Rays of Belief IPO Listing: BSE पर प्रीमियम के साथ एंट्री, NSE पर फ्लैट लिस्टिंग
Rays of Belief IPO Listing: न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स (NDDs) से प्रभावित बच्चों के इलाज, थेरेपी और विकास में मदद करने वाली Rays of Belief के शेयरों ने शेयर बाजार में एंट्री कर ली है। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और इश्यू कुल 107.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
आईपीओ में शेयरों का इश्यू प्राइस ₹239 प्रति शेयर तय किया गया था। लिस्टिंग के दिन कंपनी के शेयर BSE पर ₹243 पर खुले, जबकि NSE पर ₹239 पर लिस्ट हुए। इस तरह BSE पर आईपीओ निवेशकों को करीब 1.67% का लिस्टिंग गेन मिला, जबकि NSE पर शेयर की एंट्री इश्यू प्राइस के बराबर रही।
हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर में बिकवाली देखने को मिली। BSE पर शेयर गिरकर ₹234 तक पहुंच गया। इस स्तर पर भी आईपीओ निवेशक इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 2.09% फायदे में रहे।
3 दिन में 107 गुना से ज्यादा भरा था IPO
Rays of Belief का ₹125 करोड़ का आईपीओ 1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। निवेशकों ने इस इश्यू में जमकर पैसा लगाया और कुल मिलाकर यह 107.71 गुना सब्सक्राइब हुआ।
कैटेगरी के हिसाब से देखें तो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा एक्स-एंकर आधार पर 9.01 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) की कैटेगरी में 279.11 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 195.86 गुना भरा।
इस आईपीओ में कंपनी ने ₹10 फेस वैल्यू वाले 52.30 लाख नए शेयर जारी किए हैं। यानी यह पूरा इश्यू फ्रेश इश्यू था और इससे जुटाई गई रकम कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल की जानी है।
कंपनी IPO से जुटाई रकम का क्या करेगी?
Rays of Belief के आईपीओ के जरिए जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी की कारोबारी जरूरतों और विस्तार से जुड़े उद्देश्यों के लिए किया जाना है। कंपनी का फोकस देश में अपने सेंटर नेटवर्क को बढ़ाने और बच्चों के लिए उपलब्ध सेवाओं को मजबूत करने पर है।
तेजी से बढ़ते नेटवर्क के बीच कंपनी ने भारत के अलावा अमेरिका में भी अपनी मौजूदगी बनाई है। ऐसे में आईपीओ से मिलने वाली पूंजी कंपनी के विस्तार और ऑपरेशनल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
क्या काम करती है Rays of Belief?
Rays of Belief न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स यानी NDDs से प्रभावित बच्चों के लिए इलाज, थेरेपी और विकास संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी जिन स्थितियों पर काम करती है, उनमें ऑटिज्म, ADHD, डाउन सिंड्रोम, सेरेब्रल पाल्सी, इंटेलेक्चुअल डिजेबिलिटी, लर्निंग डिजेबिलिटी और ग्लोबल डेवलपमेंटल डिले जैसी समस्याएं शामिल हैं।
कंपनी ने साल 2018 में गुड़गांव में अपना पहला सेंटर शुरू किया था। इसके बाद इसने देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से विस्तार किया।
वित्त वर्ष 2023 में कंपनी के पास 71 सेंटर थे, जबकि वित्त वर्ष 2026 के अंत तक इसका नेटवर्क बढ़कर 57 शहरों और 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 136 सेंटर तक पहुंच गया।
इन 136 सेंटरों में:
- 42 सेंटर टियर-1 शहरों में
- 77 सेंटर टियर-2 शहरों में
- 17 सेंटर टियर-3 शहरों में
मौजूद हैं।
बच्चों के लिए 2,000 से ज्यादा Teaching Tools
कंपनी का मुख्य फोकस 18 महीने से 12 साल तक की उम्र के बच्चों पर है। हालांकि, कुछ विशेष कार्यक्रमों का लाभ 15 साल तक के बच्चों को भी दिया जाता है।
Rays of Belief के सेंटरों में बच्चों की सीखने और विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 150 से ज्यादा Teaching Tools उपलब्ध हैं।
इसके अलावा माता-पिता को घर पर बच्चों के साथ अभ्यास करने में मदद देने के लिए कंपनी 2,000 से ज्यादा Teaching Tools वाले Home-Learning Kits भी उपलब्ध कराती है।
अमेरिका में भी बढ़ाया कारोबार
Rays of Belief ने जून 2025 में अमेरिका में दो कंपनियों का अधिग्रहण किया था। इनमें Mom’s Belief US को कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी बनाया गया, जबकि Allergy & Immunology Virginia, LLC को स्टेप-डाउन सब्सिडियरी के रूप में शामिल किया गया।
इस अधिग्रहण के बाद कंपनी को अमेरिका के वर्जीनिया में Salem, Lynchburg और Roanoke में तीन सेंटर भी मिले।
इससे कंपनी को भारतीय बाजार के बाहर अपनी सेवाओं का विस्तार करने में मदद मिली है।
Rays of Belief की वित्तीय स्थिति कैसी है?
कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में कारोबार में अच्छी वृद्धि देखने को मिली है।
वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच कंपनी का शुद्ध मुनाफा करीब 142% के CAGR से बढ़कर ₹4.96 करोड़ हो गया। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय 63% से अधिक के CAGR के साथ बढ़कर ₹82.06 करोड़ पहुंच गई।
मार्च 2026 के अंत तक कंपनी पर कुल करीब ₹3.61 करोड़ का कर्ज था। वहीं कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में करीब ₹15.22 करोड़ मौजूद थे।
ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ-साथ मुनाफे में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, किसी भी IPO में निवेश से पहले सिर्फ लिस्टिंग गेन या सब्सक्रिप्शन आंकड़ों को देखकर फैसला करना उचित नहीं है। कंपनी की वैल्यूएशन, भविष्य की ग्रोथ, प्रतिस्पर्धा और जोखिमों को भी समझना जरूरी है।
107 गुना सब्सक्रिप्शन के बावजूद लिस्टिंग क्यों रही मामूली?
Rays of Belief IPO को भले ही 107.71 गुना की शानदार बोली मिली, लेकिन लिस्टिंग पर शेयरों ने निवेशकों को बहुत बड़ा रिटर्न नहीं दिया।
BSE पर ₹239 के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹243 की शुरुआत सिर्फ करीब 1.67% प्रीमियम दर्शाती है। NSE पर शेयर की लिस्टिंग इश्यू प्राइस पर ही हुई।
इससे यह बात साफ होती है कि किसी IPO को मिलने वाला भारी सब्सक्रिप्शन हमेशा मजबूत लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं होता। लिस्टिंग के समय बाजार का मूड, कंपनी की वैल्यूएशन, निवेशकों की मांग और शेयर की मौजूदा कीमत जैसे कई फैक्टर असर डालते हैं।
निवेशकों के लिए क्या समझना जरूरी है?
Rays of Belief के IPO को निवेशकों से जबरदस्त मांग मिली और कंपनी का कारोबार भी पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद शेयर की लिस्टिंग अपेक्षाकृत सीमित प्रीमियम पर हुई और बाद में कीमत इश्यू प्राइस से नीचे भी चली गई।
इसलिए अगर आप लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल IPO के 107 गुना सब्सक्रिप्शन को आधार बनाकर फैसला न लें। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, भविष्य की विस्तार योजनाओं और बाजार जोखिमों का अध्ययन करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और जोखिमों का अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता है।


