पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीद टूटने के बाद सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी50 भी 250 अंक तक फिसल गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि बाजार खुलते ही निवेशकों ने बड़े स्तर पर बिकवाली शुरू कर दी।
शुरुआती कारोबार में कितना टूटा बाजार?
सुबह करीब 9:25 बजे:
- बीएसई सेंसेक्स 934 अंक टूटकर 76,394 के स्तर पर पहुंच गया
- जबकि निफ्टी50 करीब 235 अंक गिरकर 23,941 के आसपास ट्रेड करता दिखा
बाजार में गिरावट लगभग सभी सेक्टर्स में देखने को मिली। खासतौर पर:
- बैंकिंग
- आईटी
- ऑटो
- मेटल
- और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों
के शेयरों पर दबाव दिखाई दिया।
आखिर क्यों टूटा शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने के बाद निवेशकों को डर है कि तेल सप्लाई संकट और गहरा सकता है, crude oil prices और बढ़ सकती हैं और global inflation पर दबाव बढ़ सकता है इसी वजह से वैश्विक बाजारों में risk-off sentiment देखने को मिल रहा है।
कच्चे तेल की कीमत ने बढ़ाई टेंशन
तेल बाजार में तेजी का असर भारतीय बाजार पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है।
आज Brent Crude 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया जबकि WTI Crude भी 100 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में oil prices बढ़ने से import bill बढ़ता है, inflation बढ़ने का खतरा होता है और corporate margins पर दबाव आता है
विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि बाजार में panic selling देखने को मिली।
रुपये में भी आई बड़ी गिरावट
शेयर बाजार की कमजोरी के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ गया।
रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 फीसदी कमजोर होकर 94.88 पर खुला जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.48 पर बंद हुआ था विशेषज्ञों का कहना है कि foreign investors की बिकवाली, बढ़ता crude oil import bill और global uncertainty रुपये को कमजोर कर रहे हैं।
किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर?
बाजार गिरावट के दौरान सबसे ज्यादा दबाव उन सेक्टर्स में देखा गया जो crude oil prices, global trade और import cost से सीधे जुड़े हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- aviation कंपनियां
- paint sector
- chemical कंपनियां
- और OMC stocks
पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर defense, renewable energy और select energy stocks में कुछ मजबूती देखने को मिल सकती है।
क्या आगे और गिर सकता है बाजार?
Market experts का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक बाजार में volatility बनी रह सकती है।
अगर पश्चिम एशिया संकट और बढ़ता है, crude oil 110 डॉलर के पार जाता है या global investors risk assets से दूरी बनाते हैं तो भारतीय बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि long-term investors को panic selling से बचने की सलाह दी जा रही है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे volatile market में जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए, quality stocks पर फोकस रखना चाहिए और staggered investment strategy अपनानी चाहिए
विशेषज्ञों के मुताबिक geopolitical tensions आमतौर पर short-term volatility पैदा करते हैं, लेकिन मजबूत fundamentals वाली कंपनियां लंबी अवधि में recovery दिखाती हैं।
क्या FIIs कर रहे हैं बिकवाली?
विश्लेषकों का कहना है कि foreign institutional investors (FIIs) फिलहाल cautious approach अपना रहे हैं।
तेल कीमतों में तेजी और global uncertainty बढ़ने के कारण FIIs emerging markets से पैसा निकाल सकते हैं जिससे भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है हालांकि domestic institutional investors (DIIs) अब भी बाजार को कुछ सपोर्ट दे रहे हैं।
FAQ
आज सेंसेक्स कितने अंक गिरा?
सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 900 अंक से ज्यादा टूट गया।
निफ्टी कितने स्तर तक गिरा?
निफ्टी50 करीब 23,941 के आसपास ट्रेड करता दिखा।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
पश्चिम एशिया तनाव और crude oil prices में तेजी।
रुपये में कितनी गिरावट आई?
रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 फीसदी कमजोर हुआ।
क्या बाजार में और गिरावट आ सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक geopolitical uncertainty बनी रहने पर volatility जारी रह सकती है।
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