Apollo Micro Systems Q1 Result: डिफेंस सेक्टर की स्मॉलकैप कंपनी Apollo Micro Systems ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। जून तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 43 फीसदी बढ़कर 25.2 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह 88 फीसदी बढ़कर 251.3 करोड़ रुपये पहुंच गया। खास बात यह है कि कंपनी ने पहली तिमाही में अब तक का अपना सबसे ज्यादा रेवेन्यू और EBITDA दर्ज किया है।
कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी भी निवेशकों का ध्यान खींच रही है। जून तिमाही के दौरान FII ने कंपनी के करीब 1.52 करोड़ शेयर खरीदे, जिसके बाद कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 3.63 फीसदी से बढ़कर 7.59 फीसदी हो गई। इसके अलावा कंपनी के पास 8 अगस्त 2026 तक ₹1,704 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक भी मौजूद थी।
ऐसे में सोमवार को शेयर बाजार खुलने के बाद Apollo Micro Systems के शेयर पर निवेशकों की नजर रह सकती है। कंपनी के शेयर ने 2026 में अब तक करीब 46 फीसदी का रिटर्न दिया है।
Apollo Micro Systems के Q1 नतीजे कैसे रहे?
Apollo Micro Systems ने जून 2026 में समाप्त हुई पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड मुनाफा 43 फीसदी बढ़कर ₹25.2 करोड़ हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 17.7 करोड़ रुपये था।
कंपनी की आमदनी में भी काफी मजबूत वृद्धि हुई है। जून तिमाही में Apollo Micro Systems का रेवेन्यू 88 फीसदी बढ़कर ₹251.3 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू करीब 134 करोड़ रुपये था।
कंपनी के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जून तिमाही में दर्ज किया गया रेवेन्यू और मुनाफा उसके अब तक के मजबूत तिमाही प्रदर्शन में शामिल है। डिफेंस सेक्टर में कंपनी की बढ़ती गतिविधियों और ऑर्डर फ्लो के बीच इन नतीजों को निवेशकों के लिए अहम माना जा सकता है।
EBITDA में भी हुई बढ़ोतरी
कंपनी ने पहली तिमाही में EBITDA के मोर्चे पर भी वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2027 की जून तिमाही में Apollo Micro Systems का EBITDA ₹48 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा करीब 41 करोड़ रुपये था।
इस तरह कंपनी के EBITDA में सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के मुताबिक, 48 करोड़ रुपये का EBITDA भी उसका अब तक का सबसे ऊंचा तिमाही EBITDA है।
हालांकि, EBITDA बढ़ने के बावजूद मार्जिन में कमी आई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में कंपनी का EBITDA मार्जिन 30.6 फीसदी था, जो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घटकर 21.4 फीसदी रह गया।
इसका मतलब यह है कि कंपनी की बिक्री और EBITDA में वृद्धि हुई है, लेकिन रेवेन्यू के मुकाबले EBITDA का अनुपात पिछले साल की तुलना में कम रहा। इसलिए निवेशकों के लिए आगे कंपनी की मार्जिन प्रोफाइल पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
₹1,704 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक
Apollo Micro Systems के लिए सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलुओं में उसकी मजबूत ऑर्डर बुक भी शामिल है। कंपनी ने बताया कि 8 अगस्त 2026 तक उसकी ऑर्डर बुक करीब ₹1,704 करोड़ थी।
डिफेंस कंपनियों के लिए ऑर्डर बुक भविष्य की संभावित आय और कारोबारी गतिविधियों का एक अहम संकेतक होती है। बड़ी ऑर्डर बुक का मतलब है कि कंपनी के पास आने वाले समय में कई प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मौजूद है।
Apollo Micro Systems डिफेंस और एयरोस्पेस से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और मिशन-क्रिटिकल सिस्टम्स के क्षेत्र में काम करती है। ऐसे में कंपनी की ऑर्डर बुक में मौजूद प्रोजेक्ट्स आने वाली तिमाहियों में उसके रेवेन्यू को सपोर्ट कर सकते हैं।
हालांकि, ऑर्डर बुक को सीधे मुनाफे में बदलने के लिए कंपनी को प्रोजेक्ट्स की समय पर डिलीवरी, लागत नियंत्रण और मार्जिन को बनाए रखने की चुनौती का भी सामना करना होगा।
भारतीय वायु सेना से जुड़ा बड़ा अवसर
जून तिमाही के दौरान Apollo Micro Systems को भारतीय वायु सेना की ओर से भी महत्वपूर्ण अवसर मिला है। कंपनी को Prime Development Agency के तौर पर लिस्ट किया गया है।
कंपनी Indigenous Precision Range Extension Kit (IPREK) प्रोग्राम पर काम करेगी। यह कार्यक्रम DAP-2020 की Make-II कैटेगरी के तहत आता है।
भारत सरकार की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर बढ़ती प्राथमिकता के बीच इस तरह के प्रोजेक्ट डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित तकनीकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर पैदा कर सकते हैं।
Apollo Micro Systems के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी को डिफेंस सेक्टर में अपनी तकनीकी क्षमता और स्वदेशी समाधानों को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
FII ने खरीदे 1.52 करोड़ शेयर
कंपनी के मजबूत तिमाही प्रदर्शन के साथ-साथ FII की हिस्सेदारी में हुई वृद्धि भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
जून तिमाही के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने Apollo Micro Systems में करीब 1.52 करोड़ शेयर खरीदे। इस खरीदारी के बाद कंपनी में FII की हिस्सेदारी बढ़कर 7.59 फीसदी हो गई।
इससे पहले कंपनी में FII की हिस्सेदारी करीब 3.63 फीसदी थी। यानी एक तिमाही में FII की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हालांकि, किसी कंपनी में FII की हिस्सेदारी बढ़ना अपने आप में शेयर खरीदने या निवेश करने की गारंटी नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कंपनी के वैल्यूएशन, कमाई की क्षमता, ऑर्डर बुक, मार्जिन और शेयर की मौजूदा कीमत जैसे अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
2026 में शेयर ने दिया करीब 46% रिटर्न
Apollo Micro Systems के शेयर ने 2026 में अब तक निवेशकों को करीब 46 फीसदी का रिटर्न दिया है। ऐसे में कंपनी के ताजा Q1 नतीजे शेयर बाजार के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।
किसी स्मॉलकैप डिफेंस स्टॉक में मजबूत रिटर्न के बाद जब कंपनी के तिमाही नतीजे और ऑर्डर बुक भी चर्चा में आते हैं, तो शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। हालांकि, स्मॉलकैप शेयरों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
इसलिए सिर्फ पिछले रिटर्न या FII की खरीदारी के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी के आगामी तिमाही प्रदर्शन और ऑर्डर को वास्तविक रेवेन्यू में बदलने की क्षमता पर भी नजर रखनी चाहिए।
मैनेजिंग डायरेक्टर ने क्या कहा?
Apollo Micro Systems के मैनेजिंग डायरेक्टर बद्दाम करुणाकर रेड्डी ने कंपनी के पहली तिमाही के प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह कंपनी के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है।
उन्होंने कहा कि कंपनी का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि वह अपने काम को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा रही है और विभिन्न चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। कंपनी आगे भी अपने महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए तेजी से काम करना जारी रखेगी।
रेड्डी के मुताबिक, Apollo Micro Systems के सामने आने वाले समय में विकास के कई अवसर मौजूद हैं। कंपनी अपनी क्षमताओं और ताकत को लगातार बेहतर करने पर ध्यान देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाना चाहती है। बदलती रक्षा जरूरतों के मुताबिक कंपनी अपनी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने और बेहतर अनुशासन के साथ अपने लक्ष्यों को पूरा करने पर फोकस कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
Apollo Micro Systems के Q1 नतीजों को देखें तो कंपनी के लिए कई सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। रेवेन्यू में 88 फीसदी की वृद्धि, मुनाफे में 43 फीसदी की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड EBITDA और ₹1,704 करोड़ की ऑर्डर बुक कंपनी की मौजूदा कारोबारी स्थिति को मजबूत दिखाते हैं।
इसके अलावा FII की हिस्सेदारी में 3.63 फीसदी से बढ़कर 7.59 फीसदी होना भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। भारतीय वायु सेना से जुड़े IPREK प्रोग्राम में Prime Development Agency के तौर पर कंपनी का चयन भविष्य के लिए एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करता है।
दूसरी तरफ, EBITDA मार्जिन में कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आगे कंपनी के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के साथ मार्जिन को स्थिर रखना भी अहम होगा।
इसलिए Apollo Micro Systems को लेकर निवेशकों को सिर्फ एक तिमाही के नतीजों के बजाय कंपनी की ऑर्डर बुक, नए डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट, रेवेन्यू ग्रोथ, EBITDA मार्जिन और आने वाली तिमाहियों की कमाई पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध कंपनी संबंधी जानकारी और तिमाही आंकड़ों पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें और कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों व वित्तीय नतीजों का अध्ययन करें।


