भारत में डिजिटल पेमेंट का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन नकदी की जरूरत आज भी खत्म नहीं हुई है। रोजमर्रा के छोटे लेनदेन में 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोटों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों के ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी है। सबसे पहले 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोट सीमित स्तर पर जारी किए जाएंगे।
ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्लास्टिक नोट छापना कागज के नोटों से ज्यादा महंगा होगा या सस्ता? आइए जानते हैं एक नोट की छपाई पर होने वाली लागत और इसके पीछे की पूरी गणित।
RBI क्यों ला रहा है प्लास्टिक नोट?
भारतीय रिजर्व बैंक ने छोटे मूल्य के नोटों की टिकाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। RBI की नोट छापने वाली कंपनी Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Private Limited (BRBNMPL) ने विशेष पॉलीमर शीट की आपूर्ति के लिए वैश्विक कंपनियों से आवेदन भी मांगे हैं।
शुरुआत में केवल 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों का ट्रायल होगा। यदि यह सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर सामग्री पर तैयार किए जा सकते हैं।
अभी 10 और 20 रुपये के कागज के नोट कैसे बनते हैं?
वर्तमान में भारत में चल रहे अधिकांश बैंक नोट सामान्य कागज से नहीं बल्कि 100% कॉटन आधारित विशेष बैंकनोट पेपर से बनाए जाते हैं। इसमें कई आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल होते हैं, जिससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो जाता है।
RTI से सामने आई जानकारी के अनुसार छोटे मूल्य के नोटों की छपाई की अनुमानित लागत इस प्रकार है।
| नोट | प्रति नोट छपाई की अनुमानित लागत |
|---|---|
| 10 रुपये | लगभग 70 पैसे से 1.01 रुपये |
| 20 रुपये | लगभग 95 पैसे से 1 रुपये |
प्लास्टिक नोट छापने की लागत कितनी होगी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पॉलीमर नोटों की शुरुआती छपाई लागत कागज के नोटों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।
अनुमान के अनुसार—
- एक प्लास्टिक नोट तैयार करने की लागत लगभग 2 रुपये से 6 रुपये तक हो सकती है।
- यानी शुरुआती चरण में पॉलीमर नोट छापना कागज के नोटों की तुलना में 2 से 5 गुना तक महंगा पड़ सकता है।
- हालांकि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद यह लागत कुछ कम हो सकती है।
फिर भी RBI प्लास्टिक नोट क्यों ला रहा है?
भले ही एक पॉलीमर नोट तैयार करने में अधिक खर्च आए, लेकिन इसकी लंबी उम्र इस अतिरिक्त लागत की भरपाई कर सकती है।
छोटे मूल्य के नोट सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं और जल्दी फट जाते हैं। ऐसे में RBI को बार-बार नए नोट छापने पड़ते हैं। यदि पॉलीमर नोट कई वर्षों तक चलते हैं, तो कुल मिलाकर नोट बदलने और दोबारा छापने का खर्च कम हो सकता है।
प्लास्टिक नोटों के प्रमुख फायदे
- सामान्य नोटों की तुलना में कई गुना अधिक टिकाऊ होते हैं।
- पानी, नमी और धूल का इन पर कम असर पड़ता है।
- जल्दी फटते या खराब नहीं होते।
- अधिक इस्तेमाल होने वाले 10 और 20 रुपये के नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम पड़ती है।
- लंबे समय में नोटों की छपाई और रिप्लेसमेंट पर होने वाला खर्च घट सकता है।
- सुरक्षा फीचर बेहतर होने से नकली नोटों पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
क्या प्लास्टिक नोट पूरी तरह कागज के नोटों की जगह ले लेंगे?
फिलहाल ऐसा नहीं है। RBI पहले 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों का सीमित ट्रायल करेगा। इन नोटों की गुणवत्ता, टिकाऊपन, जनता की प्रतिक्रिया और परिचालन संबंधी अनुभव का मूल्यांकन किया जाएगा। ट्रायल सफल रहने पर ही इनके बड़े स्तर पर प्रचलन का फैसला लिया जाएगा।
निष्कर्ष
शुरुआती दौर में प्लास्टिक नोटों की छपाई कागज के नोटों की तुलना में महंगी जरूर होगी, लेकिन उनकी लंबी उम्र, कम रखरखाव और बार-बार नए नोट छापने की जरूरत घटने से लंबे समय में RBI की कुल लागत कम हो सकती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी अब पॉलीमर नोटों की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।


