RBI Floating Rate Savings Bonds: अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं और अपने पैसे के लिए एक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं, तो RBI Floating Rate Savings Bonds, 2020 (Taxable) आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं। इस सरकारी बॉन्ड पर फिलहाल 8.05% सालाना ब्याज मिल रहा है। खास बात यह है कि इसकी ब्याज दर नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) की दर से जुड़ी है और हर छह महीने में रीसेट होती है।
हालांकि, इसे केवल यह कहकर समझना सही नहीं होगा कि इसमें “पैसा डूबने का कोई रिस्क नहीं” या हर बैंक FD से ज्यादा ब्याज मिलता है। यह भारत सरकार द्वारा समर्थित सिक्योरिटी है, इसलिए क्रेडिट रिस्क बहुत कम माना जाता है, लेकिन ब्याज दर पूरी 7 साल की अवधि के लिए लॉक नहीं होती और समय से पहले पैसा निकालने पर भी शर्तें लागू होती हैं।
अभी कितना ब्याज मिल रहा है?
RBI के मुताबिक 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 की अवधि के लिए Floating Rate Savings Bond की ब्याज दर 8.05% सालाना है। यह दर 7.70% NSC ब्याज दर में 0.35% जोड़कर तय की गई है। RBI ने स्पष्ट किया है कि इस बॉन्ड की कूपन दर हर छह महीने में रीसेट होती है।
यानी फिलहाल इसका फॉर्मूला इस तरह है:
NSC ब्याज दर 7.70% + 0.35% = FRSB ब्याज दर 8.05%
इससे साफ है कि 8.05% की दर को पूरी 7 साल की अवधि के लिए फिक्स रिटर्न नहीं माना जा सकता। भविष्य में NSC की दर बदलने पर Floating Rate Savings Bond की दर भी बदल सकती है।
क्या हैं RBI Floating Rate Savings Bonds?
Floating Rate Savings Bonds, 2020 (Taxable) भारत सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले बॉन्ड हैं, जिन्हें RBI और अधिकृत बैंकों/संस्थानों के जरिए खरीदा जा सकता है।
इसे “Floating Rate” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी ब्याज दर बाजार में हर दिन नहीं बदलती, बल्कि हर छह महीने में तय फॉर्मूले के आधार पर रीसेट होती है।
इस बॉन्ड की मुख्य विशेषताएं हैं:
- जारीकर्ता: भारत सरकार
- वर्तमान ब्याज दर: 8.05% सालाना
- अवधि: 7 साल
- ब्याज भुगतान: हर छह महीने
- न्यूनतम निवेश: ₹1,000
- निवेश की अधिकतम सीमा: कोई ऊपरी सीमा नहीं
- NRI: नए निवेश के लिए पात्र नहीं
- ब्याज: टैक्सेबल
- शेयर बाजार की तरह ट्रेडिंग: नहीं
बॉन्ड की जानकारी के अनुसार न्यूनतम ₹1,000 से निवेश शुरू किया जा सकता है और इसके बाद ₹1,000 के गुणकों में रकम लगाई जा सकती है। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।
ब्याज दर कैसे तय होती है?

इस स्कीम को समझने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी ब्याज दर का फॉर्मूला है।
RBI के नियमों के मुताबिक Floating Rate Savings Bond की कूपन दर NSC की मौजूदा दर से 35 बेसिस पॉइंट यानी 0.35 प्रतिशत अधिक रखी जाती है। यह दर 1 जनवरी और 1 जुलाई को हर छह महीने में रीसेट होती है।
फिलहाल NSC की दर 7.70% और बॉन्ड का स्प्रेड 0.35% है। इसलिए जुलाई-दिसंबर 2026 के लिए ब्याज दर 8.05% बनी हुई है।
₹1 लाख निवेश करने पर कितना ब्याज?
अगर उदाहरण के तौर पर कोई निवेशक ₹1 लाख इस बॉन्ड में लगाता है और 8.05% की दर पूरे संबंधित भुगतान काल में लागू रहती है, तो सालाना ब्याज करीब:
₹1,00,000 × 8.05% = ₹8,050
यानी छह महीने में करीब ₹4,025 का ब्याज बनता है।
लेकिन यह गणना केवल मौजूदा 8.05% दर को पूरे साल के लिए मानकर की गई है। भविष्य की ब्याज दर बदल सकती है और टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाली रकम अलग होगी।
ब्याज कब मिलता है?
इस बॉन्ड में ब्याज का भुगतान हर छह महीने किया जाता है। भुगतान 1 जनवरी और 1 जुलाई को किया जाता है। इसमें मिलने वाले ब्याज को अपने आप दोबारा निवेश करने का विकल्प नहीं होता।
इसका मतलब यह है कि यह उन निवेशकों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो नियमित अंतराल पर ब्याज की रकम प्राप्त करना चाहते हैं।
7 साल का लॉक-इन, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों को राहत
Floating Rate Savings Bonds की सामान्य मैच्योरिटी 7 साल है। इसलिए इसमें पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि यह शॉर्ट-टर्म निवेश नहीं है।
हालांकि, नियमों के तहत 60 साल या उससे अधिक उम्र के निवेशकों को कुछ परिस्थितियों में समय से पहले रिडेम्पशन की सुविधा मिलती है। अलग-अलग आयु वर्ग के लिए लॉक-इन अवधि अलग है।
- 60 से 70 वर्ष: 6 साल के बाद
- 70 से 80 वर्ष: 5 साल के बाद
- 80 वर्ष से अधिक: 4 साल के बाद
समय से पहले रिडेम्पशन पर नियमों के अनुसार पेनल्टी भी लागू होती है। उदाहरण के तौर पर बैंक की जानकारी के मुताबिक ऐसी स्थिति में पिछले छह महीने के देय ब्याज का 50% पेनल्टी के तौर पर रिकवर किया जा सकता है।
इसलिए केवल ब्याज दर देखकर निवेश करने के बजाय यह जरूर देखें कि आपको अगले कुछ वर्षों में इस पैसे की जरूरत तो नहीं पड़ेगी।
कौन कर सकता है निवेश?
इस बॉन्ड में मुख्य रूप से Resident Individual और Hindu Undivided Family (HUF) निवेश कर सकते हैं। NRI इसमें नया निवेश नहीं कर सकते।
नाबालिग के नाम पर भी अभिभावक/कानूनी संरक्षक के जरिए निवेश की सुविधा हो सकती है, लेकिन निवेश करने से पहले संबंधित बैंक या अधिकृत प्राप्ति केंद्र के मौजूदा नियमों की जांच करना जरूरी है।
कितना पैसा लगा सकते हैं?
इस योजना की एक बड़ी खासियत इसका नो मैक्सिमम लिमिट होना है।
आप:
- ₹1,000 से निवेश शुरू कर सकते हैं।
- ₹1,000 के गुणकों में निवेश कर सकते हैं।
- अधिकतम निवेश की कोई निर्धारित ऊपरी सीमा नहीं है।
यही वजह है कि बड़ी रकम को अपेक्षाकृत सुरक्षित सरकारी साधन में लगाने वाले निवेशकों के लिए यह विकल्प आकर्षक हो सकता है।
क्या इसमें टैक्स लगता है?
हां। इसका ब्याज टैक्सेबल है। यानी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज को आपकी कर योग्य आय में शामिल किया जाता है और आपकी लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देनदारी बन सकती है।
इसलिए 8.05% की दर को सीधे आपका “टैक्स के बाद रिटर्न” नहीं माना जाना चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक को सालभर में ₹8,050 ब्याज मिलता है, तो वास्तविक पोस्ट-टैक्स रिटर्न उसकी कुल आय और लागू टैक्स स्लैब पर निर्भर करेगा।
बॉन्ड पर ब्याज भुगतान के समय TDS के नियम भी लागू हो सकते हैं। इसलिए बड़ी रकम निवेश करने वाले निवेशकों को निवेश से पहले अपने बैंक और टैक्स सलाहकार से मौजूदा TDS नियमों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
RBI बॉन्ड और बैंक FD में क्या अंतर है?
दोनों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की श्रेणी में देखा जा सकता है, लेकिन इनके फीचर्स अलग हैं।
| फीचर | RBI Floating Rate Savings Bonds | Bank FD |
|---|---|---|
| जारीकर्ता | भारत सरकार | बैंक |
| मौजूदा FRSB दर | 8.05% | बैंक और अवधि के अनुसार अलग |
| ब्याज दर | हर 6 महीने रीसेट | आमतौर पर निवेश के समय तय |
| अवधि | 7 साल | अलग-अलग अवधि |
| अधिकतम निवेश | कोई सीमा नहीं | बैंक के नियमों के अनुसार |
| ब्याज भुगतान | हर छह महीने | विकल्प के अनुसार |
| समय से पहले निकासी | सीमित, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए | बैंक की शर्तों के अनुसार |
| टैक्स | ब्याज टैक्सेबल | ब्याज टैक्सेबल |
RBI की वेबसाइट पर उपलब्ध बैंकिंग दरों के आंकड़ों में जुलाई 2026 के दौरान एक साल से अधिक अवधि की टर्म डिपॉजिट दरों की सामान्य रेंज 6.00%-6.75% दिखाई गई थी। हालांकि अलग-अलग बैंक, अवधि और विशेष FD योजनाओं की दरें इससे अलग हो सकती हैं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि Floating Rate Savings Bond हर बैंक FD से हमेशा ज्यादा ब्याज देता है। सही तुलना निवेश की तारीख, FD की अवधि, बैंक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध अतिरिक्त ब्याज को देखकर करनी चाहिए।
पैसा कितना सुरक्षित है?
इस बॉन्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत सरकार द्वारा समर्थित सरकारी सिक्योरिटी है। इसलिए इसे बैंक जमा की तरह केवल किसी बैंक की बैलेंस शीट पर निर्भर निवेश समझना सही नहीं है।
फिर भी निवेश की दुनिया में “100% रिस्क-फ्री” जैसे शब्दों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। इसमें शेयर बाजार जैसा बाजार मूल्य उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं है क्योंकि यह गैर-ट्रेडेबल सरकारी बॉन्ड है, लेकिन निवेशक को लिक्विडिटी, ब्याज दर में बदलाव और टैक्स जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
कहां से खरीद सकते हैं?
Floating Rate Savings Bonds को अधिकृत बैंकों और अन्य निर्धारित प्राप्ति केंद्रों के माध्यम से खरीदा जा सकता है। कई बैंक अपने ग्राहकों को डिजिटल माध्यम से भी निवेश की सुविधा देते हैं।
निवेश करने से पहले अपने बैंक में यह जरूर जांचें कि FRSB 2020 (Taxable) की खरीद की सुविधा शाखा, इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग में उपलब्ध है या नहीं।
यह बॉन्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप में Bond Ledger Account (BLA) में रखा जाता है। इसे शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा-बेचा नहीं जा सकता और इसकी ट्रांसफरेबिलिटी भी सीमित है।
किस निवेशक के लिए यह स्कीम बेहतर हो सकती है?
यह विकल्प उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो:
- शेयर बाजार का जोखिम नहीं लेना चाहते।
- लंबी अवधि के लिए पैसा लॉक कर सकते हैं।
- सरकारी समर्थित निवेश को प्राथमिकता देते हैं।
- नियमित छह-महीने के अंतराल पर ब्याज चाहते हैं।
- अपने पोर्टफोलियो में डेट/फिक्स्ड-इनकम का हिस्सा बढ़ाना चाहते हैं।
- बड़ी रकम के लिए बिना अधिकतम सीमा वाला सरकारी निवेश विकल्प तलाश रहे हैं।
वहीं, अगर आपको जल्द पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो 7 साल की अवधि और सीमित premature withdrawal सुविधा के कारण यह विकल्प आपके लिए कम उपयुक्त हो सकता है।
निवेश से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान
1. 8.05% हमेशा नहीं मिलेगा
यह मौजूदा जुलाई-दिसंबर 2026 की दर है। भविष्य में NSC की दर बदलने पर FRSB की दर भी बदल सकती है।
2. ब्याज टैक्सेबल है
इसलिए 8.05% को टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न न समझें।
3. पैसा लंबे समय तक फंस सकता है
सामान्य मैच्योरिटी 7 साल है और premature withdrawal पर कड़े नियम हैं।
4. हर FD से ज्यादा रिटर्न जरूरी नहीं
किसी खास अवधि में कुछ बैंक FD इससे ज्यादा दर दे सकते हैं, इसलिए तुलना जरूरी है।
5. इसे पोर्टफोलियो के हिसाब से देखें
सिर्फ ब्याज दर देखकर पूरी बचत एक ही जगह लगाने के बजाय अपनी जरूरत, कैश फ्लो, टैक्स स्थिति और निवेश अवधि को ध्यान में रखना बेहतर है।
निष्कर्ष
RBI Floating Rate Savings Bonds 2020 (Taxable) उन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है जो शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर सरकारी समर्थन वाले निवेश में पैसा लगाना चाहते हैं। जुलाई से दिसंबर 2026 के लिए इसकी ब्याज दर 8.05% है, जो NSC की 7.70% दर में 0.35% जोड़कर तय हुई है।
लेकिन इसे “7 साल के लिए फिक्स 8.05% रिटर्न” समझना गलती होगी। ब्याज दर हर छह महीने में रीसेट होती है, ब्याज टैक्सेबल है और सामान्य निवेशक के लिए मैच्योरिटी 7 साल है। इसलिए निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी लिक्विडिटी जरूरत, टैक्स स्लैब और निवेश अवधि इस स्कीम से मेल खाते हैं या नहीं।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश का फैसला करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और टैक्स नियमों को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-registered investment adviser या योग्य वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लें।


