नई दिल्ली: देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के लिए उसके तेजी से बढ़ते एफएमसीजी (FMCG) कारोबार से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कंपनी का रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) पहली बार EBITDA (एबिटा) स्तर पर पॉजिटिव हो गया है। यानी कंपनी का परिचालन कारोबार अब ब्रेक-ईवन पर पहुंच चुका है और संचालन से होने वाली कमाई उसकी परिचालन लागत को कवर करने लगी है।
रिलायंस का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कंपनी आने वाले वर्षों में भारत के एफएमसीजी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक इस कारोबार को ₹1,00,000 करोड़ के स्तर तक पहुंचाना है।
पहली बार EBITDA पॉजिटिव हुआ RCPL
रिलायंस इंडस्ट्रीज की पहली तिमाही (Q1) के नतीजों के बाद कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केतन मोदी ने बताया कि रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने पहली बार EBITDA पॉजिटिव प्रदर्शन किया है।
EBITDA पॉजिटिव होने का मतलब यह है कि कंपनी का मुख्य परिचालन कारोबार अब लाभदायक होने लगा है। इसमें ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास (Depreciation) और अमोर्टाइजेशन (Amortisation) को शामिल नहीं किया जाता। निवेशकों के लिए यह किसी भी नए बिजनेस की वित्तीय मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
हालांकि कंपनी ने अभी जून तिमाही का EBITDA या शुद्ध मुनाफे का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।
फिलहाल मार्केट शेयर बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर
केतन मोदी ने कहा कि कंपनी का मौजूदा फोकस अधिक से अधिक मार्केट शेयर हासिल करने पर है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे सप्लाई चेन मजबूत होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और कारोबार का विस्तार होगा, EBITDA में और सुधार देखने को मिलेगा।
रिलायंस फिलहाल भारत के एफएमसीजी बाजार में स्थापित कंपनियों को चुनौती देने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। कंपनी का उद्देश्य केवल बिक्री बढ़ाना नहीं बल्कि हर प्रमुख श्रेणी में मजबूत मौजूदगी बनाना है।
Campa Cola समेत कई ब्रांड बना रहे पहचान
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के पोर्टफोलियो में Campa Cola सबसे चर्चित ब्रांड बन चुका है। इसके अलावा कंपनी कई अन्य खाद्य, पेय पदार्थ और दैनिक उपयोग के उत्पादों में भी तेजी से विस्तार कर रही है।
रिलायंस अपनी मजबूत रिटेल नेटवर्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वितरण प्रणाली का फायदा उठाकर देशभर में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ा रही है।
मार्च तक 125 करोड़ रुपये का हुआ था घाटा
कंपनी के डीमर्जर के बाद दिसंबर से मार्च 2026 के बीच चार महीनों में RCPL को करीब 125 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। हालांकि उसके बाद कारोबार में तेजी आई और जून तिमाही में कंपनी का ग्रॉस रेवेन्यू बढ़कर लगभग ₹8,600 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले स्तर से दोगुने से भी अधिक है।
यही वजह है कि अब कंपनी परिचालन स्तर पर लाभ की स्थिति में पहुंच गई है।
FY30 तक ₹1 लाख करोड़ का बड़ा लक्ष्य
रिलायंस ने अपने एफएमसीजी कारोबार के लिए बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। कंपनी का उद्देश्य वित्त वर्ष 2030 तक इस बिजनेस का आकार ₹1,00,000 करोड़ तक पहुंचाना है।
केतन मोदी के अनुसार,
“हमारा लक्ष्य हर प्रमुख कैटेगरी में नेतृत्व हासिल करना है। इसके लिए हम लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं और बड़े स्तर पर निवेश कर रहे हैं।”
सप्लाई चेन पर ₹30,000 करोड़ का निवेश
रिलायंस एफएमसीजी कारोबार को मजबूत बनाने के लिए सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹30,000 करोड़ का निवेश कर रही है।
- कुल प्रस्तावित निवेश: ₹30,000 करोड़
- अब तक किया गया निवेश: ₹10,000 करोड़
- शेष निवेश अगले चरणों में किया जाएगा।
इस निवेश का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना और पूरे देश में तेज वितरण नेटवर्क तैयार करना है।
अगले 9–12 महीनों तक जारी रहेगा डार्क स्टोर्स का विस्तार
कंपनी आने वाले 9 से 12 महीनों में अपने डार्क स्टोर्स का विस्तार भी जारी रखेगी। डार्क स्टोर ऐसे वेयरहाउस होते हैं जो विशेष रूप से ऑनलाइन ऑर्डर की तेज डिलीवरी के लिए बनाए जाते हैं।
इन स्टोर्स के विस्तार से रिलायंस अपने क्विक कॉमर्स और डिजिटल रिटेल कारोबार को और मजबूत करना चाहती है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह खबर अहम?
एफएमसीजी कारोबार का EBITDA पॉजिटिव होना इस बात का संकेत है कि रिलायंस का नया कंज्यूमर बिजनेस अब शुरुआती निवेश चरण से आगे बढ़कर स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। यदि कंपनी अपनी सप्लाई चेन, वितरण नेटवर्क और ब्रांड विस्तार की रणनीति सफलतापूर्वक लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में यह कारोबार रिलायंस के सबसे बड़े ग्रोथ इंजन में शामिल हो सकता है।


