भारतीय सेना प्रमुख Upendra Dwivedi ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की आधुनिक सैन्य रणनीति का एक “टर्निंग पॉइंट” बताया है। उनके अनुसार, यह ऑपरेशन सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसने दिखाया कि भारत अब पारंपरिक युद्ध मॉडल से आगे बढ़कर मल्टी-डोमेन वॉरफेयर (MDO) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और केवल जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रह गया है।
क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ मई 2025 में भारत द्वारा की गई एक सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
यह कार्रवाई अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई थी।
इस ऑपरेशन की खास बात यह थी कि इसमें केवल पारंपरिक सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि कई डोमेन्स—जैसे साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और इंटेलिजेंस—का संयुक्त उपयोग किया गया।
“डोमेन जॉइंटनेस” क्या है?
सेना प्रमुख Upendra Dwivedi ने अपने संबोधन में “डोमेन जॉइंटनेस” को ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
इसका मतलब है:
अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों (जमीन, वायु, समुद्र, साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव) का एक साथ मिलकर काम करना
पहले युद्ध में सेना, वायुसेना और नौसेना अलग-अलग रणनीति के तहत काम करती थीं, लेकिन अब:
- सभी डोमेन्स एक साथ काम करते हैं
- एक डोमेन दूसरे को सपोर्ट करता है
- निर्णय और कार्रवाई एकीकृत तरीके से होती है
ऑपरेशन में कैसे हुआ यह तालमेल?
Upendra Dwivedi के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में:
- ग्राउंड इंटेलिजेंस ने टारगेट की जानकारी दी
- साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने डेटा सपोर्ट किया
- वायुसेना ने सटीक हमले किए
- नौसेना की रणनीतिक मूवमेंट ने दबाव बनाया
यानी कोई एक फोर्स नहीं, बल्कि सभी ने मिलकर ऑपरेशन को सफल बनाया।
यही कारण है कि इसे “डिफाइनिंग केस स्टडी” कहा जा रहा है।
युद्ध का नया रूप: 3D बैटलफील्ड
सेना प्रमुख ने साफ किया कि अब युद्ध “मैप पर खींची गई लाइन” नहीं रह गया है।
आज का युद्ध:
- साइबर अटैक से दिमागी (cognitive) असर डालता है
- स्पेस टेक्नोलॉजी से टारगेटिंग होती है
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से कम्युनिकेशन प्रभावित होता है
यानी युद्ध अब 3D ही नहीं, बल्कि multi-layered हो गया है।
15% लड़ाई फेक न्यूज़ से
एक बेहद अहम खुलासा करते हुए Upendra Dwivedi ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 15% प्रयास केवल गलत सूचना (disinformation) से निपटने में लगा।
इसका मतलब है:
- आज युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि जानकारी से भी लड़ा जाता है
- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं
इसी को देखते हुए सेना ने:
- Information Warfare Organisation
- Psychological Defence Division
जैसी नई इकाइयां बनाई हैं।
हाइब्रिड वॉरफेयर: सबसे बड़ा खतरा
सेना प्रमुख ने “ग्रे-ज़ोन वॉरफेयर” या हाइब्रिड युद्ध को सबसे बड़ी चुनौती बताया।
यह ऐसा युद्ध होता है जो:
- सीधे युद्ध जैसा नहीं दिखता
- लेकिन दुश्मन को कमजोर करता है
- साइबर अटैक, प्रोपेगैंडा और आर्थिक दबाव जैसे तरीकों से लड़ा जाता है
यही कारण है कि अब सेना को हर स्तर पर तैयार रहना पड़ता है।
MDO: भविष्य की युद्ध रणनीति
मल्टी-डोमेन ऑपरेशन (MDO) का मतलब है कि:
- सभी डोमेन्स एक साथ काम करें
- लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहें
- परिस्थिति के अनुसार नेतृत्व बदलता रहे
Upendra Dwivedi ने कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ “जॉइंटनेस” नहीं, बल्कि डोमेन फ्यूजन है — यानी पूरी तरह से एकीकृत युद्ध प्रणाली।
सेना में क्या बदलाव हो रहे हैं?
भारतीय सेना अब तेजी से अपने स्ट्रक्चर को बदल रही है।
कुछ बड़े बदलाव:
- Integrated Battle Groups (IBGs)
- Rudra Brigades
- Drone Units
- Cyber Operations Units
- Electronic Warfare Formations
ये सभी बदलाव भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं।
टेक्नोलॉजी vs इंसान
हालांकि युद्ध में टेक्नोलॉजी की भूमिका बढ़ रही है, लेकिन Upendra Dwivedi ने साफ कहा:
“अंतिम निर्णय इंसान को ही लेना होगा”
इसका मतलब है कि AI और टेक्नोलॉजी के बावजूद:
- मानव निर्णय महत्वपूर्ण रहेगा
- नेतृत्व की भूमिका खत्म नहीं होगी
भविष्य के लिए क्या रोडमैप?
सेना प्रमुख ने “6 Ds” का जिक्र किया, जो भविष्य के युद्ध को आकार देंगे:
- Dispersion (फैलाव)
- Democratisation (तकनीक का प्रसार)
- Diffusion (सूचना का तेजी से फैलना)
इसके चलते:
- कमांड को decentralize करना होगा
- संसाधनों को diversify करना होगा
- प्रतिक्रिया को distributed बनाना होगा
निष्कर्ष
‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की बदलती रक्षा नीति का प्रतीक बनकर उभरा है।
Upendra Dwivedi के बयान से यह साफ है कि आने वाले समय में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि डिजिटल, साइबर और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी लड़ा जाएगा।
भारत अब पारंपरिक सैन्य सोच से आगे बढ़कर एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां हर डोमेन एक साथ काम करता है — और यही भविष्य की असली ताकत होगी।
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