वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने पुराने और विवादित नारे “Drill, Baby, Drill” को दोहराते हुए ब्रिटेन की ऊर्जा नीति पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि यूनाइटेड किंगडम अपने ही संसाधनों को नजरअंदाज कर रहा है और नॉर्वे से महंगा तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को कमजोर बना रहा है।
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz पर अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में कहा कि:
- ब्रिटेन के पास दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा संसाधनों में से एक है (North Sea)
- फिर भी वह घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बजाय आयात पर निर्भर है
- और नॉर्वे जैसे देश इससे भारी मुनाफा कमा रहे हैं
उन्होंने खास तौर पर “NO MORE WINDMILLS!” कहकर ब्रिटेन की रिन्यूएबल एनर्जी नीति पर भी निशाना साधा।
North Sea: यूरोप का ऊर्जा खजाना
North Sea पिछले कई दशकों से यूरोप का प्रमुख तेल और गैस स्रोत रहा है। ब्रिटेन और नॉर्वे दोनों इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन करते हैं।
लेकिन अंतर यहां आता है:
- नॉर्वे ने उत्पादन जारी रखा और बढ़ाया
- जबकि ब्रिटेन ने पर्यावरणीय नीतियों और “Net Zero” लक्ष्य के तहत उत्पादन सीमित कर दिया
यही अंतर आज दोनों देशों की ऊर्जा स्थिति में साफ दिखाई दे रहा है।
नॉर्वे बनाम ब्रिटेन: किसकी नीति सही?
नॉर्वे ने:
- तेल उत्पादन जारी रखा
- निर्यात बढ़ाया
- और ऊर्जा संकट के दौरान भारी मुनाफा कमाया
वहीं ब्रिटेन:
- आयात पर निर्भर हो गया
- महंगे दामों पर तेल खरीद रहा है
- और घरेलू उद्योग दबाव में है
ट्रंप का दावा है कि नॉर्वे ब्रिटेन को दोगुनी कीमत पर तेल बेच रहा है — हालांकि यह राजनीतिक बयान है, लेकिन इसमें यह संकेत जरूर है कि ब्रिटेन की ऊर्जा रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
“Net Zero” vs Energy Security
ब्रिटेन की सरकार “Net Zero” (कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य) को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत:
- फॉसिल फ्यूल्स का उपयोग कम करना
- रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देना
- और कार्बन उत्सर्जन घटाना शामिल है
लेकिन सवाल यह है:
क्या यह नीति ऊर्जा संकट के समय टिकाऊ है?
Donald Trump का मानना है कि यह रणनीति आर्थिक रूप से नुकसानदायक है, खासकर तब जब वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ रही हों।
Aberdeen: गिरता हुआ “ऑयल कैपिटल”
Aberdeen कभी यूरोप का “ऑयल कैपिटल” माना जाता था। यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तेल उद्योग पर आधारित थी।
लेकिन अब:
- निवेश कम हो रहा है
- नौकरियां घट रही हैं
- और आर्थिक गतिविधि धीमी पड़ गई है
ट्रंप ने कहा कि अगर ब्रिटेन अपनी ऊर्जा नीति बदलता, तो Aberdeen आज एक आर्थिक बूम देख रहा होता।
वैश्विक ऊर्जा संकट और IMF की चेतावनी
International Monetary Fund ने भी चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz में तनाव जारी रहता है, तो ऊर्जा कीमतें और बढ़ सकती हैं।
इसका असर:
- यूरोप की अर्थव्यवस्था पर
- महंगाई पर
- और उद्योगों पर पड़ेगा
ब्रिटेन जैसे देश, जो आयात पर ज्यादा निर्भर हैं, ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
क्या बदलेगी UK की नीति?
ब्रिटेन के अंदर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग चाहते हैं कि:
- नए तेल प्रोजेक्ट्स (जैसे Rosebank, Jackdaw) को मंजूरी दी जाए
- घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाए
वहीं दूसरी तरफ:
- पर्यावरण समर्थक समूह इसका विरोध कर रहे हैं
- और Net Zero लक्ष्य को प्राथमिकता दे रहे हैं
अमेरिका का रुख क्या है?
Donald Trump का यह बयान केवल आलोचना नहीं, बल्कि एक संकेत भी हो सकता है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए दबाव बढ़ा सकता है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह आधिकारिक नीति का हिस्सा बनेगा या नहीं।
आम लोगों पर क्या असर?
ऊर्जा नीति का असर सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ता है।
अगर तेल महंगा होता है:
- पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं
- बिजली महंगी होती है
- और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ती हैं
यानी यह बहस सीधे आम आदमी की जेब से जुड़ी है।
आगे क्या?
आने वाले समय में कुछ बड़े सवाल तय करेंगे कि स्थिति किस दिशा में जाएगी:
- क्या UK अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव करेगा?
- क्या वैश्विक तेल कीमतें और बढ़ेंगी?
- क्या रिन्यूएबल एनर्जी और फॉसिल फ्यूल्स के बीच संतुलन बन पाएगा?
निष्कर्ष
Donald Trump का “Drill, Baby, Drill” बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बहस का केंद्र बन चुका है।
North Sea जैसे संसाधनों का उपयोग करना या पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राथमिकता देना — यह सिर्फ UK ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा सवाल है।
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