स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर और रेपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट इंश्योरेंस जैसे सोशल सिक्योरिटी लाभ पाने के लिए न्यूनतम कार्य दिवसों की शर्त पूरी करनी होगी।
भारत सरकार ने Code on Social Security (CoSS) के तहत अंतिम नियमों की रूपरेखा तैयार कर दी है। इन नियमों का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो food delivery, ride-sharing और app-based services से जुड़े हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों का मकसद gig economy workers को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाना है। हालांकि part-time workers के लिए यह नियम चुनौती भी बन सकते हैं।
क्या हैं नए नियम?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अब social security benefits पाने के लिए gig workers को minimum working days की शर्त पूरी करनी होगी।
अगर कोई worker सिर्फ एक platform, जैसे केवल Swiggy या सिर्फ Zomato के साथ काम करता है, तो उसे एक वित्त वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करना जरूरी होगा।
वहीं अगर कोई worker एक से अधिक platforms, जैसे Ola और Uber दोनों पर सक्रिय है, तो यह सीमा बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई worker एक ही दिन में तीन अलग-अलग aggregators के लिए काम करता है, तो उस दिन को तीन अलग-अलग कार्य दिवस के रूप में गिना जाएगा। यानी ऐसे workers के लिए eligibility criteria पूरा करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
किन लाभों के लिए लागू होंगे नियम?
नए नियमों के तहत gig workers को health insurance, life insurance, accident insurance और दूसरे social security benefits दिए जा सकते हैं।
हालांकि इन लाभों का फायदा केवल उन्हीं workers को मिलेगा जो सरकार द्वारा तय minimum work criteria पूरा करेंगे। यानी नियमित रूप से काम करने वाले workers को ही social protection का लाभ मिलेगा।
पार्ट-टाइम गिग वर्कर्स पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं जो occasional delivery करते हैं, part-time cab driving करते हैं या side income के लिए platforms का इस्तेमाल करते हैं।
क्योंकि ऐसे workers के लिए 90 या 120 दिन की eligibility condition पूरी करना आसान नहीं होगा। हालांकि full-time gig workers के लिए यह नियम long-term financial security बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।
कंपनियों पर भी बढ़ी जिम्मेदारी
सरकार ने aggregators यानी platform companies के लिए भी सख्त नियम तय किए हैं।
अब कंपनियों को हर gig worker की जानकारी 45 दिनों के भीतर केंद्र सरकार के portal par upload करनी होगी। इसके अलावा नए joining और exit data को real-time या daily basis पर अपडेट करना भी जरूरी होगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि registration पूरा होने के बाद हर eligible worker को एक unique ID card जारी किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे gig workforce का centralized database तैयार करने में मदद मिलेगी और workers को future benefits देने की प्रक्रिया आसान होगी।
नियम तोड़ने पर कितना लगेगा जुर्माना?
सरकार ने social security fund में contribution नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त penalty provisions भी रखे हैं।
अगर कोई aggregator तय समय पर contribution जमा नहीं करता, तो उसे 12% annual interest यानी लगभग 1% monthly penalty देनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे companies पर compliance pressure बढ़ेगा और workers के benefits को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
60 साल के बाद नहीं मिलेगा लाभ
नए नियमों के मुताबिक gig workers को 60 वर्ष की आयु के बाद health insurance, life insurance और accident insurance जैसे social security benefits नहीं मिलेंगे।
इसके अलावा अगर कोई worker पिछले वित्त वर्ष में minimum work-days criteria पूरा नहीं करता, तो उसकी eligibility भी खत्म हो जाएगी। यानी benefits जारी रखने के लिए workers को लगातार active रहना होगा।
राज्यों को भी मिलेगा नियम बनाने का अधिकार
केंद्र सरकार द्वारा जारी ये final rules अब राज्यों के लिए guideline की तरह काम करेंगे।
इसका मतलब है कि राज्य सरकारें अपने-अपने social security frameworks और implementation models तैयार कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अलग-अलग राज्यों में gig worker policies में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।
भारत में कितनी तेजी से बढ़ रही है Gig Economy?
भारत में app-based jobs तेजी से बढ़ रही हैं। Swiggy, Zomato, Ola, Uber और Rapido जैसे platforms ने लाखों लोगों को flexible earning opportunities दी हैं।
सरकारी और industry estimates के मुताबिक आने वाले वर्षों में gig workforce और platform economy दोनों में तेज विस्तार देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि सरकार अब इस सेक्टर को formal social protection framework में लाने पर जोर दे रही है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
Labour policy experts का कहना है कि भारत में gig workers लंबे समय से insurance protection, health benefits और income security की मांग कर रहे थे।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि eligibility conditions को लेकर आगे debate हो सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में workers irregular basis पर काम करते हैं। ऐसे में future में इन नियमों में बदलाव या flexibility की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
FAQ
Gig workers के लिए नया नियम क्या है?
अब social security benefits पाने के लिए minimum working days की शर्त पूरी करनी होगी।
एक platform पर काम करने वालों के लिए कितने दिन जरूरी हैं?
कम से कम 90 दिन काम करना जरूरी होगा।
कई platforms पर काम करने वालों के लिए क्या नियम है?
ऐसे workers को 120 दिन काम करना होगा।
कौन-कौन से benefits मिलेंगे?
Health insurance, life insurance और accident insurance जैसे benefits मिल सकते हैं।
60 साल के बाद क्या होगा?
60 वर्ष की उम्र के बाद social security benefits बंद हो जाएंगे।
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