पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारतीय मुद्रा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती ट्रेड में रुपया 166 पैसे टूटकर 95.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बन गया है। इसी वजह से crude oil prices में तेज उछाल आया और इसका सीधा दबाव भारतीय रुपये पर दिखाई दिया।
क्यों टूटा रुपया?
रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता geopolitical tension माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के सामने शांति प्रस्ताव रखा था, लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया से अमेरिका संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद global investors के बीच uncertainty बढ़ गई और safe-haven assets की ओर निवेश बढ़ने लगा। इसी वजह से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ जबकि emerging market currencies पर दबाव बढ़ गया।
शुरुआती कारोबार में क्या रहा हाल?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.97 प्रति डॉलर पर खुला। इसके बाद इसमें मामूली रिकवरी देखने को मिली और यह 94.90 तक पहुंचा। हालांकि, बाजार में दबाव बढ़ने के बाद रुपया फिर फिसल गया और 95.17 प्रति डॉलर तक टूट गया।
यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 166 पैसे की बड़ी गिरावट मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को रुपया 71 पैसे मजबूत होकर 93.51 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को global developments के चलते sentiment पूरी तरह बदल गया।
विदेशी पूंजी निकासी ने बढ़ाया दबाव
Forex traders का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को करीब ₹4,110 करोड़ के शेयर बेचे थे।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती global uncertainty, crude oil prices में तेजी और risk aversion की वजह से विदेशी निवेशक emerging markets से पैसा निकाल रहे हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये दोनों पर दिखाई दे रहा है।
डॉलर इंडेक्स में भी आई मजबूती
इस बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत होता दिखाई दिया। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला Dollar Index 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ 98.20 के स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि geopolitical tensions के दौरान आमतौर पर डॉलर को safe-haven currency माना जाता है। यही वजह है कि संकट के समय निवेशक डॉलर की ओर ज्यादा रुख करते हैं और डॉलर मजबूत हो जाता है।
कच्चे तेल ने बढ़ाई भारत की मुश्किल
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश crude oil आयात करता है। ऐसे में crude oil prices बढ़ने का सीधा असर रुपये, inflation और import bill पर पड़ता है।
आज Brent Crude करीब 105.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिसमें 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत के current account deficit पर दबाव बढ़ सकता है।
शेयर बाजार में भी मचा हाहाकार
रुपये की कमजोरी के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 810 अंक से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी 225 अंक से अधिक फिसल गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक rising crude oil prices, weak rupee और FII selling ने बाजार sentiment को कमजोर कर दिया है। यही वजह है कि निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल दिखाई दे रहा है।
क्या आगे और कमजोर हो सकता है रुपया?
Currency market experts का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहा, crude oil prices 110 डॉलर के करीब पहुंचे और foreign investors बिकवाली जारी रखते हैं, तो रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जरूरत पड़ने पर forex market में intervention कर सकता है ताकि बाजार में अत्यधिक volatility को नियंत्रित किया जा सके।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
रुपये में कमजोरी का असर आम लोगों पर भी दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक imported सामान महंगे हो सकते हैं, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, विदेश यात्रा महंगी हो सकती है और inflation बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
हालांकि सरकार फिलहाल fuel prices को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है ताकि आम उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न बढ़े।
FAQ
आज रुपया कितने स्तर तक गिरा?
रुपया शुरुआती कारोबार में 95.17 प्रति डॉलर तक गिर गया।
रुपये में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
पश्चिम एशिया तनाव और crude oil prices में तेजी।
डॉलर इंडेक्स कितना पहुंचा?
Dollar Index 98.20 के स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी निवेशकों ने कितनी बिकवाली की?
FIIs ने करीब ₹4,110 करोड़ के शेयर बेचे।
क्या आगे रुपया और कमजोर हो सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक global uncertainty बनी रहने पर दबाव जारी रह सकता है।
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