Private vs Govt Banks: भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है। लोग अपनी बचत तेजी से प्राइवेट बैंकों में जमा कर रहे हैं, जबकि कर्ज लेने के लिए सरकारी बैंकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। जून तिमाही के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि डिपॉजिट ग्रोथ में प्राइवेट बैंक आगे हैं, लेकिन लोन ग्रोथ के मामले में सरकारी बैंकों ने बाजी मार ली है। इससे बैंकिंग सिस्टम में फंडिंग और लिक्विडिटी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
प्राइवेट बैंकों में तेजी से बढ़ रहा डिपॉजिट
15 प्राइवेट और 9 सरकारी बैंकों के शुरुआती बिजनेस अपडेट के मुताबिक जून तिमाही में प्राइवेट बैंकों के डिपॉजिट में 14.3% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं सरकारी बैंकों में यह बढ़ोतरी 10.7% रही। यानी डिपॉजिट जुटाने के मामले में प्राइवेट बैंक लगभग 3.6 प्रतिशत अंक आगे निकल गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर डिजिटल बैंकिंग, तेज सर्विस, आकर्षक सेविंग और टर्म डिपॉजिट ऑफर तथा मजबूत ग्राहक अनुभव के कारण प्राइवेट बैंकों को लगातार स्ट्रक्चरल फायदा मिल रहा है।
लोन देने में सरकारी बैंकों ने मारी बाजी
डिपॉजिट में पीछे रहने के बावजूद सरकारी बैंक लोन देने के मामले में आगे रहे। पहली तिमाही में सरकारी बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 16.4% रही, जबकि प्राइवेट बैंकों की 15.9% रही। दोनों के बीच करीब 50 बेसिस पॉइंट का अंतर देखने को मिला।
इसका मतलब है कि लोग बचत के लिए प्राइवेट बैंक चुन रहे हैं, लेकिन सस्ते और आसान कर्ज के लिए सरकारी बैंकों का रुख कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
सरकारी बैंकों की लोन ग्रोथ उनके डिपॉजिट की तुलना में ज्यादा तेज है। इससे उनका Loan-to-Deposit (LTD) Ratio बढ़कर 77% से 81% हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डिपॉजिट की रफ्तार नहीं बढ़ी और लोन इसी तरह तेजी से बढ़ते रहे तो भविष्य में फंडिंग और लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ सकता है।
प्राइवेट बैंकों की स्थिति ज्यादा संतुलित
प्राइवेट बैंकों ने मजबूत डिपॉजिट के साथ अच्छी क्रेडिट ग्रोथ भी दर्ज की। उनका Loan-to-Deposit Ratio केवल 91% से बढ़कर 92% हुआ है। इसका मतलब है कि उनकी लोन ग्रोथ के पीछे पर्याप्त डिपॉजिट सपोर्ट मौजूद है और उनकी फंडिंग स्थिति अपेक्षाकृत अधिक मजबूत मानी जा रही है।
सरकारी बैंकों का घटता डिपॉजिट शेयर
यह बदलाव कोई नया नहीं है बल्कि पिछले एक दशक से लगातार देखने को मिल रहा है।
- वित्त वर्ष 2013-14 में सरकारी बैंकों का डिपॉजिट मार्केट शेयर 76% था।
- मार्च 2026 तक यह घटकर 57% रह गया।
वहीं इसी अवधि में प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी 19.4% से बढ़कर 36.4% हो गई, जो ग्राहकों की बदलती पसंद को दर्शाती है।
किस बैंक ने किया सबसे अच्छा प्रदर्शन?
प्राइवेट बैंक
- IDFC First Bank – 20.6% क्रेडिट ग्रोथ
- Axis Bank – 19%
- HDFC Bank – 15%
- Kotak Mahindra Bank – 12%
सरकारी बैंक
- Central Bank of India – 28.8% क्रेडिट ग्रोथ
- Bank of India – 18.6%
- Bank of Baroda – 17.4%
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती डिपॉजिट जुटाने की होगी। यदि सरकारी बैंक डिपॉजिट ग्रोथ नहीं बढ़ा पाए तो तेज लोन वितरण को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर प्राइवेट बैंक मजबूत डिपॉजिट बेस के दम पर अपनी क्रेडिट ग्रोथ को अधिक टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल दो अलग-अलग ट्रेंड साफ दिखाई दे रहे हैं। ग्राहक अपनी बचत के लिए प्राइवेट बैंकों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि लोन लेने के लिए सरकारी बैंकों को चुन रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ ग्राहकों की पसंद नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में बदलते प्रतिस्पर्धी माहौल और फंडिंग रणनीतियों का भी संकेत है। आने वाले समय में डिपॉजिट जुटाने की क्षमता ही बैंकों की वास्तविक मजबूती तय करेगी।


