नई दिल्ली: भारत में तेजी से विस्तार कर रही ब्रिटेन की प्रीमियम कॉफी चेन कोस्टा कॉफी (Costa Coffee) को वित्त वर्ष 2025-26 में बड़ा झटका लगा है। पिछले पांच वर्षों में पहली बार कंपनी के भारत में संचालित कैफे (स्टोर) की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी के फ्रेंचाइजी पार्टनर देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड (DIL) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक भारत में कोस्टा कॉफी के 198 स्टोर रह गए, जबकि एक साल पहले इनकी संख्या 220 थी। यानी एक साल में 22 स्टोर बंद हो गए।
हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि स्टोरों की संख्या घटने के बावजूद कंपनी की कमाई बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अब केवल नए स्टोर खोलने के बजाय मौजूदा स्टोरों से अधिक राजस्व कमाने की रणनीति पर काम कर रही है।
5 साल में पहली बार घटी स्टोरों की संख्या
कोस्टा कॉफी ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगातार आक्रामक विस्तार किया था। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 इस सिलसिले में पहला ऐसा साल रहा जब नेटवर्क छोटा हुआ।
पिछले वर्षों में स्टोरों की संख्या
| वित्त वर्ष | स्टोरों की संख्या |
|---|---|
| FY21 | 44 |
| FY22 | 55 |
| FY23 | 112 |
| FY24 | 179 |
| FY25 | 220 |
| FY26 | 198 |
यह आंकड़े बताते हैं कि पांच वर्षों तक लगातार विस्तार करने के बाद पहली बार कंपनी को अपने नेटवर्क में कटौती करनी पड़ी।
स्टोर घटे, फिर भी 7% बढ़ी कमाई
स्टोरों की संख्या कम होने के बावजूद कोस्टा कॉफी का प्रदर्शन राजस्व के मामले में मजबूत रहा।
- FY25 परिचालन राजस्व: ₹198.5 करोड़
- FY26 परिचालन राजस्व: ₹212.5 करोड़
- वार्षिक वृद्धि: लगभग 7%
इससे साफ है कि कम स्टोरों के बावजूद प्रत्येक कैफे से औसतन अधिक बिक्री हुई। इससे कंपनी की प्रति स्टोर आय (Revenue per Store) में सुधार देखने को मिला।
क्यों बंद हुए 22 स्टोर?
देवयानी इंटरनेशनल की वार्षिक रिपोर्ट में स्टोर बंद होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
हालांकि कंपनी ने कहा कि उसने विस्तार के दौरान “अधिक अनुशासित और चयनात्मक (Disciplined and Selective) रणनीति” अपनाई है। इसका मतलब है कि अब कंपनी केवल उन्हीं स्थानों पर निवेश करना चाहती है जहां बेहतर ग्राहक संख्या और अधिक मुनाफे की संभावना हो।
विस्तार की रणनीति में बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रीमियम कैफे बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल अधिक स्टोर खोलना ही सफलता की गारंटी नहीं है।
कोस्टा कॉफी अब इन बातों पर अधिक ध्यान दे रही है—
- प्रति स्टोर अधिक बिक्री
- बेहतर लोकेशन का चयन
- लागत पर नियंत्रण
- ग्राहकों के अनुभव में सुधार
- लाभप्रद विस्तार
यही वजह है कि स्टोरों की संख्या कम होने के बावजूद कंपनी की आय बढ़ी है।
युवा ग्राहकों पर कंपनी का फोकस
देवयानी इंटरनेशनल ने कहा कि कोस्टा कॉफी भारत के प्रीमियम आउट-ऑफ-होम कॉफी मार्केट पर अपना फोकस बनाए हुए है।
कंपनी विशेष रूप से इन ग्राहकों को लक्ष्य बना रही है—
- जेन-जी (Gen Z)
- मिलेनियल्स
- युवा प्रोफेशनल्स
- कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र
कंपनी का कहना है कि नई ब्रांड रणनीति के कारण कोस्टा कॉफी युवाओं के लिए सामाजिक मेलजोल और काम करने की पसंदीदा जगह बनती जा रही है।
मेन्यू में भी किए गए बदलाव
बदलती उपभोक्ता पसंद को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने अपने मेन्यू में कई नए उत्पाद शामिल किए।
इन बदलावों का उद्देश्य था—
- युवाओं को आकर्षित करना
- प्रीमियम कॉफी अनुभव देना
- नए फ्लेवर और स्नैक्स पेश करना
- ग्राहक दोबारा लौटकर आएं, इसकी संभावना बढ़ाना
भारत को लेकर कंपनी का भरोसा बरकरार
स्टोरों की संख्या घटने के बावजूद कोस्टा कॉफी भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में मानती है।
अप्रैल 2025 में कंपनी के ग्लोबल सीईओ फिलिप शैले ने कहा था कि भारत पहले से ही कोस्टा कॉफी के दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है।
उन्होंने यह भी उम्मीद जताई थी कि आने वाले वर्षों में भारत कंपनी के टॉप-5 वैश्विक बाजारों में शामिल हो सकता है।
प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है
भारत का प्रीमियम कॉफी बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। कोस्टा कॉफी को स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ऐसे में अब कंपनियां केवल नए आउटलेट खोलने के बजाय प्रत्येक स्टोर की कमाई और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दे रही हैं।
निष्कर्ष
कोस्टा कॉफी के लिए वित्त वर्ष 2025-26 मिश्रित तस्वीर लेकर आया। एक ओर पांच वर्षों में पहली बार भारत में उसके 22 स्टोर बंद हुए, वहीं दूसरी ओर परिचालन राजस्व 7% बढ़कर ₹212.5 करोड़ पहुंच गया। इससे साफ है कि कंपनी अब आक्रामक विस्तार की बजाय लाभप्रद और टिकाऊ विकास की रणनीति अपना रही है। भारत को लेकर कंपनी का भरोसा अभी भी मजबूत है और आने वाले वर्षों में यहां उसके विस्तार की संभावनाएं बरकरार मानी जा रही हैं।


