नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बाजार नियामक ने सूचीबद्ध कंपनियों के फोरेंसिक ऑडिट के लिए अपने अधिकृत पैनल का विस्तार करते हुए 18 नई ऑडिट और कंसल्टिंग फर्मों को शामिल किया है। इस नई सूची में वैश्विक स्तर की प्रमुख कंपनियां Ernst & Young (EY) LLP, KPMG Assurance and Consulting Services LLP, ZX Grant Thornton Bharat LLP और Nangia & Co. LLP भी शामिल हैं।
यह फैसला नवंबर 2025 में जारी सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) नोटिस के तहत शुरू हुई चयन प्रक्रिया के बाद लिया गया है। सेबी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन नई फर्मों को अप्रैल 2025 में प्रकाशित मौजूदा फोरेंसिक ऑडिटर पैनल में जोड़ा गया है।
तीन वर्षों तक रहेगा पैनल का कार्यकाल
सेबी ने स्पष्ट किया है कि पैनल में शामिल की गई नई फर्मों का कार्यकाल तीन वर्षों तक वैध रहेगा। इस दौरान आवश्यकता पड़ने पर इन फर्मों को सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, लेन-देन और संभावित अनियमितताओं की फोरेंसिक जांच का जिम्मा सौंपा जा सकेगा।
किन-किन फर्मों को मिली जगह?
सेबी के विस्तारित पैनल में शामिल प्रमुख फर्में हैं—
- Ernst & Young (EY) LLP
- KPMG Assurance and Consulting Services LLP
- ZX Grant Thornton Bharat LLP
- Nangia & Co. LLP
- J.C. Kabra & Associates
- J. Mandal & Co. LLP
- J. Singh & Associates
- Jain Jagawat Kamdar & Co.
- Pipara & Co. LLP
- R. Kabra & Co. LLP
- R.S. Patel & Co.
- Ravi Rajan & Co. LLP
- S.S. Periwal & Co.
- Sarath & Associates
- SKVM & Co.
- V. Singhi & Associates
- ASA & Associates LLP
- CLA Indus Value Consulting
फोरेंसिक ऑडिट का क्या होता है उद्देश्य?
फोरेंसिक ऑडिट सामान्य वित्तीय ऑडिट से अलग होता है। इसका उपयोग उन मामलों में किया जाता है जहां किसी कंपनी में धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ी, फंड के दुरुपयोग, फर्जी लेन-देन या कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं।
सेबी इन ऑडिट्स के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि:
- पूंजी बाजार में पारदर्शिता बनी रहे।
- निवेशकों का विश्वास मजबूत हो।
- सूचीबद्ध कंपनियां नियामकीय मानकों का पालन करें।
- वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो सके।
नांगिया एंड कंपनी ने जताया गर्व
नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के फोरेंसिक एडवाइजरी के वरिष्ठ साझेदार श्रीनिवास राव ने सेबी के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पैनल में शामिल होना उनकी फर्म की विशेषज्ञता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यह उनकी टीम की फोरेंसिक जांच क्षमता और उत्कृष्टता के प्रति समर्पण को दर्शाता है। साथ ही यह जिम्मेदारी उन्हें निवेशकों के हितों की रक्षा और भारतीय वित्तीय बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर देगी।
राव ने यह भी कहा कि उनकी फर्म आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रभावी फोरेंसिक ऑडिट के माध्यम से सेबी के प्रयासों को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार, सेबी द्वारा फोरेंसिक ऑडिट पैनल का विस्तार ऐसे समय में किया गया है जब कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता पर लगातार अधिक जोर दिया जा रहा है। अधिक संख्या में विशेषज्ञ फर्मों के उपलब्ध होने से नियामक संदिग्ध मामलों की जांच तेजी और प्रभावी ढंग से कर सकेगा। इससे बाजार में अनुशासन बढ़ेगा और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।


