Gautam Adani meets DK Shivakumar: उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से बेंगलुरु स्थित उनके सदाशिवनगर आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी L1 bidder बनी हुई है। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसे लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय या अडानी ग्रुप की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार को बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर हुई इस मुलाकात को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के प्रस्तावित टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों के बीच हुई बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट को लेकर कोई चर्चा हुई या नहीं। मुख्यमंत्री कार्यालय और अडानी ग्रुप की ओर से भी बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सामने आए वीडियो में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया।
टनल रोड प्रोजेक्ट के बीच हुई मुलाकात
Bengaluru, Karnataka: Adani Group Chairman Gautam Adani leaves the residence of Chief Minister DK Shivakumar after meeting him pic.twitter.com/z9gjSc5HHO
— IANS (@ians_india) August 23, 2026 गौतम अडानी और डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी।
बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई वित्तीय बोलियों में AEL दोनों पैकेजों में L1 रही थी। इसका मतलब है कि बोली प्रक्रिया में कंपनी ने सबसे कम कीमत पेश की थी।
राज्य सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज की बोली करीब 22,267 करोड़ रुपये रही। इस तरह कंपनी की बोली सरकार के अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये अधिक है।
अभी अडानी ग्रुप को नहीं मिला है ठेका
सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अडानी एंटरप्राइजेज को अभी इस प्रोजेक्ट का आधिकारिक ठेका नहीं मिला है।
प्रोजेक्ट को लागू करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से तय सीमा से अधिक होने के कारण अब इस पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
इसका मतलब यह है कि L1 bidder बनने के बावजूद प्रोजेक्ट का अंतिम आवंटन अभी बाकी है।
डीके शिवकुमार के लिए क्यों अहम है टनल रोड प्रोजेक्ट?
बेंगलुरु का टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल रहा है। बेंगलुरु विकास मंत्री के तौर पर भी शिवकुमार इस परियोजना का समर्थन कर चुके हैं।
हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर शहर के नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से सवाल भी उठाए गए हैं। आलोचकों ने परियोजना की भारी लागत, संभावित ट्रैफिक प्रभाव और बेंगलुरु की मौजूदा परिवहन व्यवस्था पर इसके असर को लेकर चिंता जताई है।
30 साल तक निजी कंपनी के पास रहेगा संचालन
प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है। इसके तहत सरकार परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए Viability Gap Funding (VGF) उपलब्ध कराएगी।
योजना के मुताबिक सरकार परियोजना की लागत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी। वहीं, निजी कंपनी कंसेशन अवधि के दौरान टोल या अन्य निर्धारित व्यवस्था के जरिए अपने निवेश की भरपाई करेगी। प्रस्तावित कंसेशन अवधि करीब 30 साल बताई गई है।
कर्नाटक में अडानी ग्रुप की पहले से मौजूदगी
अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से मजबूत कारोबारी मौजूदगी है। समूह की विभिन्न कंपनियां राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
इसके अलावा, अडानी ग्रुप की कंपनियां उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में बेंगलुरु के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में समूह की संभावित भूमिका को कारोबारी नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक नजरिए से भी अहम है मुलाकात
गौतम अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं और विभिन्न परियोजनाओं में उद्योग समूह को कथित लाभ पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं।
हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ही ऐसे आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
ऐसे में एक ओर अडानी एंटरप्राइजेज का बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में L1 bidder होना और दूसरी ओर गौतम अडानी की कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मुलाकात ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधे संबंध की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गुजरात में जैन मंदिर भी पहुंचे थे गौतम अडानी
कर्नाटक पहुंचने से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ भी पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी मौजूद थीं।
अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होने वाला है।
क्या अडानी-शिवकुमार मुलाकात में टनल रोड पर हुई बात?
फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इतना जरूर है कि बैठक ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज बेंगलुरु के महत्वाकांक्षी टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों में L1 bidder है और परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
इसलिए आने वाले समय में राज्य सरकार के फैसले और कैबिनेट की मंजूरी पर नजर रहेगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि गौतम अडानी और डीके शिवकुमार की बैठक सीधे टनल रोड प्रोजेक्ट को लेकर हुई थी।


