नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने महानदी ऑफशोर बेसिन में अपने पहले गहरे समुद्री खोज कुएं (Deep Exploratory Well) की ड्रिलिंग शुरू कर दी है। यह ड्रिलिंग केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन मिशन’ का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य समुद्र की गहराइयों में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस (हाइड्रोकार्बन) के विशाल भंडार की खोज करना है।
देश में ऊर्जा की बढ़ती मांग और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस मिशन को भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
समुद्र मंथन मिशन क्या है?
‘समुद्र मंथन मिशन’ भारत सरकार की एक रणनीतिक पहल है, जिसके तहत समुद्र के गहरे और अत्यधिक गहरे हिस्सों में मौजूद हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज की जाएगी। इस मिशन का उद्देश्य ऐसे तेल और गैस भंडारों को तलाशना है, जिनका अभी तक दोहन नहीं किया गया है।
ONGC ने इस अभियान के तहत MN-DW18-1-H-D नामक पहले डीप एक्सप्लोरेटरी वेल की ड्रिलिंग शुरू की है। यह मिशन भविष्य में भारत के ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा दे सकता है।
ओडिशा तट के पास हो रही है ड्रिलिंग
यह खोज कुआं ओडिशा के तट से दूर महानदी ऑफशोर बेसिन में स्थित ‘कोणार्क’ खोज क्षेत्र से लगभग 23 नॉटिकल मील की दूरी पर खोदा जा रहा है।
ONGC के अनुसार, इससे पहले ‘उत्कल’ और ‘कोणार्क’ क्षेत्रों में हुई खोजों ने इस इलाके में हाइड्रोकार्बन की अच्छी संभावनाओं के संकेत दिए थे। अब उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यह नया अभियान शुरू किया गया है।
पीएम मोदी के विजन से जुड़ा अभियान
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अप्रयुक्त ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का पूरा उपयोग करने पर जोर दिया था। उसी दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को, जो पहले खोज के लिए प्रतिबंधित था, अब एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है।
इससे Open Acreage Licensing Policy (OALP) के आगामी चरणों में नए क्षेत्रों में तेल और गैस खोज के लिए कंपनियों को अवसर मिलेंगे।
भारत के समुद्र में छिपा है बड़ा ऊर्जा भंडार
सरकारी आकलन के अनुसार भारत के पूर्वी और पश्चिमी ऑफशोर बेसिन में लगभग 5,600 मिलियन टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हो सकते हैं। ये संसाधन समुद्र की सतह से लगभग 3,000 मीटर तक की गहराई में फैले हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन संसाधनों का सफलतापूर्वक दोहन किया गया तो भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर पर पूरा किया जा सकेगा।
DeepX मिशन सेंटर से मिलेगी तकनीकी मदद
गहरे समुद्र में तेल और गैस खोज जैसे जटिल अभियानों को सफल बनाने के लिए ONGC ने जनवरी 2026 में मुंबई में अपना अत्याधुनिक Deepwater Exploration Mission Centre (DeepX) शुरू किया था।
यह केंद्र अत्याधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और डीपवॉटर ड्रिलिंग विशेषज्ञता के जरिए समुद्री खोज अभियानों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
ड्रिलिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ONGC के अनुसार इस अभियान के प्रमुख लक्ष्य हैं—
- समुद्र में नए तेल और गैस भंडारों की खोज करना।
- घरेलू कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन बढ़ाना।
- कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना।
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना।
- ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देना।
- भविष्य में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आज भी विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। यदि समुद्र मंथन मिशन के तहत बड़े हाइड्रोकार्बन भंडार मिलते हैं तो इससे कई महत्वपूर्ण लाभ होंगे।
- तेल आयात बिल में कमी आएगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- उद्योगों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिलेगी।
- रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
- देश की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
निष्कर्ष
समुद्र मंथन मिशन केवल एक ड्रिलिंग अभियान नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा है। महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भविष्य में देश के लिए नए तेल और गैस भंडारों का रास्ता खोल सकती है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भारत आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता घटाकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगा सकता है।


