Amazon Thane Data Center: महाराष्ट्र के थाणे जिले के बालकुम इलाके में प्रस्तावित अमेजन के बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। लोगों ने इस परियोजना से पानी की खपत, बिजली की मांग, शोर प्रदूषण और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है। बढ़ते विरोध के बीच अब अमेजन इंडिया ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि डेटा सेंटर के संचालन के लिए स्थानीय बिजली ग्रिड से बिजली नहीं ली जाएगी और पीने योग्य पानी की एक बूंद का भी उपयोग नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी ई-कॉमर्स और क्लाउड कंपनी Amazon महाराष्ट्र के थाणे के बालकुम क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से एक आधुनिक डेटा सेंटर विकसित करने जा रही है। यह प्रोजेक्ट लगभग 53 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा और इसे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, परियोजना की घोषणा के बाद से ही स्थानीय निवासी इसके संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर विरोध कर रहे हैं। पहले पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल उठे थे और अब पानी तथा बिजली की खपत को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं।
विरोध के बीच अमेजन ने क्या कहा?
स्थानीय लोगों के विरोध के बाद कंपनी ने स्पष्ट किया कि डेटा सेंटर के लिए पीने योग्य पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अमेजन का कहना है कि कंपनी पहले से ही भारत में Water Positive पहल पर काम कर रही है और जल संरक्षण के लिए कई परियोजनाएं चला रही है।
इसके अलावा कंपनी ने यह भी कहा कि डेटा सेंटर के संचालन के लिए स्थानीय बिजली ग्रिड पर निर्भरता नहीं होगी। इसके लिए अलग से हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन बनाया जा रहा है, जिससे आवश्यक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
कंपनी का दावा है कि इससे स्थानीय नागरिकों की बिजली आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
Amazon Thane Data Center: प्रमुख जानकारी
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| परियोजना का स्थान | थाणे के बालकुम, महाराष्ट्र |
| कुल क्षेत्रफल | लगभग 53 एकड़ |
| बिजली की व्यवस्था | कंपनी द्वारा हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन का निर्माण |
| स्थानीय बिजली ग्रिड | उपयोग नहीं करने का दावा |
| पानी का उपयोग | पीने योग्य पानी का इस्तेमाल नहीं होगा |
स्थानीय लोगों की क्या हैं चिंताएं?
परियोजना का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि डेटा सेंटर जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने के लिए भारी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है।
स्थानीय नागरिकों की प्रमुख चिंताएं इस प्रकार हैं—
- डेटा सेंटर के कूलिंग सिस्टम में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ सकती है।
- 24 घंटे चलने वाले सर्वर और कूलिंग सिस्टम से बिजली की मांग काफी बढ़ेगी।
- लगातार चलने वाले उपकरणों से शोर प्रदूषण (Noise Pollution) बढ़ने की आशंका है।
- आसपास स्थित स्कूलों, अस्पतालों और आवासीय सोसाइटियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
- पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र में कमी को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं।
पेड़ों की कटाई पर भी हुआ था विरोध
इससे पहले परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर भी स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय कंपनी ने कहा था कि सभी आवश्यक मंजूरियां और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही पेड़ों की कटाई की गई है।
राजनीतिक स्तर पर भी उठ चुका है मामला
इस परियोजना को लेकर केवल स्थानीय नागरिक ही नहीं बल्कि शिवसेना नेता नरेश म्हस्के भी आपत्ति जता चुके हैं। उन्होंने परियोजना पर पुनर्विचार करने और इसे रोकने की मांग की थी।
महाराष्ट्र सरकार का क्या है उद्देश्य?
महाराष्ट्र सरकार मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) को देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना चाहती है। बढ़ती डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग को देखते हुए राज्य सरकार बड़े डेटा सेंटर निवेश को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसी नीति के तहत अमेजन के इस डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश, रोजगार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा, जबकि स्थानीय लोग चाहते हैं कि विकास के साथ पर्यावरण और बुनियादी संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष: फिलहाल अमेजन ने स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया है कि डेटा सेंटर में न तो स्थानीय बिजली ग्रिड का उपयोग किया जाएगा और न ही पीने योग्य पानी का। हालांकि, परियोजना को लेकर विरोध पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और आने वाले समय में कंपनी, प्रशासन तथा स्थानीय नागरिकों के बीच संवाद इस प्रोजेक्ट की दिशा तय करेगा।


