प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने देश के सर्राफा बाजार और ज्वेलरी कारोबार में हलचल मचा दी है। हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा में पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे अगले एक साल तक शादी या दूसरे कार्यक्रमों के लिए सोना खरीदने से बचें। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा बचाना देश के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
पीएम मोदी की इस अपील के बाद देशभर के ज्वेलर्स और सर्राफा कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग इस अपील का पालन करते हैं, तो भारत के करीब ₹3 लाख करोड़ के wedding jewellery कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ गई ज्वेलर्स की चिंता?
भारत में शादी और सोने का रिश्ता बेहद गहरा माना जाता है। अधिकांश परिवार शादी में सोने के गहने खरीदते हैं, बेटी को gold jewellery देते हैं और इसे सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते हैं। आमतौर पर एक शादी में 50 ग्राम से 100 ग्राम तक सोने की ज्वेलरी खरीदी जाती है। यही वजह है कि wedding season भारत के jewellery market के लिए सबसे अहम समय माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर लोग एक साल तक सोने की खरीद कम करते हैं, तो इसका सीधा असर ज्वेलर्स, bullion traders, jewellery manufacturers और gold financing business पर पड़ सकता है। यही कारण है कि बाजार में चिंता का माहौल दिखाई देने लगा है।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
पीएम मोदी की अपील का असर सोमवार सुबह शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। बाजार खुलते ही कई gold jewellery stocks में भारी बिकवाली देखने को मिली और कुछ कंपनियों के शेयरों में 10 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि अगर gold demand घटती है, तो jewellery companies की sales और profit margins प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि gold sector से जुड़े शेयरों पर दबाव बढ़ गया।
भारत में कितना बड़ा है शादी वाला गोल्ड मार्केट?
भारत दुनिया के सबसे बड़े gold consuming देशों में शामिल है। देश में सालभर होने वाली कुल सोने की बिक्री का लगभग 60% से 70% हिस्सा wedding season में होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 40 से 50 लाख शादियां होती हैं। wedding jewellery segment का कारोबार ₹2 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। साल 2025-26 में इस सेक्टर में 30% से 40% तक की growth देखने को मिली है।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के अध्यक्ष राजेश रोकड़े का कहना है कि शादी के सीजन में gold demand भारतीय jewellery industry की सबसे बड़ी ताकत होती है। यही वजह है कि पीएम मोदी की अपील को उद्योग काफी गंभीरता से देख रहा है।
पीएम मोदी को ऐसी अपील क्यों करनी पड़ी?
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और crude oil prices में तेजी ने भारत की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और सोने का भी 90% से ज्यादा हिस्सा विदेशों से मंगाता है।
इन दोनों का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में crude oil import bill और gold import बढ़ने से भारत के foreign exchange reserves पर दबाव बढ़ जाता है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी gold purchases टालने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार क्यों घट रहा है?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक 1 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का foreign exchange reserve करीब 7.79 अरब डॉलर घट गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी लगभग 4.82 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि rising crude oil prices, बढ़ते gold imports और डॉलर की मजबूती विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि सरकार अब import-heavy sectors को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है।
भारत कितना सोना आयात करता है?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा gold consumer है। देश अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक सोना आयात करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हर साल 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन सिर्फ 1 से 2 टन के आसपास है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का gold import करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह लगभग 58 अरब डॉलर था। यानी gold imports में लगभग 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
अप्रैल में क्यों घट गया सोने का आयात?
हाल के महीनों में gold imports में गिरावट भी देखने को मिली है। जानकारी के मुताबिक सरकार ने banks पर 3% IGST लागू किया, जिसके बाद कई बैंकों ने gold imports कम कर दिए।
इसी वजह से जनवरी में करीब 100 टन सोने का आयात हुआ था, जो फरवरी में घटकर लगभग 65 टन रह गया। मार्च में यह 20-22 टन तक पहुंच गया जबकि अप्रैल में इसके केवल 15 टन रहने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह लगभग 30 वर्षों का सबसे निचला स्तर हो सकता है।
क्या सोने की कीमतों पर भी पड़ेगा असर?
इस समय सोने की कीमतें पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई हैं। अभी 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.50 लाख के ऊपर बना हुआ है, जबकि जनवरी 2026 में यह ₹1.90 लाख तक पहुंच गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर demand कमजोर पड़ती है और imports घटते हैं, तो gold prices में correction देखने को मिल सकता है। हालांकि geopolitical tensions और global uncertainty अभी भी gold prices को support दे रहे हैं।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक जिन परिवारों में शादी है, उनके सामने दुविधा की स्थिति बन सकती है। कई लोग investment purpose से gold buying टाल सकते हैं, जबकि traditional families अब भी शादी में gold खरीद जारी रख सकती हैं।
Market experts का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में यह साफ होगा कि लोग पीएम मोदी की अपील को कितनी गंभीरता से लेते हैं और इसका jewellery market पर कितना बड़ा असर पड़ता है।
FAQ
पीएम मोदी ने क्या अपील की?
उन्होंने लोगों से एक साल तक शादी या कार्यक्रमों के लिए सोना खरीदने से बचने की अपील की।
ज्वेलर्स क्यों चिंतित हैं?
क्योंकि भारत में wedding season gold demand का सबसे बड़ा source माना जाता है।
भारत कितना सोना आयात करता है?
भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक सोना आयात करता है।
क्या सोने की कीमतें गिर सकती हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक demand कमजोर पड़ने पर correction संभव है।
भारत का gold market कितना बड़ा है?
Wedding jewellery segment का कारोबार ₹2 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक माना जाता है।
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