Farm Peace IPO Listing: कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सेक्टर की कंपनी फार्म पीस के शेयरों ने शेयर बाजार में शानदार एंट्री की है। ₹59 के इश्यू प्राइस के मुकाबले शेयर BSE SME पर ₹112.10 के भाव पर लिस्ट हुए। यानी आईपीओ निवेशकों को शुरुआत में करीब 90 फीसदी का जबरदस्त लिस्टिंग गेन मिला। हालांकि, लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई और स्टॉक लोअर सर्किट पर पहुंच गया। इसके बावजूद आईपीओ निवेशक काफी बड़े मुनाफे में हैं।
₹59 के शेयर ने ₹112 पर ली एंट्री
फार्म पीस का आईपीओ 1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। कंपनी ने आईपीओ के तहत शेयर का प्राइस बैंड ₹59 प्रति शेयर तय किया था।
लिस्टिंग के दिन कंपनी के शेयर ने BSE SME प्लेटफॉर्म पर ₹112.10 के भाव से शुरुआत की। इस तरह ₹59 के इश्यू प्राइस की तुलना में शेयर करीब 90 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुआ।
हालांकि, शानदार शुरुआत ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। लिस्टिंग के बाद शेयर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला और कीमत गिरकर ₹106.50 के लोअर सर्किट पर पहुंच गई।
फिर भी ₹59 के इश्यू प्राइस से तुलना करें तो आईपीओ निवेशक अभी करीब 80.51 फीसदी के मुनाफे में हैं।
हर लॉट पर ₹95,000 का मुनाफा
फार्म पीस आईपीओ का लॉट साइज 2,000 शेयरों का था। यानी आईपीओ में एक लॉट के लिए निवेशकों को ₹1,18,000 का निवेश करना पड़ा था।
अब अगर लोअर सर्किट के भाव ₹106.50 को आधार मानें तो 2,000 शेयरों की वैल्यू ₹2,13,000 हो जाती है।
इस तरह इश्यू प्राइस के मुकाबले निवेशकों को एक लॉट पर:
₹2,13,000 – ₹1,18,000 = ₹95,000 का मुनाफा
यानी लिस्टिंग के बाद शेयर लोअर सर्किट पर आने के बावजूद आईपीओ निवेशक हर लॉट पर करीब ₹95 हजार के फायदे में हैं।
Farm Peace IPO को मिला था मिला-जुला रिस्पांस
दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में फार्म पीस की लिस्टिंग भले ही शानदार रही हो, लेकिन आईपीओ को सब्सक्रिप्शन के दौरान निवेशकों की ओर से बहुत मजबूत प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
₹32 करोड़ के इस आईपीओ को कुल मिलाकर 1.16 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी NII कैटेगरी 1.73 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा सिर्फ 0.59 गुना ही भर पाया था।
इसके बावजूद लिस्टिंग के दिन शेयर ने निवेशकों को चौंकाते हुए करीब 90 फीसदी प्रीमियम के साथ बाजार में एंट्री की।
IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी कंपनी?
फार्म पीस के आईपीओ में पूरी तरह नए शेयर जारी किए गए हैं। कंपनी ने ₹10 की फेस वैल्यू वाले कुल 54.24 लाख नए शेयर जारी किए हैं।
आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अलग-अलग कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में लगाया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक:
- ₹23 करोड़ — बढ़ी हुई वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए
- ₹4.80 करोड़ — सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए
- ₹4.20 करोड़ — आईपीओ से जुड़े खर्चों के लिए
इससे साफ है कि कंपनी आईपीओ से मिली रकम का बड़ा हिस्सा अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों को मजबूत करने में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
क्या करती है Farm Peace कंपनी?
फार्म पीस का कारोबार कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जुड़ा हुआ है। कंपनी किसानों के साथ मिलकर खास किस्म के आलू की खेती करवाती है। इन आलुओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से फ्रेंच फ्राइज, पोटेटो चिप्स और दूसरे प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स बनाने में किया जाता है।
कंपनी गुजरात में ‘Farm Peace’ ब्रांड के तहत किसानों के साथ 100 फीसदी बायबैक मॉडल पर काम करती है। इसके तहत किसानों को पहले से तय कीमत पर उनकी उपज खरीदने का भरोसा दिया जाता है।
सिर्फ खरीद की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि कंपनी किसानों को खेती से जुड़ी कई जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराती है। इसमें बीज, खाद, पेस्टिसाइड्स और स्टोरेज जैसी जरूरतों में सहयोग शामिल है।
अगस्त 2026 तक कंपनी के नेटवर्क में 5,660 एकड़ से ज्यादा जमीन शामिल थी। कंपनी के मुताबिक इस नेटवर्क से सालाना करीब 61,680 टन आलू का उत्पादन हो रहा है।
कंपनी की वित्तीय सेहत कैसी है?
किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले सिर्फ लिस्टिंग गेन देखना पर्याप्त नहीं होता। कंपनी का कारोबार, मुनाफा, कर्ज और भविष्य की संभावनाएं देखना भी जरूरी है।
फार्म पीस के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में कारोबार और मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की है।
वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा करीब 11 फीसदी CAGR की दर से बढ़कर ₹7.53 करोड़ पहुंच गया। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय 20 फीसदी से अधिक CAGR के साथ बढ़कर ₹90.84 करोड़ हो गई।
मार्च 2026 के अंत में कंपनी पर कुल करीब ₹11.28 करोड़ का कर्ज था। वहीं, कंपनी के रिजर्व और सरप्लस करीब ₹28.32 करोड़ थे।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
फार्म पीस के शेयरों की लिस्टिंग भले ही आईपीओ प्राइस से काफी ऊपर हुई है, लेकिन लिस्टिंग के बाद लोअर सर्किट लगना यह भी दिखाता है कि शेयर में काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
SME शेयरों में आमतौर पर लिक्विडिटी और कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम अधिक हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ लिस्टिंग गेन देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं, वैल्यूएशन और शेयर में आगे की लिक्विडिटी को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
निष्कर्ष
Farm Peace IPO Listing ने निवेशकों को शानदार शुरुआत दी। ₹59 के इश्यू प्राइस वाला शेयर ₹112.10 पर लिस्ट हुआ और कुछ ही देर बाद ₹106.50 के लोअर सर्किट पर आ गया। इसके बावजूद आईपीओ निवेशक इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 80.51 फीसदी ऊपर हैं। 2,000 शेयरों के एक लॉट पर लोअर सर्किट के भाव के हिसाब से करीब ₹95,000 का मुनाफा बन रहा है।
हालांकि, आगे शेयर का प्रदर्शन कंपनी के कारोबार, वित्तीय नतीजों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। इसलिए निवेशकों को केवल शुरुआती लिस्टिंग गेन के आधार पर फैसला लेने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करें तथा जरूरत पड़ने पर अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता।


