पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब केवल तेल और सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह लड़ाई डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाली अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स पर नियंत्रण को लेकर बड़ा कदम उठाया है, जिससे वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य केवल दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग नहीं है, बल्कि यह global digital economy की भी एक बड़ी lifeline बन चुका है। इसी रास्ते से गुजरने वाली कई समुद्री इंटरनेट केबल यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों को जोड़ती हैं।
अगर इन केबल्स को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है या इनका संचालन बाधित होता है, तो भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र से गुजरने वाली सात प्रमुख undersea fiber-optic cables पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। इन cables के जरिए इंटरनेट डेटा, banking transactions, cloud services, stock market connectivity और global financial settlements का बड़ा हिस्सा संचालित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन नेटवर्क्स के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक वित्तीय लेनदेन होते हैं। यही वजह है कि अब यह मामला केवल regional conflict नहीं बल्कि global economic risk बनता जा रहा है।
ईरान ने क्या नई शर्तें रखीं?
ईरानी Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने समुद्र के नीचे मौजूद डिजिटल infrastructure के रखरखाव को लेकर कई नई शर्तें रखी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब विदेशी कंपनियों को ईरानी परमिट लेना होगा, लाइसेंस फीस देनी होगी और सुरक्षा शुल्क भी चुकाना पड़ सकता है।
ईरान ने यह भी कहा है कि इस क्षेत्र में होने वाले सभी maintenance और repair operations उसकी निगरानी और नियंत्रण में होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे global tech companies और telecom operators की चिंता काफी बढ़ गई है।
Meta, Amazon और Microsoft पर भी दबाव?
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने Meta, Amazon और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों से annual protection payments की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एक तरह का strategic digital pressure हो सकता है क्योंकि दुनिया की बड़ी cloud और internet services काफी हद तक undersea cable networks पर निर्भर करती हैं।
अगर इन कंपनियों को operations जारी रखने के लिए अतिरिक्त regulatory approvals और payments देने पड़ते हैं, तो global internet infrastructure की लागत भी बढ़ सकती है।
क्यों इतने अहम हैं ये Undersea Cables?
समुद्र के नीचे बिछी fiber-optic cables आधुनिक डिजिटल दुनिया की रीढ़ मानी जाती हैं। इन्हीं के जरिए international internet traffic, banking systems, stock exchanges, AI cloud servers और data centers एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया के करीब 95 फीसदी international internet data का आदान-प्रदान satellite नहीं बल्कि इन्हीं undersea cables के जरिए होता है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे तेजी से डिजिटल होती अर्थव्यवस्था वाले देशों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो सकती है। भारत digital payments, UPI transactions, stock market trading, cloud computing और IT exports के लिए global internet connectivity पर काफी निर्भर है।
अगर होर्मुज क्षेत्र की cables प्रभावित होती हैं, तो internet latency बढ़ सकती है, financial transactions धीमे हो सकते हैं, cloud services प्रभावित हो सकती हैं और international data flow बाधित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ ही मिनटों की disruption से करोड़ों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
कितना बड़ा है खतरा?
Stimson Center की analyst Masha Kofkin के मुताबिक active military conflict के दौरान undersea cables के damage होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जहाज का anchor नियंत्रण खोकर cables पर घिसट जाए, तो major blackout जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में satellite systems भी पूरी तरह backup नहीं दे पाएंगे क्योंकि global high-speed data transfer अभी भी largely submarine cables पर निर्भर करता है।
मरम्मत भी आसान नहीं
Undersea cable systems को repair करना बेहद महंगा और जटिल काम माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक transoceanic cable network बिछाने में 300 million डॉलर से लेकर 1 billion डॉलर तक का खर्च आ सकता है।
इनकी मरम्मत के लिए special deep-sea ships, advanced robotic systems और highly trained technical teams की जरूरत होती है।
अगर ईरान maintenance ships के प्रवेश को सीमित करता है, तो repair operations लंबे समय तक प्रभावित हो सकते हैं और global internet stability पर असर पड़ सकता है।
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण energy corridor माना जाता है। दुनिया का करीब 20 फीसदी crude oil trade और बड़ा LNG supply network इसी रास्ते से गुजरता है।
अब इसके साथ-साथ यह digital connectivity hub भी बन चुका है। यही वजह है कि geopolitical tensions बढ़ने पर global markets में चिंता बढ़ जाती है।
क्या वैश्विक इंटरनेट पर पड़ सकता है असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल global internet shutdown जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन जोखिम जरूर बढ़ गया है।
अगर military conflict बढ़ता है, undersea infrastructure को नुकसान पहुंचता है या repair access बाधित होता है, तो regional internet disruptions और financial instability देखने को मिल सकती है।
FAQ
Undersea cables क्या होती हैं?
ये समुद्र के नीचे बिछी fiber-optic cables होती हैं जो global internet और data transfer का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।
होर्मुज क्षेत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का बड़ा oil trade route और digital connectivity corridor दोनों है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
Digital payments, banking, cloud services और internet connectivity प्रभावित हो सकती है।
प्रतिदिन कितना financial transaction इन cables से गुजरता है?
करीब 10 ट्रिलियन डॉलर के global financial transactions।
क्या global internet बंद हो सकता है?
फिलहाल ऐसा खतरा नहीं है, लेकिन regional disruptions और slowdown का risk बढ़ सकता है।
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