नई दिल्ली: इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें परीक्षा सुधार (Exam Reforms) से जुड़े एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का नेतृत्व सौंपा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार बहस चल रही है।
नंदन नीलेकणि सिर्फ भारत की सबसे सफल आईटी कंपनियों में से एक इन्फोसिस के सह-संस्थापक ही नहीं हैं, बल्कि आधार (Aadhaar) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना के प्रमुख चेहरों में भी शामिल रहे हैं। टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस और नीति निर्माण में उनके योगदान ने उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों और टेक लीडर्स की सूची में जगह दिलाई है। आइए जानते हैं कि उनकी कुल संपत्ति कितनी है और उनका अब तक का सफर कैसा रहा है।
नंदन नीलेकणि की नेटवर्थ कितनी है?
फोर्ब्स रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, 26 जुलाई 2026 तक नंदन नीलेकणि की अनुमानित नेटवर्थ 2.4 अरब डॉलर (लगभग 23,176 करोड़ रुपये) है। इसी संपत्ति के दम पर वह भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची में शामिल हैं।
उनकी अधिकांश संपत्ति इन्फोसिस में हिस्सेदारी, निवेश और विभिन्न टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश से जुड़ी हुई है। समय के साथ उन्होंने कई स्टार्टअप और टेक वेंचर में भी निवेश किया है, जिससे उनकी संपत्ति में लगातार वृद्धि हुई है।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 1981 में एन.आर. नारायण मूर्ति और छह अन्य साथियों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की।
इन्फोसिस को एक छोटी आईटी कंपनी से वैश्विक टेक दिग्गज बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कंपनी में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर भी बने।
2009 में छोड़ी इन्फोसिस, फिर 2017 में की वापसी
नंदन नीलेकणि ने वर्ष 2009 में इन्फोसिस छोड़ दी थी ताकि वह सरकार के साथ डिजिटल पहचान परियोजना पर काम कर सकें।
हालांकि, 2017 में कंपनी के बोर्ड स्तर पर विवाद और तत्कालीन सीईओ के इस्तीफे के बाद उन्हें दोबारा नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में वापस बुलाया गया। उनकी वापसी को इन्फोसिस के लिए स्थिरता और भरोसे की वापसी माना गया।
आधार परियोजना के पीछे सबसे बड़ा चेहरा
भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली आधार को सफल बनाने का सबसे बड़ा श्रेय नंदन नीलेकणि को दिया जाता है।
उन्होंने यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के पहले चेयरमैन के रूप में देशभर में करोड़ों लोगों को डिजिटल पहचान से जोड़ने की ऐतिहासिक परियोजना का नेतृत्व किया। आज आधार बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, मोबाइल कनेक्शन और कई डिजिटल सेवाओं की रीढ़ बन चुका है।
स्टार्टअप्स में भी किया बड़ा निवेश
इन्फोसिस के अलावा नंदन नीलेकणि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के बड़े समर्थकों में गिने जाते हैं।
उन्होंने टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए Fundamentum Partnership जैसे वेंचर कैपिटल फंड का समर्थन किया। यह फंड तेजी से बढ़ रही टेक कंपनियों में निवेश करता है।
IIT बॉम्बे को दिया करोड़ों का दान
साल 2023 में नंदन नीलेकणि ने अपने अल्मा मैटर आईआईटी बॉम्बे को 3.8 करोड़ डॉलर (करीब 315 करोड़ रुपये) का दान दिया था।
इस राशि का उपयोग रिसर्च, इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की तकनीकों के विकास में किया जा रहा है। इसे भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को मिला सबसे बड़े निजी दानों में से एक माना गया।
पीएम मोदी ने सौंपी नई जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को घोषणा की कि नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स बनाई गई है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और कई आरोपी जेल में हैं।
सरकार का मानना है कि डिजिटल गवर्नेंस और बड़े स्तर की तकनीकी परियोजनाओं का अनुभव रखने वाले नंदन नीलेकणि परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासनिक सुधार लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नंदन नीलेकणि की उपलब्धियां एक नजर में
- इन्फोसिस के सह-संस्थापक।
- 2017 से इन्फोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन।
- UIDAI के पहले चेयरमैन और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार।
- भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रमुख निवेशक।
- IIT बॉम्बे को 3.8 करोड़ डॉलर का दान।
- परीक्षा सुधारों पर केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय टास्क फोर्स के प्रमुख।
निष्कर्ष
नंदन नीलेकणि केवल एक सफल उद्योगपति नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल परिवर्तन के प्रमुख शिल्पकारों में से एक हैं। आधार जैसी ऐतिहासिक परियोजना से लेकर इन्फोसिस के नेतृत्व और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने तक उनका योगदान व्यापक रहा है। अब परीक्षा सुधारों जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद एक बार फिर उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।


