नई दिल्ली: चीन में आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता खर्च में नरमी के दौर के बावजूद एक जापानी फूड ब्रांड ने ऐसा कमाल कर दिखाया है जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। जापान की मशहूर कन्वेयर-बेल्ट सुशी चेन Sushiro चीन के युवाओं के बीच एक बड़े सोशल मीडिया ट्रेंड में बदल चुकी है। हालात ऐसे हैं कि लोग सिर्फ सुशी खाने के लिए 5 घंटे से लेकर 14 घंटे तक लंबी कतारों में इंतजार कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इस लोकप्रियता की वजह सिर्फ खाना नहीं है। सोशल मीडिया पर खाली प्लेटों के ऊंचे-ऊंचे टावर बनाकर वीडियो पोस्ट करने का ट्रेंड इस ब्रांड को नई ऊंचाइयों पर ले गया है। इसका असर कंपनी की कमाई और शेयर बाजार दोनों पर साफ दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया ने बना दिया नया स्टेटस सिंबल
चीन के लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Douyin और Xiaohongshu पर इन दिनों “Sushiro Tower” नाम का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। ग्राहक सुशी खाने के बाद खाली प्लेटों को एक के ऊपर एक रखकर ऊंचे टावर बनाते हैं और फिर उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं।
60 से 80 प्लेटों तक के टावर बनाना अब युवाओं के बीच एक तरह का स्टेटस सिंबल बन गया है। कई वीडियो को लाखों और करोड़ों व्यूज मिल चुके हैं। इससे ब्रांड की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की युवा पीढ़ी अब केवल खाने के स्वाद के लिए नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जा सकने वाले अनुभवों के लिए भी रेस्तरां चुन रही है। Sushiro ने इसी मनोविज्ञान को समझकर खुद को एक लाइफस्टाइल ब्रांड की तरह स्थापित किया है।
14 घंटे तक इंतजार करने को तैयार ग्राहक
Sushiro की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई शहरों में ग्राहकों को टेबल पाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ आउटलेट्स पर ग्राहकों ने 5 से 14 घंटे तक कतार में खड़े रहने की जानकारी साझा की है। वीकेंड और छुट्टियों के दौरान भीड़ और ज्यादा बढ़ जाती है।
शंघाई, गुआंगझोउ और अन्य बड़े शहरों में Sushiro के आउटलेट्स के बाहर लंबी लाइनें आम दृश्य बन चुकी हैं। कई लोग पहले से टोकन लेकर आसपास घूमते रहते हैं और अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं।
कमाई में आया जबरदस्त उछाल
ग्राहकों की बढ़ती संख्या का सीधा फायदा कंपनी की कमाई में देखने को मिला है।
Sushiro की पैरेंट कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही पूरे साल के ऑपरेटिंग प्रॉफिट लक्ष्य का लगभग 70% हासिल कर लिया। यह प्रदर्शन निवेशकों की उम्मीदों से काफी बेहतर माना जा रहा है।
कंपनी की मजबूत बिक्री और तेजी से बढ़ती ग्राहक संख्या ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। यही वजह है कि टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयर इस साल करीब 23% तक चढ़ चुके हैं।
यह प्रदर्शन जापान के प्रमुख शेयर सूचकांक TOPIX से भी बेहतर रहा है। ऐसे में Sushiro जापान के सबसे सफल उपभोक्ता ब्रांडों में गिना जाने लगा है।
मंदी के दौर में क्यों सफल हुआ Sushiro?
चीन की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ समय से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। रियल एस्टेट सेक्टर की कमजोरी, रोजगार संबंधी चिंताएं और उपभोक्ता खर्च में कमी जैसी समस्याओं के बीच कई कंपनियां संघर्ष कर रही हैं।
इसके बावजूद Sushiro की सफलता के पीछे कुछ खास वजहें हैं।
सबसे पहले, कंपनी ने अपनी कीमतें प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले आकर्षक रखीं। ग्राहक अपेक्षाकृत कम कीमत पर प्रीमियम क्वालिटी की सुशी का आनंद ले सकते हैं।
दूसरा, कंपनी ने खाने को सिर्फ भोजन नहीं बल्कि एक मनोरंजक अनुभव में बदल दिया। यही कारण है कि युवा ग्राहक बार-बार यहां लौट रहे हैं।
तीसरा, सोशल मीडिया मार्केटिंग ने कंपनी को बिना पारंपरिक विज्ञापनों पर ज्यादा खर्च किए लाखों संभावित ग्राहकों तक पहुंचा दिया।
ग्राहकों को रोकने के लिए डिजिटल गेमिंग का इस्तेमाल
Sushiro ने अपने स्टोर्स में Digiro नाम का डिजिटल ऑर्डरिंग सिस्टम लगाया है। यह सिर्फ ऑर्डर लेने का काम नहीं करता बल्कि ग्राहकों को मनोरंजन का अनुभव भी देता है।
जब कोई ग्राहक 60 युआन या उससे अधिक खर्च करता है तो उसे एक डिजिटल लॉटरी गेम खेलने का मौका मिलता है।
इस गेम में जीतने वाले ग्राहकों को सुशी कैरेक्टर वाले खिलौने, कलेक्टिबल आइटम और अन्य उपहार दिए जाते हैं।
यह रणनीति खासकर युवा ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। कई ग्राहक सिर्फ इन रिवॉर्ड्स को हासिल करने के लिए बार-बार रेस्तरां में लौट रहे हैं।
वेटिंग टोकन की भी होने लगी कालाबाजारी
लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि कुछ लोग इससे पैसा कमाने का नया तरीका भी ढूंढ चुके हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार सेकंड-हैंड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर Sushiro के वेटिंग टोकन बेचे जा रहे हैं। कुछ मामलों में इन टोकनों की कीमत 30 युआन तक पहुंच गई, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 420 रुपये के बराबर है।
यानी लोग सिर्फ लाइन में जल्दी जगह पाने के लिए भी अतिरिक्त पैसा खर्च करने को तैयार हैं।
यह किसी भी रेस्तरां ब्रांड के लिए बेहद असामान्य स्थिति मानी जाती है और इसकी लोकप्रियता का बड़ा संकेत है।
2021 में हुई थी चीन में एंट्री
Sushiro ने चीन में अपना पहला आउटलेट वर्ष 2021 में गुआंगझोउ में शुरू किया था। शुरुआत में कंपनी को सामान्य प्रतिक्रिया मिली, लेकिन पिछले वर्ष शंघाई में विस्तार के बाद इसकी लोकप्रियता अचानक बढ़ने लगी।
शंघाई के युवाओं ने इसे तेजी से अपनाया और सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने लगे। इसके बाद अन्य शहरों में भी ब्रांड की पहचान मजबूत होती गई।
आज Sushiro चीन के सबसे चर्चित विदेशी फूड ब्रांडों में शामिल हो चुका है।
क्या है इस सफलता का बड़ा सबक?
Sushiro की कहानी सिर्फ एक रेस्तरां चेन की सफलता नहीं है। यह दिखाती है कि आज के दौर में किसी ब्रांड की सफलता केवल उसके उत्पाद की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करती।
सोशल मीडिया, ग्राहक अनुभव, डिजिटल तकनीक और सही प्राइसिंग का मेल किसी भी कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
चीन में Sushiro की लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि यदि कोई ब्रांड युवाओं की पसंद और डिजिटल संस्कृति को समझ ले, तो वह आर्थिक सुस्ती के माहौल में भी रिकॉर्ड कमाई कर सकता है।


