नई दिल्ली: भारतीय मुद्रा (रुपया) ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की है। बुधवार को रुपया 16 पैसे की बढ़त के साथ 95.66 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले चार दिनों से रुपये में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में तेज़ी, विदेशी निवेशकों (FPI/FII) की वापसी, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सक्रिय रणनीति ने मिलकर रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले वैश्विक निवेशकों का रुख भी सतर्क बना हुआ है, जिसका असर डॉलर और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दिखाई दे रहा है।
रुपये का दिनभर का प्रदर्शन
बुधवार को रुपया 95.70 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 95.48 के उच्च स्तर और 95.80 के निचले स्तर के बीच कारोबार करता रहा। अंततः यह 95.66 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 95.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार चार दिनों की मजबूती से यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल भारतीय मुद्रा पर दबाव कम हुआ है।
रुपये की मजबूती के 5 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमतों में राहत
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर होती है और पहले की तुलना में नीचे आती है, तो भारत का आयात बिल कम हो जाता है।
कम आयात बिल का सीधा असर विदेशी मुद्रा की मांग पर पड़ता है, जिससे डॉलर की जरूरत घटती है और रुपया मजबूत होता है।
2. RBI की सक्रिय रणनीति
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले कुछ समय में विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये की खरीद की है।
इस कदम से बाजार में डॉलर की उपलब्धता संतुलित बनी रही और रुपये पर अत्यधिक दबाव नहीं बनने दिया गया। RBI की यह रणनीति रुपये की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हुई।
3. विदेशी मुद्रा और पूंजी प्रवाह में सुधार
सरकार और RBI की नीतियों के कारण भारत में विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति बेहतर बनी हुई है।
जब देश में अधिक विदेशी पूंजी आती है तो डॉलर की उपलब्धता बढ़ जाती है, जिससे रुपये को समर्थन मिलता है और उसकी विनिमय दर मजबूत होती है।
4. डॉलर की बढ़ी सप्लाई
हाल के दिनों में निर्यातकों और कई बैंकों ने बड़ी मात्रा में डॉलर की बिक्री की है।
डॉलर की अधिक सप्लाई होने से उसकी कीमत पर दबाव पड़ा और इसके मुकाबले रुपया मजबूत होता चला गया।
5. शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाना शुरू किया है।
जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर खरीदते हैं तो उन्हें डॉलर बेचकर रुपये खरीदने पड़ते हैं। इससे रुपये की मांग बढ़ती है और उसकी कीमत मजबूत होती है।
डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) बुधवार को 0.04% गिरकर 101.22 पर आ गया।
डॉलर इंडेक्स में नरमी आने का फायदा भारतीय रुपये सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशक सतर्क हैं, जिसके कारण डॉलर पर हल्का दबाव बना हुआ है।
शेयर बाजार की तेज़ी ने भी दिया सहारा
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली।
- बीएसई सेंसेक्स 888 अंक चढ़कर 77,654 पर बंद हुआ।
- एनएसई निफ्टी 264 अंक की बढ़त के साथ 24,250 के स्तर पर बंद हुआ।
मजबूत शेयर बाजार का सकारात्मक असर भी रुपये पर पड़ा।
FIIs ने फिर दिखाई खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में 755.33 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
विदेशी निवेश बढ़ने से डॉलर की बिक्री और रुपये की मांग बढ़ी, जिसने भारतीय मुद्रा को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की।
आगे क्या रहेगा रुपये का रुख?
मिराए एसेट शेयरखान के विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर आगे रुपये की चाल निर्भर करेगी।
उनका अनुमान है कि निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 95.20 से 95.90 के दायरे में कारोबार कर सकता है। यदि विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और डॉलर इंडेक्स कमजोर बना रहता है, तो रुपये में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
लगातार चौथे दिन रुपये की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों की वापसी, शेयर बाजार की तेजी, कच्चे तेल की नरम कीमतें, RBI का हस्तक्षेप और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी जैसे कई कारकों ने मिलकर भारतीय मुद्रा को सहारा दिया है। अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेंगे।


