8 साल के लक्षवीर ने ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर से एक ऑफलाइन AI स्टोरीटेलिंग डिवाइस बनाई है, जो बिना इंटरनेट ओरिजनल कहानियां बनाकर सुनाती है। जानिए यह कैसे काम करती है।
Lakshveer Offline AI Storytelling Device: 8 साल की उम्र में ऐसा इनोवेशन जिसने सबको चौंका दिया
अगर आपको लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक पर काम करना सिर्फ बड़े इंजीनियरों या अनुभवी डेवलपर्स का काम है, तो 8 साल के लक्षवीर की कहानी आपकी सोच बदल सकती है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और कॉमिक्स की दुनिया में खोए रहते हैं, उसी उम्र में लक्षवीर ने एक ऐसी ऑफलाइन AI स्टोरीटेलिंग डिवाइस तैयार कर दी है जो बिना इंटरनेट के नई-नई ओरिजनल कहानियां बना सकती है, उन्हें आवाज में सुनाती है और यूजर के बोले गए आदेशों को भी समझती है।
यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक बच्चे की प्रतिभा का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सीमित संसाधनों और कम लागत वाले हार्डवेयर पर भी AI की ताकत का इस्तेमाल किया जा सकता है।
₹760 के माइक्रोकंट्रोलर से तैयार की AI डिवाइस
PBLClaw has crossed Level 1.
8-yo Lakshveer built an autonomous agent for ESP32 that writes and uploads code, then runs the device – controlled entirely through natural language via Telegram.
You describe what you want.
It builds.
It flashes.
It runs.
Any device. On the fly. https://t.co/Con6olqm8r pic.twitter.com/WQaoi7e11v
— Capt Venkat 🇮🇳 (@CaptVenk) March 1, 2026 लक्षवीर ने इस डिवाइस को लगभग ₹760 कीमत वाले ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर की मदद से तैयार किया है। इस छोटे से बोर्ड को उन्होंने कई अन्य हार्डवेयर कम्पोनेंट्स के साथ जोड़कर एक ऐसा स्मार्ट सिस्टम बनाया जो इंटरनेट के बिना भी पूरी तरह काम करता है।
इस डिवाइस में इस्तेमाल किए गए प्रमुख कम्पोनेंट्स हैं:
- ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर
- INMP441 डिजिटल माइक्रोफोन
- I2S स्पीकर
- MAX98357A ऑडियो एम्प्लीफायर
इन सभी हार्डवेयर की मदद से डिवाइस यूजर की आवाज सुनती है, कहानी तैयार करती है और फिर उसे स्पीकर के जरिए सुनाती है।
बिना इंटरनेट बनाती है ओरिजनल कहानियां
आज ज्यादातर AI टूल्स क्लाउड सर्वर और इंटरनेट पर निर्भर रहते हैं। लेकिन लक्षवीर की इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे इंटरनेट की जरूरत ही नहीं पड़ती।
यूजर सिर्फ बोलकर कोई विषय या निर्देश देता है और डिवाइस उसी आधार पर नई कहानी तैयार कर देती है। इसके बाद टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक की मदद से कहानी को आवाज में सुनाया जाता है।
डिवाइस निम्नलिखित वॉइस कमांड को भी समझ सकती है—
- Play
- Pause
- Resume
- Next Story
यानी बच्चों के लिए यह किसी स्मार्ट स्टोरीबुक से कम नहीं है।
सारा AI प्रोसेसिंग डिवाइस के अंदर ही होती है
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसमें किसी क्लाउड सर्वर का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
आमतौर पर AI असिस्टेंट यूजर का डेटा इंटरनेट के जरिए सर्वर तक भेजते हैं, लेकिन लक्षवीर की डिवाइस में पूरा प्रोसेस लोकल स्तर पर ही होता है।
इसके फायदे हैं—
- इंटरनेट की जरूरत नहीं
- डेटा पूरी तरह सुरक्षित
- कम बिजली की खपत
- दूरदराज के इलाकों में भी उपयोग संभव
- बच्चों की प्राइवेसी बेहतर तरीके से सुरक्षित
ओपन-सोर्स AI मॉडल में किया बदलाव
लक्षवीर ने शुरुआत से कोई नया लैंग्वेज मॉडल नहीं बनाया। उन्होंने ESP32 के लिए तैयार किए गए TinyStories LLM नाम के ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को अपनी जरूरत के अनुसार मॉडिफाई किया।
यह मॉडल मूल रूप से डेवलपर slvDev द्वारा तैयार किया गया था, जिसे छोटे माइक्रोकंट्रोलर पर बिना क्लाउड सपोर्ट के कहानियां जनरेट करने के लिए डिजाइन किया गया था।
लक्षवीर ने इसमें कई बदलाव करके इसे और अधिक इंटरैक्टिव बनाया, जिससे यह आवाज पहचानने, कहानी बनाने और उसे सुनाने जैसे कई काम एक साथ कर सके।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से हो रही चर्चा
लक्षवीर का यह प्रोजेक्ट सोशल मीडिया और टेक कम्युनिटी में तेजी से वायरल हो रहा है। कम कीमत वाले हार्डवेयर पर ऑफलाइन AI चलाने का यह प्रयोग डेवलपर्स और AI रिसर्चर्स के लिए भी काफी दिलचस्प माना जा रहा है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक भविष्य में शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों, बच्चों की लर्निंग और ऑफलाइन AI एप्लिकेशन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
Telegram से भी कंट्रोल किया जा सकता है सिस्टम
लक्षवीर के एक अन्य प्रोजेक्ट की भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। जानकारी के अनुसार उन्होंने ESP32 के लिए ऐसा AI एजेंट तैयार किया है जिसे Telegram के जरिए प्राकृतिक भाषा (Natural Language) में कमांड देकर कंट्रोल किया जा सकता है।
यूजर सिर्फ लिखकर बता सकता है कि डिवाइस से क्या काम कराना है। इसके बाद AI खुद कोड तैयार करता है, उसे अपलोड करता है और डिवाइस पर रन भी कर देता है।
बच्चों के लिए प्रेरणा है लक्षवीर की उपलब्धि
लक्षवीर की यह उपलब्धि साबित करती है कि उम्र कभी भी सीखने और नया बनाने की सीमा नहीं होती। आज जब बच्चे AI का उपयोग केवल चैटबॉट या गेम खेलने तक सीमित रखते हैं, वहीं लक्षवीर ने AI को एक उपयोगी, सुरक्षित और ऑफलाइन समाधान में बदलकर दिखाया है।
उनकी यह डिवाइस भविष्य में बच्चों की शिक्षा, कहानी सुनाने, भाषा सीखने और कम इंटरनेट वाले क्षेत्रों में डिजिटल लर्निंग के लिए एक नई दिशा दिखा सकती है।


