मुंबई: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने स्पष्ट किया है कि SBI Funds Management की सफल शेयर बाजार लिस्टिंग के बाद बैंक की अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कंपनी के आईपीओ का मुख्य उद्देश्य रिटेल निवेशकों को इसकी दीर्घकालिक विकास यात्रा में भागीदार बनाना था, न कि प्रमोटर हिस्सेदारी घटाना।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग के बाद आयोजित समारोह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शेट्टी ने कहा कि “लिस्टिंग के बाद एसबीआई फंड्स में हिस्सेदारी घटाने की हमारी कोई योजना नहीं है।”
रिटेल निवेशकों को अवसर देने के लिए लाया गया IPO
सीएस शेट्टी ने बताया कि एसबीआई की रणनीति अपनी मजबूत सहायक कंपनियों में दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की है। इसी रणनीति के तहत एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ लाया गया, ताकि आम निवेशकों को भी कंपनी की ग्रोथ का हिस्सा बनने का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि बैंक का उद्देश्य सिर्फ पूंजी जुटाना नहीं था, बल्कि एक मजबूत और भरोसेमंद एसेट मैनेजमेंट कंपनी में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना भी था।
SBI ने किया है करीब ₹6,000 करोड़ का निवेश
शेट्टी के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक ने अब तक एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में लगभग ₹6,000 करोड़ का निवेश किया है। बैंक का निरंतर सहयोग कंपनी की तेज़ वृद्धि और सफल आईपीओ में अहम भूमिका निभाता रहा है।
उन्होंने कहा कि बैंक भविष्य में भी कंपनी के विकास में पूरा सहयोग देता रहेगा।
कॉरपोरेट गवर्नेंस पर खास जोर
एसबीआई चेयरमैन ने बताया कि सूचीबद्ध होने से पहले भी कंपनी ने मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों को अपनाया था। उन्होंने कहा कि एसबीआई और फ्रांस की एसेट मैनेजमेंट कंपनी Amundi के बीच वर्षों पुरानी साझेदारी ने कंपनी के गवर्नेंस ढांचे को और मजबूत बनाया है।
उनके अनुसार, अच्छी कॉरपोरेट गवर्नेंस ही किसी भी वित्तीय संस्था की दीर्घकालिक सफलता की आधारशिला होती है।
बेहतर फंड प्रदर्शन रहेगा प्राथमिकता
लगातार अच्छे रिटर्न को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएस शेट्टी ने कहा कि किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का मूल्यांकन केवल एक-दो म्यूचुअल फंड स्कीम के प्रदर्शन से नहीं किया जा सकता।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत और लगातार बेहतर फंड प्रदर्शन कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
अब B30 शहरों पर रहेगा फोकस
भविष्य की रणनीति बताते हुए शेट्टी ने कहा कि कंपनी अब B30 शहरों पर विशेष ध्यान देगी। ये वे शहर हैं जो म्यूचुअल फंड उद्योग के शीर्ष 30 शहरों से बाहर आते हैं।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निवेशकों की संख्या बढ़ाने, वित्तीय जागरूकता फैलाने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए कंपनी अपने नेटवर्क और वितरण व्यवस्था का विस्तार करेगी।
शानदार प्रीमियम पर हुई शेयर बाजार में एंट्री
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹613.30 प्रति शेयर पर लिस्टिंग हुई। यह कंपनी के ₹574 प्रति शेयर के आईपीओ मूल्य से करीब 6.85% प्रीमियम पर रही, जिससे निवेशकों को पहले ही दिन अच्छा लिस्टिंग गेन मिला।
IPO को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
कंपनी का ₹9,812.91 करोड़ का आईपीओ 14 जुलाई से 16 जुलाई तक निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू को सभी श्रेणियों में शानदार प्रतिक्रिया मिली और यह 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
एसबीआई द्वारा हिस्सेदारी नहीं घटाने का फैसला बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि प्रमोटर कंपनी को उसके दीर्घकालिक विकास पर पूरा भरोसा है। साथ ही B30 शहरों में विस्तार की रणनीति भविष्य में कंपनी की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) और निवेशक आधार बढ़ाने में मदद कर सकती है।


