भारत के घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को भारी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक कमजोरी ने बाजार की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी50 भी 23,450 के नीचे फिसल गया। वहीं भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
सुबह करीब 9:22 बजे बीएसई सेंसेक्स 532 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 74,668 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 166 अंक टूटकर 23,451 के करीब पहुंच गया। बाजार खुलते ही बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा दबाव वैश्विक बाजारों की कमजोरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से आया है। ईरान और पश्चिम एशिया से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है।
रुपया ऑल टाइम लो पर क्यों पहुंचा?
भारतीय रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में 41 पैसे टूटकर 96.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। रुपये में गिरावट की बड़ी वजहें हैं: डॉलर की वैश्विक मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल के आयात बिल में बढ़ोतरी, वैश्विक अनिश्चितता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो रुपया 97-98 प्रति डॉलर तक भी जा सकता है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
बाजार में लगभग हर सेक्टर लाल निशान में कारोबार करता दिखा, लेकिन कुछ सेक्टरों पर दबाव ज्यादा रहा।
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और एसबीआई जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में गिरावट देखी गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा।
आईटी शेयर भी दबाव में
अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता और डॉलर की चाल के कारण आईटी कंपनियों में भी कमजोरी रही। इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
ऑटो और मेटल सेक्टर कमजोर
कच्चे माल की बढ़ती लागत और वैश्विक मांग को लेकर चिंता की वजह से ऑटो और मेटल कंपनियों के शेयरों में भी दबाव बना रहा।
एशियाई बाजारों का क्या रहा हाल?
भारत ही नहीं, एशिया के कई बड़े बाजारों में भी कमजोरी देखी गई। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट बना हुआ है।
क्या आम निवेशकों को घबराना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार: वैश्विक संकेतों पर नजर रखें, एकमुश्त निवेश से बचें, SIP जारी रखें, हाई रिस्क ट्रेडिंग में सावधानी रखें, डिफेंसिव सेक्टरों पर फोकस करें.
क्या महंगाई बढ़ सकती है?
रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है और इसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ता है।
यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो: पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, हवाई यात्रा खर्च बढ़ सकता है, FMCG कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है.
आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
बाजार की दिशा अब काफी हद तक इन फैक्टर्स पर निर्भर करेगी: कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख, विदेशी निवेशकों का फ्लो, रुपये की चाल, पश्चिम एशिया की स्थिति.
यदि वैश्विक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में राहत मिलती है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन फिलहाल निवेशकों में डर और सतर्कता दोनों दिखाई दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
आज की गिरावट यह दिखाती है कि वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ रहा है। कमजोर रुपया, महंगा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली आने वाले दिनों में बाजार को और अस्थिर बना सकती है। हालांकि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और लंबी अवधि की ग्रोथ कहानी अब भी भारत के पक्ष में मानी जा रही है।
Source References: NSE, BSE, RBI market data, global commodity market trends, forex market movement reports.
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