नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ। दिन की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई थी और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक टूट गया था, लेकिन निचले स्तरों पर हुई जोरदार खरीदारी ने बाजार को संभाल लिया। अंततः बीएसई सेंसेक्स 13.84 अंक की मामूली बढ़त के साथ 74,360.01 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 10.95 अंक चढ़कर 23,416.55 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार में आई इस रिकवरी के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला, निचले स्तरों पर निवेशकों की वैल्यू बाइंग और दूसरा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) से जुड़ी संभावित कर राहत की खबरें। हालांकि निवेशकों की असली नजर अब शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले पर टिकी हुई है।
सुबह की गिरावट से शाम की रिकवरी तक
गुरुवार के कारोबार की शुरुआत कमजोर वैश्विक संकेतों और सतर्क निवेशक धारणा के बीच हुई। शुरुआती सत्र में बीएसई सेंसेक्स 538.87 अंक टूटकर 73,807.30 के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं निफ्टी भी 158 अंकों से ज्यादा गिरकर 23,247.30 तक फिसल गया।
हालांकि जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों ने चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी शुरू की। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और कुछ ब्लूचिप शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। दोपहर बाद बाजार में रिकवरी का दौर तेज हुआ और दोनों प्रमुख सूचकांक नुकसान की भरपाई करते हुए हरे निशान में पहुंच गए।
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में यह रिकवरी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है और वे गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
FPI टैक्स राहत की खबरों ने बढ़ाया भरोसा
गुरुवार को बाजार को सबसे बड़ा समर्थन उस रिपोर्ट से मिला जिसमें दावा किया गया कि केंद्र सरकार सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर लगने वाले कुछ कर प्रावधानों को हटाने पर विचार कर रही है।
यदि ऐसा कदम उठाया जाता है तो भारतीय डेट मार्केट में विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ सकता है। इससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी फिर से भारतीय बाजारों की ओर लौट सकती है। पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई थी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी किसी भी कर राहत से भारत की निवेश छवि को मजबूती मिलेगी और विदेशी पूंजी प्रवाह को नया समर्थन मिल सकता है।
RBI के रेपो रेट फैसले पर क्यों टिकी है बाजार की नजर?
इस समय बाजार का सबसे बड़ा ट्रिगर RBI की मौद्रिक नीति बैठक है। तीन दिवसीय बैठक के बाद शुक्रवार को रिजर्व बैंक गवर्नर द्वारा नीतिगत घोषणा की जाएगी।
निवेशकों की दिलचस्पी केवल रेपो रेट में संभावित बदलाव तक सीमित नहीं है। बाजार इस बात पर भी नजर रखे हुए है कि केंद्रीय बैंक महंगाई, आर्थिक विकास, रुपये की स्थिति और वैश्विक जोखिमों को लेकर क्या दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
यदि RBI भविष्य में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख दिखाता है तो बैंकिंग, ऑटो, रियल एस्टेट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। वहीं यदि महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाया जाता है तो बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
वैश्विक तनाव भी बना हुआ है चिंता का विषय
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के अनुसार मध्य पूर्व की स्थिति अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। इजरायल और लेबनान के बीच संघर्षविराम समझौते के नवीनीकरण से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रहा है।
ऊर्जा कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।
रुपये पर भी रहेगी विशेष नजर
LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के अनुसार भारतीय रुपया RBI की नीति घोषणा से पहले सतर्क कारोबार कर रहा है। रुपया लगभग 95.77 प्रति डॉलर के स्तर पर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी निवेश निकासी और ऊंची कमोडिटी कीमतें भारत के आयात बिल पर दबाव बना रही हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो रुपये पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
उन्होंने अनुमान जताया कि निकट अवधि में रुपया 95.25 से 96.25 के दायरे में कारोबार कर सकता है।
किन सेक्टरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?
RBI के फैसले के बाद जिन सेक्टरों में सबसे अधिक हलचल देखने को मिल सकती है उनमें शामिल हैं:
- बैंकिंग सेक्टर
- एनबीएफसी कंपनियां
- रियल एस्टेट सेक्टर
- ऑटोमोबाइल कंपनियां
- इंफ्रास्ट्रक्चर शेयर
- कैपिटल गुड्स सेक्टर
ब्याज दरों से सीधे जुड़े होने के कारण इन सेक्टरों पर बाजार की विशेष नजर रहेगी।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार एक निर्णायक ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। RBI की नीति घोषणा, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम अगले कुछ सत्रों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
गुरुवार की रिकवरी ने यह जरूर दिखाया है कि निवेशकों में खरीदारी की इच्छा अभी भी बनी हुई है। लेकिन किसी बड़े ट्रेंड की पुष्टि के लिए बाजार को RBI के फैसले और उसके बाद आने वाले संकेतों का इंतजार रहेगा।
निष्कर्ष
गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। शुरुआती भारी गिरावट के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी ने शानदार वापसी करते हुए लगभग सपाट स्तर पर कारोबार समाप्त किया। FPI टैक्स राहत की खबरों और निचले स्तरों पर खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन अब निवेशकों की निगाहें पूरी तरह RBI के रेपो रेट फैसले पर टिकी हुई हैं। शुक्रवार का दिन बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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