F&O, Rupees Printing Machine or Destroyer: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O को कई रिटेल ट्रेडर्स तेजी से पैसा कमाने का जरिया मानते हैं, लेकिन आंकड़े इसकी दूसरी तस्वीर दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2026 में F&O में रिटेल ट्रेडर्स का कुल नुकसान कई वर्षों बाद कम हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रेडिंग में जोखिम घट गया है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) की ताजा ट्रेडर बिहैवियर और परफॉर्मेंस रिपोर्ट में रिटेल ट्रेडर्स को लेकर कई चिंताजनक बातें सामने आई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या और कुल नेट नुकसान दोनों में कमी आई, लेकिन नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स का अनुपात अब भी बेहद ऊंचा है। इतना ही नहीं, नुकसान में रहने वाले ट्रेडर्स का औसत घाटा बढ़ गया। यानी कम लोगों ने F&O ट्रेडिंग की, लेकिन जो लोग बाजार में बने रहे, उनमें कई ने पहले की तुलना में ज्यादा जोखिम लिया।
F&O में कितने ट्रेडर्स को हुआ नुकसान?
वित्त वर्ष 2026 में F&O में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या करीब 18% घटकर 87.5 लाख रह गई। इसी अवधि में इन ट्रेडर्स का कुल नेट नुकसान भी करीब 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा।
पहली नजर में यह राहत देने वाला आंकड़ा लग सकता है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण है। नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स का अनुपात 90.9% से घटकर 87.7% हुआ। इसका मतलब है कि अब भी करीब 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स F&O में नुकसान उठा रहे हैं।
वहीं, नुकसान में रहने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान बढ़कर करीब ₹1.17 लाख हो गया। यानी कुल नुकसान घटने की बड़ी वजह ट्रेडर्स की संख्या में कमी रही, न कि यह कि ज्यादातर ट्रेडर्स ने अपनी ट्रेडिंग रणनीति में बड़ा सुधार किया।
Options Trading अब भी रिटेलर्स की पहली पसंद
SEBI के बिहैवियरल एनालिसिस में ऑप्शंस ट्रेडिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। करीब 99.3% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेड किया।
वहीं करीब 93% ट्रेडर्स सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेडिंग करते रहे। इसके मुकाबले फ्यूचर्स में रिटेल भागीदारी काफी सीमित रही।
रणनीति के हिसाब से देखा जाए तो ऑप्शंस खरीदारों को सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक ऑप्शंस बायर्स में नुकसान का अनुपात करीब 90% रहा। इससे पता चलता है कि कम समय में बड़ा रिटर्न हासिल करने की कोशिश में रिटेल ट्रेडर्स अक्सर ऐसे ट्रेड ले लेते हैं जिनमें नुकसान की संभावना काफी ज्यादा होती है।
खासकर एक्सपायरी डे पर ट्रेडिंग, बिना पर्याप्त रणनीति के दिशा का अनुमान लगाना, सोशल मीडिया या अनौपचारिक टिप्स पर भरोसा करना और अपनी क्षमता से बड़ी पोजिशन लेना रिटेल ट्रेडर्स के लिए भारी पड़ सकता है।
रिटेल ट्रेडर्स के सामने अब पहले से बड़ी चुनौती
F&O मार्केट में रिटेल ट्रेडर्स का मुकाबला सिर्फ दूसरे छोटे ट्रेडर्स से नहीं है। बाजार में प्रोफेशनल और संस्थागत खिलाड़ियों की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स, FPIs और एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग सिस्टम इस्तेमाल करने वाले पेशेवर खिलाड़ी टेक्नोलॉजी, रिस्क मॉडल, ऑटोमेटेड एग्जीक्यूशन और अनुशासित पोजिशन साइजिंग का इस्तेमाल करते हैं।
वित्त वर्ष 2026 में प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स ने करीब ₹44,000 करोड़, जबकि FPIs ने करीब ₹14,000 करोड़ की कमाई की। इन दोनों वर्गों की कमाई का करीब 99% हिस्सा एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग एंटिटीज से आया।
यहीं रिटेल और प्रोफेशनल ट्रेडर्स के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। एक तरफ कई छोटे ट्रेडर्स भावनाओं, सोशल मीडिया टिप्स और एक्सपायरी डे के ट्रेड पर निर्भर रहते हैं, वहीं प्रोफेशनल खिलाड़ी पहले से तय रणनीति, तकनीक और रिस्क मैनेजमेंट के आधार पर ट्रेडिंग करते हैं।
ज्यादा अनुभव से भी नुकसान की गारंटी खत्म नहीं हुई
F&O से जुड़ी एक आम धारणा यह है कि लंबे समय तक ट्रेडिंग करने से व्यक्ति अपने आप बेहतर ट्रेडर बन जाता है। SEBI के आंकड़े इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं ठहराते।
जिन ट्रेडर्स ने लगातार चार या उससे अधिक वर्षों तक ट्रेडिंग की, उनमें भी नुकसान उठाने वालों की संख्या काफी अधिक रही। इसका मतलब है कि सिर्फ बाजार में लंबे समय तक बने रहना पर्याप्त नहीं है। अगर गलत रणनीति, ओवरट्रेडिंग और खराब रिस्क मैनेजमेंट लगातार जारी रहे तो अनुभव के बावजूद नुकसान हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन ट्रेडर्स को लगातार दो साल नुकसान हुआ, उनमें से करीब 90% ने ट्रेडिंग जारी रखी। यानी लगातार घाटा होने के बावजूद बड़ी संख्या में ट्रेडर्स ने बाजार से दूरी बनाने के बजाय ट्रेडिंग जारी रखी और दोबारा नुकसान उठाने का जोखिम लिया।
ज्यादा ट्रेडिंग करने वालों का घाटा भी ज्यादा
SEBI की रिपोर्ट में ओवरट्रेडिंग को लेकर भी चिंता सामने आई है। सबसे ज्यादा एक्टिव करीब 42% ट्रेडर्स ने कुल घाटे में लगभग 87% हिस्सेदारी रखी। वहीं टर्नओवर में उनकी हिस्सेदारी करीब 94% रही।
इससे संकेत मिलता है कि ज्यादा ट्रेड करना हमेशा ज्यादा कमाई का रास्ता नहीं है। कई मामलों में ज्यादा ट्रेडिंग का मतलब ज्यादा ब्रोकरेज, ज्यादा जोखिम और नुकसान की संभावना बढ़ना भी हो सकता है।
यह समस्या खास तौर पर युवा और कम आय वाले ट्रेडर्स में ज्यादा दिखाई देती है, जहां सीमित पूंजी के साथ जल्दी पैसा बनाने की कोशिश जोखिम को और बढ़ा सकती है।
कम पूंजी वाले ट्रेडर्स के लिए ज्यादा जोखिम
SEBI के आंकड़ों में ट्रेडर्स की इक्विटी होल्डिंग और F&O में नुकसान के बीच भी एक महत्वपूर्ण संबंध सामने आया।
करीब 35% डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था, जबकि करीब 78% के पास ₹1 लाख से कम की इक्विटी होल्डिंग थी।
पोर्टफोलियो का आकार बढ़ने के साथ नुकसान की संभावना कम होती गई। बहुत कम या बिना इक्विटी होल्डिंग वाले ट्रेडर्स में नुकसान की संभावना करीब 93% रही। इसके मुकाबले ₹10 करोड़ से ज्यादा के पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स में यह संभावना करीब 58% रही।
इससे यह संकेत मिलता है कि छोटी पूंजी वाले कई ट्रेडर्स अपनी उपलब्ध पूंजी के मुकाबले काफी बड़ा एक्सपोजर लेते हैं। दूसरी तरफ बड़ी पूंजी वाले निवेशकों के पास अपने जोखिम को अलग-अलग एसेट और पोजिशन में बांटने की अधिक क्षमता होती है।
F&O को ‘पैसा छापने की मशीन’ समझना पड़ सकता है भारी
F&O में तेजी से पैसा बनाने की संभावना जरूर दिखाई देती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बहुत अधिक होता है। खासकर ऑप्शंस में छोटी अवधि में बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कई ट्रेडर्स को बड़े नुकसान की तरफ ले जाती है।
SEBI की रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ट्रेडिंग में सिर्फ अनुभव या ज्यादा ट्रेड करना सफलता की गारंटी नहीं है। रणनीति, रिस्क मैनेजमेंट, पोजिशन साइजिंग और अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वित्त वर्ष 2026 में कुल नुकसान घटने के बावजूद रिटेल ट्रेडर्स के लिए तस्वीर अभी भी चुनौतीपूर्ण है। 87.7% ट्रेडर्स का नुकसान में रहना और नुकसान उठाने वालों का औसत घाटा करीब ₹1.17 लाख तक पहुंचना बताता है कि F&O में उतरने से पहले जोखिम को समझना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। शेयर बाजार और F&O में निवेश एवं ट्रेडिंग बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह का निवेश या ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी व्यक्ति को किसी विशेष शेयर, F&O कॉन्ट्रैक्ट या निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


