भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में आ गया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट रुपये पर लगातार दबाव बना रही है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक खराब बने रहे, तो आने वाले महीनों में रुपया और कमजोर हो सकता है। कुछ analysts ने तो 2026 के अंत तक डॉलर के मुकाबले रुपया 100 तक पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
क्यों टूटा रुपया?
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा तेजी से कमजोर हुई और डॉलर के मुकाबले 95.17 तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह crude oil prices में तेजी, पश्चिम एशिया संकट, foreign capital outflow और domestic equity markets में बिकवाली है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है और आयात महंगा होता है, तो रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।
पीएम मोदी की अपील का भी असर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैर-जरूरी विदेश यात्रा टालने और एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में तेजी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम मोदी के बयान ने बाजार को यह संकेत दिया कि सरकार वैश्विक आर्थिक जोखिमों को गंभीरता से देख रही है। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
कच्चे तेल ने क्यों बढ़ाई टेंशन?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण crude oil prices में तेज उछाल देखने को मिला है।
ब्रेंट क्रूड का भाव वायदा कारोबार में 4.17 फीसदी बढ़कर 105.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी crude oil आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से import bill बढ़ता है, डॉलर की demand बढ़ती है और current account deficit पर दबाव आता है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है।
क्या सच में 100/$ तक जा सकता है रुपया?
LKP Securities के VP Research Analyst जतिन त्रिवेदी के मुताबिक अगर मौजूदा geopolitical tensions लंबे समय तक बने रहते हैं, तो 2026 के अंत तक रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह base case नहीं बल्कि worst-case scenario हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि oil prices, global interest rates और foreign fund flows आने वाले महीनों में रुपये की दिशा तय करेंगे।
अमेरिका-ईरान तनाव से क्यों बढ़ा दबाव?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से आए शांति प्रस्ताव के जवाब को खारिज कर दिया है।
इसके बाद बाजार में आशंका बढ़ गई कि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि geopolitical uncertainty, oil supply disruption fears और risk-off sentiment की वजह से global investors safe-haven assets की ओर बढ़ रहे हैं। इसका असर emerging markets currencies पर दिखाई दे रहा है।
शेयर बाजार में भी भारी गिरावट
रुपये की कमजोरी के साथ घरेलू शेयर बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
सुबह 10:35 बजे तक Sensex 1,071 अंक से ज्यादा टूटकर 76,256 के करीब पहुंच गया, जबकि Nifty 305 अंक गिरकर 23,871 पर आ गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की बिकवाली और crude oil prices में तेजी ने market sentiment को कमजोर किया।
विदेशी मुद्रा भंडार पर कितना असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल महंगा बना रहता है, gold imports बढ़ते हैं और डॉलर मजबूत रहता है, तो भारत के forex reserves पर दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि सरकार energy consumption और non-essential imports को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर रुपया लगातार कमजोर होता है, तो इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक imported products महंगे हो सकते हैं, fuel prices बढ़ सकते हैं, विदेश यात्रा महंगी हो सकती है और inflation पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि exporters और IT sector जैसी industries को कमजोर रुपये से कुछ फायदा भी मिल सकता है।
RBI क्या कर सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि Reserve Bank of India जरूरत पड़ने पर forex market intervention, liquidity management और policy adjustments के जरिए volatility को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है।
हालांकि अगर global crude prices लंबे समय तक ऊंचे रहते हैं, तो RBI के सामने चुनौती और बढ़ सकती है।
FAQ
रुपया कितने स्तर तक गिरा?
डॉलर के मुकाबले रुपया 95.17 तक पहुंच गया।
रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया तनाव।
क्या रुपया 100/$ तक जा सकता है?
कुछ analysts ने worst-case scenario में इसकी संभावना जताई है।
तेल महंगा होने से रुपये पर असर क्यों पड़ता है?
भारत ज्यादा crude oil आयात करता है, इसलिए डॉलर की demand बढ़ जाती है।
शेयर बाजार क्यों गिरा?
Geopolitical tensions और foreign investors की बिकवाली की वजह से।
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