पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और शांति वार्ता पर अनिश्चितता का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी50 भी करीब 300 अंक तक फिसल गया।
बाजार में इस गिरावट के चलते निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। शुरुआती कारोबार में बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹6 लाख करोड़ घटकर लगभग ₹467 लाख करोड़ रह गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगने के बाद global investors के बीच डर बढ़ गया है। इसी वजह से भारतीय बाजार में panic selling देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में क्या रहा हाल?
सुबह करीब 9:40 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,045 अंक टूटकर 76,282 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी50 करीब 288 अंक गिरकर 23,887 के आसपास ट्रेड करता दिखा।
बाजार खुलते ही लगभग सभी सेक्टर्स में दबाव दिखाई दिया। सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर गिरावट के साथ खुले, जिससे साफ संकेत मिला कि बिकवाली पूरे बाजार में फैली हुई है।
निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ कैसे डूबे?
बाजार में तेज गिरावट की वजह से listed companies का market capitalization तेजी से घट गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹6 लाख करोड़ कम हो गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक जब बाजार में broad-based selling होती है और large-cap stocks तेजी से गिरते हैं, तो market cap erosion बहुत तेजी से बढ़ता है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई?
आज बाजार में सबसे ज्यादा दबाव उन कंपनियों पर दिखाई दिया जो consumer spending, aviation, banking, auto और infrastructure sectors से जुड़ी हैं।
सबसे ज्यादा गिरावट Titan में देखी गई, जहां शेयर करीब 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा IndiGo, Mahindra & Mahindra, SBI, Eternal, Maruti, Bharti Airtel, Larsen & Toubro, Bajaj Finserv, UltraTech Cement और Adani Ports जैसे शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि HCL Tech में मामूली तेजी दिखाई दी, जबकि Sun Pharma लगभग सपाट कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का कहना है कि market uncertainty बढ़ने पर निवेशक सबसे पहले high-valuation stocks में profit booking शुरू करते हैं। यही वजह है कि कई बड़े stocks में तेज गिरावट दिखाई दी।
ब्रॉडर मार्केट्स का क्या रहा हाल?
केवल large-cap ही नहीं, बल्कि broader markets में भी भारी दबाव दिखाई दिया।
निफ्टी Midcap Index करीब 0.84 फीसदी गिर गया, जबकि Smallcap Index में 1.14 फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली। सेक्टरवाइज बात करें तो Nifty Consumer Durables, Nifty Media, Nifty Auto और Nifty Realty में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब global uncertainty बढ़ती है, तो investors सबसे पहले high-risk और high-valuation sectors से पैसा निकालते हैं। इसी वजह से broader markets में भी कमजोरी दिखाई दी।
आखिर क्यों टूटा शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ती geopolitical uncertainty है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे युद्ध खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई।
पिछले 10 हफ्तों से चल रहे संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद पर बाजार दांव लगा रहा था। लेकिन अब निवेशकों को डर है कि तेल सप्लाई बाधित हो सकती है, crude oil prices और बढ़ सकते हैं और global inflation फिर तेज हो सकती है।
इसी वजह से global equity markets में भी दबाव देखने को मिल रहा है।
कच्चे तेल ने क्यों बढ़ाई टेंशन?
बाजार की गिरावट की एक बड़ी वजह crude oil prices में तेजी भी रही। आज Brent Crude करीब 4 फीसदी उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में oil prices बढ़ने से import bill बढ़ता है, inflation पर दबाव बढ़ता है और corporate earnings प्रभावित होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि rising crude oil भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा risk factor बनता जा रहा है।
रुपये पर भी बढ़ा दबाव
शेयर बाजार की कमजोरी के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव दिखाई दिया। रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 फीसदी कमजोर होकर 94.88 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.48 पर बंद हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली, crude oil imports और डॉलर की मजबूती रुपये को कमजोर कर रहे हैं।
क्या आगे और गिर सकता है बाजार?
Market experts का कहना है कि short-term में volatility बनी रह सकती है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, crude oil 110 डॉलर के करीब पहुंचता है या FIIs बिकवाली जारी रखते हैं, तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि long-term investors को panic selling से बचने और quality stocks पर फोकस रखने की सलाह दी जा रही है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे volatile market में जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए।
उनका कहना है कि staggered investment strategy अपनानी चाहिए, मजबूत fundamentals वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए और global developments पर नजर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि geopolitical events आमतौर पर short-term panic पैदा करते हैं, लेकिन मजबूत कंपनियां लंबी अवधि में recovery दिखाती हैं।
FAQ
आज सेंसेक्स कितने अंक गिरा?
सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया।
बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
पश्चिम एशिया तनाव और crude oil prices में तेजी।
निवेशकों का कितना नुकसान हुआ?
बीएसई listed कंपनियों का market cap करीब ₹6 लाख करोड़ घट गया।
सबसे ज्यादा कौन सा शेयर टूटा?
Titan में सबसे ज्यादा करीब 5 फीसदी गिरावट देखी गई।
क्या आगे और गिरावट आ सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक geopolitical uncertainty बनी रहने पर volatility जारी रह सकती है।
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