Deepa Jewellers IPO Listing: गोल्ड और डायमंड ज्वैलरी कारोबार से जुड़ी दीपा ज्वैलर्स के शेयरों ने शेयर बाजार में शानदार एंट्री की है। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और इश्यू कुल 43 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। ₹177 के इश्यू प्राइस के मुकाबले शेयर BSE पर ₹221.05 और NSE पर ₹221.00 पर लिस्ट हुआ। इस तरह आईपीओ निवेशकों को शुरुआत में करीब 25 फीसदी का लिस्टिंग गेन मिला।
हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर में बिकवाली देखने को मिली और इसकी कीमत शुरुआती स्तर से नीचे आ गई। BSE पर शेयर गिरकर ₹201.30 तक पहुंच गया। इस स्तर पर भी आईपीओ निवेशक करीब 13.73 फीसदी के मुनाफे में बने हुए थे।
₹177 के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹221 पर लिस्टिंग
दीपा ज्वैलर्स का आईपीओ 1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। कंपनी ने आईपीओ के लिए ₹177 प्रति शेयर का प्राइस तय किया था। निवेशकों की मजबूत मांग के चलते इश्यू को कुल 43.40 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।
लिस्टिंग के दिन BSE पर शेयर ₹221.05 और NSE पर ₹221.00 के भाव पर खुला। यानी निवेशकों को इश्यू प्राइस के मुकाबले लगभग 25 फीसदी का तत्काल फायदा मिला।
हालांकि, शुरुआती तेजी ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी और शेयर में मुनाफावसूली देखने को मिली। कारोबार के दौरान BSE पर शेयर ₹201.30 तक फिसल गया। फिर भी यह इश्यू प्राइस से करीब 13.73 फीसदी ऊपर था।
IPO को किस कैटेगरी से कितनी बोली मिली?
दीपा ज्वैलर्स के आईपीओ को सभी प्रमुख निवेशक वर्गों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। कुल मिलाकर इश्यू 43.40 गुना सब्सक्राइब हुआ।
| निवेशक वर्ग | सब्सक्रिप्शन |
|---|---|
| QIB | 36.73 गुना |
| NII | 109.04 गुना |
| रिटेल निवेशक | 19.09 गुना |
| कुल | 43.40 गुना |
QIB यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए आरक्षित हिस्सा 36.73 गुना भरा। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी NII कैटेगरी में सबसे ज्यादा मांग दिखाई दी और यह हिस्सा 109.04 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं रिटेल निवेशकों का हिस्सा 19.09 गुना भरा।
₹460 करोड़ के IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी कंपनी?
दीपा ज्वैलर्स का आईपीओ कुल ₹460 करोड़ का था। इसमें कंपनी ने नए शेयर जारी करने के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल के जरिए मौजूदा शेयरधारकों को हिस्सेदारी बेचने का मौका दिया।
आईपीओ में ₹250 करोड़ के नए शेयर जारी किए गए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 1,18,48,340 शेयरों की ऑफर फॉर सेल के तहत बिक्री हुई।
ऑफर फॉर सेल से मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाती, बल्कि यह राशि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलती है। वहीं फ्रेश इश्यू से प्राप्त रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने कारोबार की जरूरतों को पूरा करने में करेगी।
कंपनी के मुताबिक:
- ₹215 करोड़ लॉन्ग-टर्म वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए
- ₹12.15 करोड़ सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए
- ₹41.95 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों के लिए
इस तरह कंपनी का बड़ा फोकस कारोबार के लिए जरूरी वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराने पर रहेगा।
क्या करती है Deepa Jewellers?
दीपा ज्वैलर्स मुख्य रूप से सोने और हीरे के आभूषणों की रिटेल और होलसेल बिक्री के कारोबार में है। कंपनी की मौजूदगी दक्षिण भारत में मजबूत बताई गई है और इसके ग्राहक देश के कई राज्यों में फैले हुए हैं।
जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के ग्राहक 13 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद थे। इसके ग्राहक आधार में 47 ज्वैलरी रिटेल चेन और 326 स्टैंडअलोन स्टोर शामिल थे।
कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में करीब 16 प्रोडक्ट कैटेगरी और 110 SKUs शामिल हैं। कारोबार को सपोर्ट करने के लिए कंपनी थर्ड-पार्टी मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल करती है।
लगातार मजबूत हुई कंपनी की वित्तीय स्थिति
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो हाल के वर्षों में इसमें अच्छी वृद्धि देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच कंपनी का शुद्ध मुनाफा 107 फीसदी से ज्यादा CAGR की दर से बढ़कर ₹104.79 करोड़ हो गया।
इसी अवधि में कंपनी की कुल आय भी करीब 37 फीसदी CAGR की दर से बढ़ी और वित्त वर्ष 2026 में यह ₹1,927.73 करोड़ तक पहुंच गई।
मार्च 2026 तिमाही के अंत में कंपनी पर कुल करीब ₹111.11 करोड़ का कर्ज था। वहीं उसके रिजर्व और सरप्लस की राशि करीब ₹221.67 करोड़ थी।
कंपनी के बढ़ते मुनाफे और आय के आंकड़े निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं, लेकिन किसी भी शेयर में निवेश का फैसला केवल आईपीओ लिस्टिंग गेन या पिछले वित्तीय प्रदर्शन को देखकर नहीं किया जाना चाहिए। ज्वैलरी कारोबार में सोने की कीमतों, मांग, मार्जिन और वर्किंग कैपिटल की जरूरत जैसे कारक भी कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
दीपा ज्वैलर्स के शेयर की बाजार में मजबूत शुरुआत हुई है। ₹177 के इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 25 फीसदी प्रीमियम पर लिस्टिंग ने आईपीओ निवेशकों को शुरुआत में अच्छा रिटर्न दिया। हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर में मुनाफावसूली भी देखने को मिली।
ऐसे में जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर मिले हैं, उन्हें कंपनी के आगामी तिमाहियों के नतीजों, मुनाफे, कर्ज, कैश फ्लो और ज्वैलरी कारोबार की मांग पर नजर रखनी चाहिए। वहीं नए निवेशकों के लिए केवल लिस्टिंग के बाद हुई तेजी के आधार पर खरीदारी करना उचित रणनीति नहीं हो सकती।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता।


