट पॉजिटिव-सूत्र
एअर इंडिया ने पुष्टि नहीं की
फुकेट से दिल्ली आ रही थी फ्लाइट
4 अगस्त को हवा में लहराया था विमान
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— Zee Business (@ZeeBusiness) August 9, 2026 The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट के दिल्ली पहुंचने के बाद चालक दल के सदस्यों का डोप टेस्ट किया गया था। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि विमान के कैप्टन का टेस्ट साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए पॉजिटिव आया।
हालांकि, इस दावे को अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पायलटों की पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग नियमों और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत हुई थी, लेकिन टेस्ट के परिणाम अभी एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए एयरलाइन फिलहाल किसी पायलट के टेस्ट को पॉजिटिव या नेगेटिव बताने की स्थिति में नहीं है।
यही वजह है कि इस समय “पायलट डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया” की बजाय “पायलट के डोप टेस्ट के पॉजिटिव होने की रिपोर्ट” कहना अधिक सही होगा।
Air India ने क्या कहा?
एयर इंडिया ने कहा है कि वह नागरिक उड्डयन नियमों के तहत अपने क्रू सदस्यों की नियमित ड्रग टेस्टिंग करती है। एयरलाइन के मुताबिक, यह प्रक्रिया किसी एक विशेष फ्लाइट या ऑपरेशनल घटना तक सीमित नहीं है।
एयरलाइन ने यह भी कहा कि 4 अगस्त की घटना से जुड़े पायलटों की स्क्रीनिंग लागू नियमों और प्रोटोकॉल के तहत की गई थी। लेकिन संबंधित टेस्ट के नतीजे अभी एयर इंडिया को नहीं मिले हैं।
एयर इंडिया ने जांच कर रहे संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग जारी रखने की बात कही है। इसलिए फिलहाल पायलट के कथित पॉजिटिव टेस्ट और 4 अगस्त की टर्बुलेंस के बीच सीधे तौर पर कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
4 अगस्त को Phuket-Delhi फ्लाइट में क्या हुआ था?
एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भर रही थी। यात्रा के दौरान विमान को अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान विमान की ऊंचाई में करीब 300 फीट की अचानक कमी आई।
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने घटना के बाद बताया था कि विमान को लगभग चार से पांच मिनट तक टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस दौरान कुछ यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आईं।
घटना के बाद विमान ने अपनी यात्रा जारी रखी और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग की। इसके बाद घायल यात्रियों और क्रू सदस्यों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई।
17 लोग हुए थे घायल
इस फ्लाइट में कुल 137 यात्री और चालक दल के 8 सदस्य सवार थे। घटना के बाद कई लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 13 यात्रियों और चालक दल के 4 सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एयर इंडिया ने बाद में बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी 13 यात्रियों को 5 अगस्त की दोपहर तक छुट्टी दे दी गई थी। वहीं, चार क्रू सदस्यों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था।
घटना के दौरान कुछ क्रू सदस्यों को रीढ़ और गर्दन से जुड़ी चोटें आने की जानकारी भी सामने आई थी।
अचानक टर्बुलेंस क्यों बन सकती है इतनी खतरनाक?
टर्बुलेंस के दौरान हवा की दिशा और गति में अचानक बदलाव हो सकता है। यदि विमान ऐसी स्थिति से गुजरता है तो यात्रियों और क्रू को विमान के अंदर अचानक ऊपर या नीचे की ओर झटका महसूस हो सकता है।
सबसे बड़ा खतरा उन लोगों को होता है जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगाई होती। अचानक विमान की ऊंचाई या गति में बदलाव होने पर व्यक्ति अपनी सीट से उछल सकता है और केबिन की छत, सीट या अन्य हिस्सों से टकरा सकता है।
इसी वजह से विमान में सीट बेल्ट बांधकर रखने की सलाह दी जाती है, खासकर तब जब सीट बेल्ट साइन ऑन हो।
क्या टर्बुलेंस और डोप टेस्ट का कोई संबंध है?
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि 4 अगस्त की टर्बुलेंस और कथित पॉजिटिव डोप टेस्ट का सीधा संबंध है।
दोनों घटनाओं की टाइमलाइन एक-दूसरे से जुड़ी जरूर है—टर्बुलेंस के बाद पायलटों की पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग हुई और अब एक रिपोर्ट में टेस्ट के कथित परिणाम का दावा सामने आया है। लेकिन जब तक आधिकारिक टेस्ट रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आते, तब तक दोनों को सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी स्क्रीनिंग टेस्ट के बारे में सामने आई मीडिया रिपोर्ट अपने आप में अंतिम नियामकीय या चिकित्सकीय निष्कर्ष नहीं होती।
DGCA की जांच पर टिकी नजर
4 अगस्त की घटना की जांच DGCA कर रहा है। जांच में विमान की उड़ान परिस्थितियों, टर्बुलेंस की प्रकृति, चालक दल की कार्रवाई और अन्य ऑपरेशनल पहलुओं को देखा जा सकता है।
वहीं, पायलटों की ड्रग टेस्टिंग से जुड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि किसी टेस्ट में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित नियामकीय प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पायलट के डोप टेस्ट के पॉजिटिव होने की खबर एक रिपोर्ट और सूत्रों पर आधारित दावा है, जबकि एयर इंडिया ने कहा है कि उसे टेस्ट के नतीजे अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। इसलिए आधिकारिक जांच और रिपोर्ट आने तक इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष
Air India की Phuket-Delhi फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को हुई टर्बुलेंस की घटना ने विमान सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। करीब 300 फीट की अचानक ऊंचाई कमी और यात्रियों व क्रू के घायल होने के बाद अब पायलट के कथित डोप टेस्ट ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि फ्लाइट के कैप्टन का डोप टेस्ट पॉजिटिव था। एयर इंडिया के मुताबिक, टेस्ट के नतीजे उसे साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए फिलहाल इस मामले में DGCA की जांच और आधिकारिक टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार करना सबसे जरूरी है।


