नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में भाषा-आधारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग और गोवा सरकार ने संयुक्त रूप से पणजी में एक राज्य स्तरीय सहभागिता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से डिजिटल सेवाओं को अधिक समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाना था।
कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स और भाषा विशेषज्ञों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर चर्चा की कि किस प्रकार बहुभाषी एआई तकनीकों के जरिए सरकारी सेवाओं को आम नागरिकों तक उनकी मातृभाषा में पहुंचाया जा सकता है।
कोंकणी भाषा पर रहा विशेष फोकस
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से कोंकणी भाषा के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि सरकारी पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे, तो नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं और सेवाओं का उपयोग करना पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि भाषा आधारित एआई तकनीकें डिजिटल समावेशन को बढ़ाने के साथ-साथ उन लोगों को भी डिजिटल सेवाओं से जोड़ सकती हैं, जो अंग्रेजी या हिंदी में सहज नहीं हैं।
बहुभाषी AI बनाएगा वॉयस-फर्स्ट डिजिटल इकोसिस्टम
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि बहुभाषी एआई भविष्य में वॉयस-फर्स्ट डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका अर्थ है कि नागरिक केवल अपनी भाषा में बोलकर सरकारी सेवाओं, सूचनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे।
इस पहल से भाषा की बाधा कम होगी और डिजिटल गवर्नेंस अधिक प्रभावी तथा समावेशी बन सकेगा।
भाषिणी के बढ़ते उपयोग पर बोले CEO अमिताभ नाग
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कहा कि भाषिणी प्लेटफॉर्म का उपयोग शासन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और नागरिक सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और भाषा विशेषज्ञों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे कोंकणी सहित अन्य भारतीय भाषाओं का डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा और देश में समावेशी डिजिटल परिवर्तन को गति मिलेगी।
भाषिणी के AI टूल्स का हुआ लाइव प्रदर्शन
कार्यशाला के दौरान भाषिणी ऐप मित्र, भाषिणी मित्र और भाषिणी प्रवक्ता जैसे बहुभाषी एआई समाधानों का प्रदर्शन किया गया।
इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से निम्नलिखित तकनीकों का प्रदर्शन किया गया—
- अनुवाद (Translation)
- स्पीच रिकग्निशन (Speech Recognition)
- टेक्स्ट-टू-स्पीच (Text-to-Speech)
- ट्रांसलिटरेशन
- बहुभाषी API इंटीग्रेशन
विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों को सरकारी वेबसाइटों, नागरिक सेवा पोर्टलों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म में आसानी से जोड़ा जा सकता है।
पर्यटन और नागरिक सेवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
कार्यशाला में प्रस्तुत डेमो के दौरान बताया गया कि भाषिणी प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिकों और पर्यटकों को अपनी पसंदीदा भाषा में सरकारी जानकारी, पर्यटन सेवाएं और सार्वजनिक सूचनाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
इससे न केवल सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी डिजिटल अनुभव बेहतर होगा।
कोंकणी भाषा के लिए डेटा और AI मॉडल होंगे मजबूत
कार्यक्रम के अंतिम चरण में कोंकणी भाषा के डिजिटल विकास पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें सरकार, शिक्षण संस्थानों, भाषा विशेषज्ञों और तकनीकी साझेदारों ने भाषा संबंधी डेटा सेट को विस्तारित करने, एआई मॉडल को अधिक सटीक बनाने तथा गोवा की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उपयोग क्षेत्रों की पहचान करने पर विचार-विमर्श किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों से राज्य में बहुभाषी एआई तकनीकों को अपनाने की गति तेज होगी और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण के साथ-साथ डिजिटल इंडिया मिशन को भी नई मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
भारत तेजी से बहुभाषी डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया भाषिणी जैसी पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि भाषा किसी भी नागरिक के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच में बाधा न बने। केंद्र सरकार का यह प्रयास डिजिटल समावेशन को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


