नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इस बार केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी सुधारों के साथ सदन में प्रवेश करेगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि सत्र के दौरान पांच नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें आयकर सुधार, MSME सेक्टर को राहत, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून में बदलाव और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान से जुड़े कानून को सख्त बनाने जैसे अहम प्रस्ताव शामिल हैं।
इसके अलावा पहले से लंबित कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। माना जा रहा है कि इस मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
सरकार कौन-कौन से नए विधेयक पेश करेगी?
सरकार 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में निम्नलिखित पांच प्रमुख विधेयक पेश करेगी—
- आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026
- जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026
इनमें से दो विधेयकों का उद्देश्य पहले जारी अध्यादेशों को विधायी मंजूरी देकर स्थायी कानून का रूप देना है।
आयकर संशोधन विधेयक 2026 क्यों है महत्वपूर्ण?
आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करना और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना है।
सरकार का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बीच विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से सरकार पहले एक अध्यादेश जारी कर चुकी थी, जिसके तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर में छूट दी गई थी। अब उसी व्यवस्था को स्थायी कानून का रूप देने की तैयारी है।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे न्यायाधीश
सरकार सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव लाएगी।
प्रस्ताव के अनुसार—
- मुख्य न्यायाधीश (CJI) के अलावा
- वर्तमान 33 न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 की जाएगी।
सरकार का तर्क है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
MSME सेक्टर के लिए क्या होंगे बदलाव?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (MSME) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को राहत देना और व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाना है।
इस विधेयक में मुख्य रूप से—
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा
- भरोसे पर आधारित नियामकीय व्यवस्था
- MSME के भुगतान में देरी से जुड़े विवादों के समाधान को मजबूत करना
- राज्यों को अधिक अधिकार देना
जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इससे देश के करोड़ों छोटे उद्योगों और उद्यमियों को फायदा मिलेगा।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून में होगा बदलाव
सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी।
इसके तहत 1969 के कानून की धारा 13(3) में संशोधन प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सख्त और व्यवस्थित बनाना है ताकि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाई जा सके।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान पर होंगे कड़े प्रावधान
सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए 1971 के कानून में संशोधन करना चाहती है।
इसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान से जुड़े मामलों में अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
लंबित विधेयकों पर भी होगी चर्चा
मानसून सत्र के दौरान सरकार पहले से लंबित दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाएगी—
- विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025
इनमें से शिक्षा अधिष्ठान विधेयक फिलहाल संसद की संयुक्त समिति के पास विचाराधीन है।
अनुपूरक अनुदानों की मांग भी होगी पेश
विधायी कार्यों के साथ-साथ सरकार वर्ष 2022-23 के अनुपूरक अनुदानों की मांग भी संसद में चर्चा और मतदान के लिए पेश करेगी।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र शुरू होने से पहले सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों को सरकार के विधायी एजेंडे और प्रमुख विधेयकों की जानकारी दी जाएगी।
वहीं विपक्ष भी सत्र के पहले दिन अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करेगा। ऐसे में इस बार संसद के मानसून सत्र में कई अहम विधेयकों के साथ राजनीतिक टकराव और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।


