भारत में जब टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्रांति की बात होती है, तो कुछ नाम अपने आप सामने आ जाते हैं। उन्हीं में से एक हैं नंदन नीलेकणि, जिन्हें देश में आधार कार्ड प्रणाली को लागू करने का श्रेय दिया जाता है। इंफोसिस के सह-संस्थापक रहे नंदन नीलेकणि सिर्फ एक सफल कारोबारी ही नहीं, बल्कि भारत के सबसे बड़े डिजिटल बदलावों के पीछे की प्रमुख ताकतों में से भी एक माने जाते हैं।
फोर्ब्स की भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में नंदन नीलेकणि का नाम 100वें स्थान पर आता है। उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 2.6 बिलियन डॉलर बताई जाती है। हालांकि, उन्हें सिर्फ उनकी संपत्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए भी जाना जाता है।
साधारण शुरुआत से टेक दुनिया के दिग्गज बनने तक
नंदन नीलेकणि का जन्म बेंगलुरु में हुआ और उन्होंने Indian Institute of Technology Bombay से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1978 में पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स में नौकरी शुरू की। दिलचस्प बात यह है कि उनका इंटरव्यू खुद एन. आर. नारायण मूर्ति ने लिया था।
इसके कुछ साल बाद 1981 में नंदन नीलेकणि ने नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह कंपनी आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
नंदन नीलेकणि ने कंपनी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और मार्च 2002 से अप्रैल 2007 तक कंपनी के CEO भी रहे। उनके नेतृत्व में इंफोसिस ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।
आधार कार्ड के पीछे का सबसे बड़ा चेहरा
भारत में डिजिटल पहचान की सबसे बड़ी परियोजना आधार कार्ड को लागू करने में नंदन नीलेकणि की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्हें Unique Identification Authority of India यानी UIDAI का प्रमुख बनाया गया था।
उनकी अगुवाई में आधार प्रोजेक्ट शुरू हुआ, जिसका मकसद देश के हर नागरिक को एक यूनिक पहचान संख्या देना था। आज आधार सिर्फ पहचान पत्र नहीं, बल्कि बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, मोबाइल सिम, टैक्स और कई डिजिटल सेवाओं की रीढ़ बन चुका है।
भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में आधार की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है और इसी वजह से नंदन नीलेकणि को देश की डिजिटल पहचान क्रांति का प्रमुख वास्तुकार कहा जाता है।
दान देने में भी सबसे आगे
नंदन नीलेकणि सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं रहे। वे और उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणि समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं। दोनों ने ‘Giving Pledge’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अरबपति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में देने का संकल्प लेते हैं।
साल 2023 में उन्होंने अपने पुराने संस्थान IIT बॉम्बे को रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए 38 मिलियन डॉलर का बड़ा दान दिया था। यह IIT बॉम्बे को मिलने वाले सबसे बड़े व्यक्तिगत दानों में से एक माना गया।
इसके अलावा रोहिणी और नंदन नीलेकणि शिक्षा, जल संरक्षण, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक विकास से जुड़ी कई संस्थाओं को समर्थन देते रहे हैं।
रतन टाटा के साथ भी किया काम
नंदन नीलेकणि ने सिर्फ आईटी सेक्टर तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने रतन टाटा के साथ मिलकर अवंती फाइनेंस नामक कंपनी की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों और गरीब तबकों को माइक्रो लोन उपलब्ध कराना था।
इस पहल का मकसद उन लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाना था, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से आसानी से लोन नहीं मिल पाता।
भारत के टेक सेक्टर का बड़ा चेहरा
आज नंदन नीलेकणि को भारत के सबसे प्रभावशाली टेक लीडर्स में गिना जाता है। इंफोसिस को वैश्विक पहचान दिलाने से लेकर आधार जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने तक, उनका योगदान भारत के डिजिटल इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।
वे उन चुनिंदा उद्योगपतियों में शामिल हैं जिन्होंने सिर्फ पैसा कमाने पर नहीं, बल्कि देश की डिजिटल और सामाजिक संरचना को मजबूत बनाने पर भी काम किया।
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