Service Charge: वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद जब बिल आता है, तो उसमें अक्सर 5% से 10% तक सर्विस चार्ज (Service Charge) जुड़ा हुआ दिखाई देता है। कई लोग इसे GST या सरकारी टैक्स समझकर बिना सवाल किए भुगतान कर देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि सर्विस चार्ज कोई सरकारी टैक्स नहीं है और इसे देना ग्राहक के लिए अनिवार्य नहीं है।
हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी साफ कहा है कि रेस्टोरेंट ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में हर ग्राहक के लिए यह जानना जरूरी है कि सर्विस चार्ज क्या है, कब देना होता है और अगर रेस्टोरेंट इसे हटाने से मना कर दे तो क्या करना चाहिए।
क्या होता है सर्विस चार्ज?
सर्विस चार्ज वह अतिरिक्त राशि है, जिसे कई रेस्टोरेंट अपने कर्मचारियों की सेवा के बदले ग्राहकों के बिल में जोड़ते हैं। आमतौर पर यह कुल बिल का 5% से 10% तक होता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सर्विस चार्ज और GST दोनों अलग-अलग हैं।
- GST सरकार के खाते में जमा होता है।
- सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट के पास रहता है और वह अपनी नीति के अनुसार कर्मचारियों में बांट सकता है।
यानी सर्विस चार्ज किसी भी तरह का सरकारी टैक्स नहीं है।
क्या रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज देना अनिवार्य बना सकते हैं?
नहीं।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने वर्ष 2022 में जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट कहा था कि—
- कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहक के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।
- इसे अनिवार्य (Mandatory) नहीं बताया जा सकता।
- ग्राहक चाहे तो सर्विस चार्ज देने से इनकार कर सकता है।
- सर्विस चार्ज न देने पर ग्राहक को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
यानी सर्विस चार्ज देना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए।
फिर भी कई रेस्टोरेंट क्यों वसूल रहे हैं सर्विस चार्ज?
CCPA की गाइडलाइंस जारी होने के बाद कई होटल और रेस्टोरेंट संगठनों ने इन्हें अदालत में चुनौती दी।
उनका तर्क है कि—
- सर्विस चार्ज उनकी प्राइसिंग पॉलिसी का हिस्सा है।
- इसकी जानकारी पहले से मेन्यू कार्ड या नोटिस बोर्ड पर दी जाती है।
- यदि ग्राहक यह देखकर भोजन करता है तो उसने शर्तें स्वीकार कर ली हैं।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि केवल मेन्यू कार्ड पर सूचना लिख देने से ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क थोपने का अधिकार नहीं मिल जाता। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है।
सरकार ने क्यों दिखाई सख्ती?
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूलना नियमों के खिलाफ है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकार का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और उनकी प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो सकती है।
41 रेस्टोरेंट्स के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई
सरकार ने हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के माध्यम से देशभर के 41 रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
इनमें Chaayos और Barbeque Nation जैसी लोकप्रिय रेस्टोरेंट चेन भी शामिल हैं। आरोप है कि इन प्रतिष्ठानों ने ग्राहकों के बिल में बिना स्पष्ट सहमति के डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सर्विस चार्ज को अनिवार्य बनाना ‘अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice)’ माना जा सकता है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब ग्राहक पहले ही मेन्यू में लिखी कीमत और लागू टैक्स का भुगतान कर रहा है, तो क्या उससे अतिरिक्त राशि लेना उचित है।
हालांकि इस मामले में अभी अंतिम फैसला आना बाकी है।
क्या मेन्यू पर ‘Service Charge Applicable’ लिखने से भुगतान जरूरी हो जाता है?
नहीं।
कई रेस्टोरेंट मेन्यू कार्ड या प्रवेश द्वार पर “Service Charge Applicable” लिख देते हैं।
लेकिन उपभोक्ता संरक्षण अधिकारियों का मानना है कि केवल सूचना देने से ग्राहक का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। यदि ग्राहक सर्विस चार्ज नहीं देना चाहता, तो उसे मजबूर नहीं किया जा सकता।
क्या सर्विस चार्ज न देने पर रेस्टोरेंट रोक सकता है?
बिल्कुल नहीं।
CCPA के दिशानिर्देशों के अनुसार—
- ग्राहक को केवल सर्विस चार्ज न देने की वजह से सेवा देने से मना नहीं किया जा सकता।
- ग्राहक को रेस्टोरेंट छोड़ने से नहीं रोका जा सकता।
- भुगतान के लिए दबाव बनाना, डराना या अपमानित करना भी नियमों के खिलाफ माना जाता है।
अगर रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज हटाने से मना कर दे तो क्या करें?
यदि आपको बिल में गलत तरीके से सर्विस चार्ज लगाया गया है, तो ये कदम उठाएं—
- सबसे पहले विनम्रता से सर्विस चार्ज हटाने का अनुरोध करें।
- संशोधित बिल जारी करने की मांग करें।
- यदि रेस्टोरेंट मना कर दे तो बिल की कॉपी सुरक्षित रखें।
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) या संबंधित उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराएं।
- जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत पोर्टल का भी उपयोग किया जा सकता है।
सर्विस चार्ज और टिप में क्या अंतर है?
दोनों को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, जबकि इनमें बड़ा अंतर है।
| सर्विस चार्ज | टिप (Tip) |
|---|---|
| रेस्टोरेंट बिल में जोड़ता है | ग्राहक अपनी इच्छा से देता है |
| पहले से तय प्रतिशत हो सकता है | कोई तय राशि नहीं होती |
| विवाद का विषय बन सकता है | पूरी तरह स्वैच्छिक होती है |
| हटाने की मांग की जा सकती है | देना या न देना पूरी तरह ग्राहक पर निर्भर |
ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
- बिल मिलने के बाद उसे ध्यान से जांचें।
- सर्विस चार्ज और GST को अलग-अलग समझें।
- यदि सर्विस चार्ज बिना सहमति के जोड़ा गया हो तो उसे हटाने की मांग करें।
- किसी भी तरह के दबाव में आकर भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।
- अच्छी सेवा मिलने पर आप चाहें तो अपनी इच्छा से टिप दे सकते हैं।
निष्कर्ष
रेस्टोरेंट में लगाया जाने वाला सर्विस चार्ज कोई सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि यह रेस्टोरेंट द्वारा वसूली जाने वाली अतिरिक्त राशि है। मौजूदा उपभोक्ता दिशानिर्देशों के अनुसार इसे अनिवार्य रूप से वसूलना उचित नहीं माना गया है और ग्राहक चाहें तो इसे देने से इनकार कर सकते हैं। यदि कोई रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज हटाने से मना करता है या ग्राहक पर दबाव बनाता है, तो उसके खिलाफ उपभोक्ता मंच पर शिकायत की जा सकती है। इसलिए अगली बार रेस्टोरेंट का बिल चुकाने से पहले उसे ध्यान से जरूर जांचें।


