भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनमी में शामिल है। केंद्र सरकार से लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां तक मान रही हैं कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में और मजबूत होगा। लेकिन इस तेजी से बढ़ती इकॉनमी के पीछे एक बड़ा सच यह भी है कि देश के अलग-अलग राज्यों के बीच आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है। कुछ राज्य देश की जीडीपी को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि कई राज्य अब भी विकास की रफ्तार पकड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इजरायल संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इसके बावजूद भारत को 2030 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ता देश माना जा रहा है।
इसी बीच राज्यों की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े देश के भीतर मौजूद आर्थिक अंतर को साफ दिखाते हैं। देश की कुल जीडीपी में सिर्फ पांच राज्यों की हिस्सेदारी करीब 48 फीसदी है, जबकि नीचे के 10 राज्यों का योगदान तीन फीसदी से भी कम बताया जा रहा है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी कई बड़े अंतर सामने आए हैं। बिहार अब भी सबसे नीचे है, जबकि गोवा और सिक्किम जैसे छोटे राज्यों की प्रति व्यक्ति आय उससे करीब आठ गुना ज्यादा है।
महाराष्ट्र सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था
वेल्थ मैनेजमेंट फर्म Client Associates के अनुसार महाराष्ट्र देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में महाराष्ट्र की स्टेट जीडीपी करीब 45.3 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। मुंबई देश की वित्तीय राजधानी है और बैंकिंग, फाइनेंस, आईटी, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में महाराष्ट्र की मजबूत पकड़ उसकी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है।
तमिलनाडु 31.2 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी के साथ दूसरे स्थान पर है। राज्य में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। इसके अलावा चेन्नई को दक्षिण भारत का बड़ा औद्योगिक और आईटी हब माना जाता है।
यूपी की इकॉनमी तेजी से बढ़ रही
उत्तर प्रदेश 29.8 लाख करोड़ रुपये की स्टेट जीडीपी के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि यूपी अब केवल आबादी के लिहाज से ही नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य में एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट, डेटा सेंटर और औद्योगिक निवेश पर काफी जोर दिया गया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा धार्मिक पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने भी राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दी है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी की बड़ी आबादी के कारण प्रति व्यक्ति आय के स्तर पर राज्य को अभी लंबा सफर तय करना है। केवल कुल जीडीपी बढ़ने से आम लोगों की आय और जीवन स्तर स्वतः बेहतर नहीं हो जाते। इसके लिए रोजगार, शिक्षा और औद्योगिक विकास में संतुलित सुधार जरूरी है।
टॉप 5 राज्यों का दबदबा
देश की कुल जीडीपी में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 48 फीसदी बताई जा रही है। इसका मतलब है कि देश की आधी अर्थव्यवस्था लगभग इन्हीं पांच राज्यों पर आधारित है।
देश के टॉप 5 राज्य (स्टेट जीडीपी के आधार पर)
| राज्य | अनुमानित स्टेट जीडीपी |
|---|---|
| महाराष्ट्र | 45.3 लाख करोड़ रुपये |
| तमिलनाडु | 31.2 लाख करोड़ रुपये |
| उत्तर प्रदेश | 29.8 लाख करोड़ रुपये |
| कर्नाटक | 28.8 लाख करोड़ रुपये |
| गुजरात | 27.9 लाख करोड़ रुपये |
कर्नाटक की अर्थव्यवस्था में आईटी सेक्टर की बड़ी भूमिका है। बेंगलुरु को भारत की टेक राजधानी कहा जाता है। वहीं गुजरात मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के मामले में देश के सबसे मजबूत राज्यों में शामिल है।
बिहार अब भी सबसे पीछे
प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश में सबसे नीचे बना हुआ है। राज्य की अर्थव्यवस्था अब भी बड़े पैमाने पर कृषि पर निर्भर है। आंकड़ों के अनुसार बिहार की जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है, जो देश में सबसे ज्यादा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि पर अत्यधिक निर्भरता विकास की गति को सीमित कर सकती है, क्योंकि कृषि क्षेत्र में आमतौर पर आय और उत्पादकता दोनों सीमित रहती हैं। बिहार में बड़े उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग हब और हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर की कमी लंबे समय से आर्थिक चुनौती बनी हुई है।
इसके विपरीत गोवा और सिक्किम जैसे छोटे राज्यों की प्रति व्यक्ति आय बिहार से करीब आठ गुना ज्यादा बताई गई है। इसका कारण वहां पर्यटन, सर्विस सेक्टर और अपेक्षाकृत कम आबादी को माना जाता है।
किस राज्य में कौन सा सेक्टर मजबूत
राज्यों की अर्थव्यवस्था को देखने पर यह साफ होता है कि अलग-अलग राज्यों की ताकत अलग-अलग सेक्टर में है।
- गुजरात की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 39.7 फीसदी है।
- केरल में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा केवल 8.6 फीसदी है।
- गोवा की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान सबसे ज्यादा 74.6 फीसदी है।
- बिहार में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे कम 47.8 फीसदी है।
इससे पता चलता है कि जिन राज्यों में उद्योग और सेवाएं मजबूत हैं, वहां आय और रोजगार के अवसर भी अपेक्षाकृत ज्यादा हैं।
बेरोजगारी में भी बड़ा अंतर
देश में बेरोजगारी के आंकड़े भी राज्यों की आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में बेरोजगारी दर सबसे कम 2.7 फीसदी है। मजबूत औद्योगिक आधार और निवेश का माहौल इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
वहीं अंडमान निकोबार में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा 19.2 फीसदी बताई गई है। रोजगार के सीमित अवसर और आर्थिक गतिविधियों की कमी इसकी प्रमुख वजह मानी जाती है।
भारत के लिए क्या है सबसे बड़ी चुनौती
भारत की कुल जीडीपी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आर्थिक विकास का लाभ सभी राज्यों और सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे। अगर कुछ राज्य ही विकास का केंद्र बने रहेंगे और बाकी राज्य पीछे छूटते रहेंगे, तो क्षेत्रीय असमानता और बढ़ सकती है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत को अगले दशक में 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए सिर्फ बड़े शहरों या कुछ चुनिंदा राज्यों पर निर्भर नहीं रहना होगा। पूर्वी भारत और पिछड़े राज्यों में उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर बड़े निवेश की जरूरत होगी।
आने वाले वर्षों में यूपी और बिहार पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े आबादी वाले राज्यों का प्रदर्शन आने वाले वर्षों में भारत की पूरी अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकता है। यूपी में औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है, जबकि बिहार को अब भी बड़े निवेश और रोजगार सृजन की जरूरत है।
अगर इन राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और निजी निवेश को बढ़ावा मिलता है, तो भारत की विकास दर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखा जा सकता है।
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