US Mid-Term Elections 2026: अमेरिका में नवंबर 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के रुख को लेकर एक अहम सर्वे सामने आया है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय-अमेरिकी वोटर्स का एक बड़ा हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का इरादा रखता है। खास तौर पर एशियन इंडियन वोटर्स में 66 फीसदी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात कही है।
यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली रिपब्लिकन पार्टी के लिए 2026 के मिड-टर्म चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि, किसी सर्वे के आधार पर चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन भारतीय-अमेरिकी समुदाय के मौजूदा राजनीतिक रुझान जरूर चर्चा का विषय बन गए हैं।
भारतीय-अमेरिकियों में डेमोक्रेट्स की बढ़त
एशियन एंड पैसिफिक आइलैंडर अमेरिकन वोट (AAVS) और AAPI Data के संयुक्त सर्वेक्षण में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं से उनके चुनावी इरादों को लेकर सवाल पूछे गए। इसमें 66 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कहा कि वे प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट देने की योजना बना रहे हैं।
वहीं, प्रतिनिधि सभा के चुनाव में 18 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही। सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की हिस्सेदारी 22 फीसदी रही।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इस समय भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की पकड़ रिपब्लिकन उम्मीदवारों की तुलना में मजबूत है।
90% से ज्यादा AAPI वोटर्स मतदान के लिए तैयार
सर्वे का एक और महत्वपूर्ण पहलू AAPI समुदाय की चुनावी भागीदारी से जुड़ा है। 90 फीसदी से ज्यादा रजिस्टर्ड एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह (AAPI) मतदाताओं ने कहा कि वे 2026 के मध्यावधि चुनाव में मतदान करने की योजना बना रहे हैं।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं का कहना है कि राजनीतिक दलों ने उनसे पर्याप्त संपर्क नहीं किया है। करीब 42 फीसदी AAPI मतदाताओं ने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया। वहीं 58 फीसदी ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया।
यह आंकड़ा राजनीतिक दलों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में AAPI मतदाता समूह लगातार बढ़ रहा है।
2026 में करीब 1.6 करोड़ AAPI वोटर्स
AAPI Data और AAVS के अनुमान के मुताबिक, 2026 में अमेरिका में लगभग 1.6 करोड़ यानी 16 मिलियन AAPI नागरिक मतदान के योग्य होंगे। इनमें करीब 16 लाख ऐसे मतदाता हैं, जो 2022 के बाद मतदान के योग्य बने हैं।
मतदाताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए एशियाई-अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह समुदाय आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खासकर ऐसे राज्यों में जहां मुकाबला करीबी रहने की संभावना होती है, वहां इस वोट बैंक का महत्व और बढ़ सकता है।
AAPI Data के संस्थापक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कार्तिक रामकृष्णन ने कहा कि एशियाई अमेरिकी देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले मतदाता समूहों में शामिल हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करने वाले प्रमुख मुद्दे क्या हैं।
महंगाई और बढ़ती लागत सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा
सर्वे में सामने आया कि AAPI मतदाताओं के लिए महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत सबसे बड़ी चिंता है। करीब 90 फीसदी एशियाई-अमेरिकी मतदाताओं ने इसे चुनाव में अपने वोट के फैसले के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
पैसिफिक आइलैंडर मतदाताओं में भी करीब 89 फीसदी ने महंगाई और जीवन-यापन की लागत को बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा माना।
जब मतदाताओं से पूछा गया कि इस समस्या से निपटने के लिए कौन सी पार्टी बेहतर काम कर सकती है, तो 44 फीसदी ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भरोसा जताया। इसके मुकाबले सिर्फ 18 फीसदी मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी को बेहतर माना।
इससे साफ है कि अर्थव्यवस्था और घरेलू खर्च से जुड़े मुद्दे 2026 के मिड-टर्म चुनाव में AAPI मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
हेल्थकेयर और रोजगार भी बड़े मुद्दे
महंगाई के अलावा स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा भी AAPI वोटर्स की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सर्वे के मुताबिक, इन मुद्दों को लेकर मतदाताओं की चिंता इस प्रकार रही:
- 82% ने हेल्थकेयर को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
- 80% ने रोजगार और बेरोजगारी को महत्वपूर्ण माना।
- 80% ने Social Security और Medicare को अहम बताया।
- 79% के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा है।
- 78% ने अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा को अहम माना।
- 78% ने युद्ध और विदेश नीति को महत्वपूर्ण बताया।
- 73% ने नस्लवाद और हेट क्राइम को महत्वपूर्ण मुद्दा माना।
- 68% ने इमिग्रेशन को अहम मुद्दा बताया।
- 61% ने गर्भपात और प्रजनन अधिकारों को महत्वपूर्ण माना।
2,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स पर हुआ सर्वे
इस सर्वेक्षण में कुल 2,066 रजिस्टर्ड मतदाताओं से बात की गई। इनमें 1,896 एशियाई-अमेरिकी, 242 भारतीय-अमेरिकी और 170 प्रशांत द्वीपसमूह के मतदाता शामिल थे।
सर्वे में राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी दिलचस्प तस्वीर सामने आई। करीब 66 फीसदी AAPI मतदाताओं ने खुद को राजनीति में काफी सक्रिय बताया। हालांकि, लगातार राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े रहने के कारण कई मतदाताओं ने राजनीति को लेकर मानसिक थकान महसूस होने की बात भी कही।
क्या भारतीय-अमेरिकी वोटर्स बदल रहे हैं अपना राजनीतिक रुख?
भारतीय-अमेरिकी समुदाय लंबे समय से अमेरिकी चुनावों में एक महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता हुआ वोटर समूह रहा है। इस सर्वे के आंकड़े फिलहाल डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मजबूत झुकाव दिखाते हैं।
खास तौर पर 66 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में सामने आना रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ‘मोहभंग’ कहना जल्दबाजी होगी। चुनाव से पहले मतदाताओं का रुख कई मुद्दों, उम्मीदवारों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।
2026 के मिड-टर्म चुनाव में महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार, इमिग्रेशन, विदेश नीति और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में दोनों प्रमुख पार्टियों की रणनीति और AAPI समुदाय के बीच उनकी पहुंच पर नजर रहेगी।


