भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए New Mangalore Port Authority (NMPA) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 50 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। यह पोर्ट के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा थ्रूपुट है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8% की वृद्धि को दर्शाता है।
यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत का समुद्री व्यापार ढांचा धीरे-धीरे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिकॉर्ड थ्रूपुट के पीछे क्या रहा कारण?
Sushil Kumar Singh, जो NMPA के चेयरमैन हैं, ने ANI से बातचीत में इस उपलब्धि का श्रेय पोर्ट से जुड़े सभी हितधारकों को दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सफलता केवल पोर्ट प्रशासन की नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट समुदाय, व्यापारियों, उद्योगों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की एजेंसियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
मysuru में आयोजित एक बिजनेस मीटिंग के दौरान, जहां EXIM (Export-Import) समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद थे, सिंह ने कहा कि इस तरह का समन्वय ही पोर्ट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें भविष्य की रणनीति, निवेश योजनाओं और लॉजिस्टिक्स सुधारों पर भी चर्चा हुई।
FY26: आंकड़ों में NMPA का प्रदर्शन
FY26 के दौरान NMPA का प्रदर्शन कई मायनों में उल्लेखनीय रहा:
- कुल कार्गो थ्रूपुट: 50 मिलियन टन
- साल-दर-साल वृद्धि: लगभग 8%
- मल्टी-कमोडिटी हैंडलिंग में सुधार
- एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट गतिविधियों में निरंतर वृद्धि
यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के पश्चिमी तट पर स्थित यह पोर्ट न केवल क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
‘विकसित भारत 2047’ और समुद्री सेक्टर की भूमिका
सिंह ने अपने बयान में Viksit Bharat 2047 और Maritime India Vision 2030 का भी उल्लेख किया।
इन दोनों राष्ट्रीय विजन डॉक्यूमेंट्स का उद्देश्य भारत को वैश्विक व्यापार और समुद्री लॉजिस्टिक्स में अग्रणी बनाना है। NMPA की रणनीति भी इन्हीं लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की जा रही है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले वर्षों में पोर्ट केवल कार्गो हैंडलिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक integrated logistics hub के रूप में विकसित होगा।
पोर्ट के आधुनिकीकरण पर जोर
NMPA अब केवल मात्रा बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और दक्षता सुधारने पर भी ध्यान दे रहा है।
चेयरमैन सिंह ने बताया कि पोर्ट में निम्नलिखित क्षेत्रों पर तेजी से काम किया जा रहा है:
- क्षमता विस्तार (Capacity Augmentation)
- ऑटोमेशन और डिजिटाइजेशन
- मैकेनाइजेशन के जरिए तेजी से लोडिंग-अनलोडिंग
- बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी
इन सुधारों का सीधा फायदा एक्सपोर्टर्स और इम्पोर्टर्स को मिलेगा, जिससे लागत कम होगी और समय की बचत होगी।
EXIM समुदाय से मिला फीडबैक
मysuru में हुई बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि इसमें व्यापार समुदाय से सीधे सुझाव लिए गए।
सिंह के अनुसार, यह सुझाव NMPA की भविष्य की नीतियों और संचालन में शामिल किए जाएंगे। इससे पोर्ट की सेवाएं और अधिक user-friendly और efficient बनेंगी।
FY27 के लिए नया लक्ष्य: क्या और बड़ा रिकॉर्ड बनेगा?
FY26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद NMPA अब FY27 के लिए और भी बड़े लक्ष्य की तैयारी कर रहा है।
सिंह ने विश्वास जताया कि मौजूदा गति को बनाए रखते हुए पोर्ट इस साल भी एक नया benchmark स्थापित कर सकता है।
उनका कहना है कि यदि सभी stakeholders इसी तरह सहयोग करते रहे, तो आने वाले वर्षों में NMPA भारत के शीर्ष performing ports में शामिल हो सकता है।
भारत के समुद्री व्यापार पर इसका असर
NMPA का यह प्रदर्शन केवल एक पोर्ट की सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय समुद्री व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत है।
भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा और कच्चे माल की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, उसके लिए efficient ports बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इस तरह के रिकॉर्ड यह दिखाते हैं कि:
- भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ रही है
- एक्सपोर्ट सेक्टर मजबूत हो रहा है
- वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ सकती है
क्या चुनौतियां भी हैं?
हालांकि प्रदर्शन शानदार है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं:
- वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता
- कच्चे तेल और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव
- लॉजिस्टिक्स लागत
- प्रतिस्पर्धी अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स
इन चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार निवेश और नीतिगत सुधार जरूरी होंगे।
निष्कर्ष: रिकॉर्ड से आगे की कहानी
NMPA का 50 मिलियन टन का आंकड़ा सिर्फ एक milestone नहीं है, बल्कि यह भारत के समुद्री भविष्य की दिशा को दर्शाता है।
अगर इसी तरह सुधार और निवेश जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक maritime map पर एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।
साफ है — यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक संकेत है कि भारत का लॉजिस्टिक्स और पोर्ट सेक्टर एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।
Disclaimer
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत (ANI) और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। वास्तविक आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।
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