भारत में पेट्रोल की कीमतों में 26 मई 2026 को हल्का बदलाव देखने को मिला है। देश की आर्थिक गतिविधियों, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर लगातार पड़ रहा है। मुंबई में आज पेट्रोल का दाम बढ़कर ₹111.21 प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी अलग-अलग स्तर पर कीमतें बनी हुई हैं।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतों पर सबसे बड़ा असर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स का रहता है। यही वजह है कि कई राज्यों में पेट्रोल के दामों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है या रुपये में कमजोरी बढ़ती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर फिर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल बाजार में किसी भी हलचल का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर दिखाई देता है।
मुंबई में पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज पेट्रोल की कीमत ₹111.21 प्रति लीटर दर्ज की गई। यह पिछले दिन के मुकाबले ₹0.03 अधिक है। वहीं चेन्नई में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है। दूसरी ओर कुछ शहरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।
पिछले 10 दिनों के आंकड़ों को देखें तो पेट्रोल की कीमतों में लगातार छोटे-छोटे बदलाव हो रहे हैं। इस दौरान कई शहरों में कीमतें ₹106 से ₹111 प्रति लीटर के बीच बनी रहीं।
देश के प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल का भाव
| शहर | पेट्रोल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹102.12 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹113.47 | स्थिर |
| मुंबई | ₹111.21 | +₹0.03 |
| चेन्नई | ₹107.87 | +₹0.10 |
| गुरुग्राम | ₹102.59 | -₹0.18 |
| नोएडा | ₹102.38 | +₹0.26 |
| बेंगलुरु | ₹110.93 | स्थिर |
| भुवनेश्वर | ₹108.89 | -₹0.33 |
| चंडीगढ़ | ₹101.54 | +₹0.03 |
| हैदराबाद | ₹115.73 | +₹0.04 |
| जयपुर | ₹112.66 | स्थिर |
| लखनऊ | ₹101.86 | -₹0.19 |
| पटना | ₹113.35 | स्थिर |
| तिरुवनंतपुरम | ₹115.49 | स्थिर |
भारत में पेट्रोल इतना महंगा क्यों है?
भारत में पेट्रोल की कीमतें सिर्फ कच्चे तेल की लागत से तय नहीं होतीं। इसमें कई तरह के टैक्स और चार्ज शामिल होते हैं।
पेट्रोल की कीमत बढ़ाने वाले प्रमुख कारण
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों का वैट
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
- ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में पेट्रोल पर टैक्स का हिस्सा काफी बड़ा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद उपभोक्ताओं को तुरंत राहत नहीं मिलती।
आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?
पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है, जिससे खाने-पीने की चीजें, सब्जियां, दूध, ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।
अगर ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल के दामों को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
कच्चे तेल और रुपये की चाल पर नजर
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताओं की वजह से क्रूड ऑयल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी तेल आयात को महंगा बनाती है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में नई बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पेट्रोल के दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। अगर वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो तेल कंपनियां कीमतों में और बदलाव कर सकती हैं।
हालांकि सरकारें महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए टैक्स में बदलाव या अन्य कदम भी उठा सकती हैं। इसलिए आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतों पर लगातार नजर बनी रहेगी।
Source: GoodReturns fuel price data, oil market trends and public fuel pricing data.
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