Trump Trade Threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बनाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ब्याज दरें कम नहीं की गईं तो अमेरिका उन देशों के साथ व्यापार रोक सकता है, जिनके साथ उसका ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा है। चिंता की बात यह है कि भारत भी उन देशों की सूची में शामिल है, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है।
ट्रंप की इस धमकी से भारत समेत उन देशों की चिंता बढ़ सकती है, जिनका अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष है। चीन इस सूची में सबसे ऊपर है, जबकि मेक्सिको, वियतनाम और भारत भी अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।
ट्रंप ने फेड को दी सीधी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती की मांग करते रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर फेड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की क्रेडिट स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत है, इसलिए ब्याज दरों को कम किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह उन देशों के साथ व्यापार रोकने की दिशा में कदम उठा सकते हैं, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है।
ट्रंप की इस टिप्पणी को फेडरल रिजर्व पर उनके बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
आखिर क्या होता है ट्रेड डेफिसिट?
ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई देश अपने किसी व्यापारिक साझेदार से जितना सामान और सेवाएं आयात करता है, उसके मुकाबले उतना निर्यात नहीं करता।
उदाहरण के लिए, अगर अमेरिका किसी देश से 100 अरब डॉलर का सामान खरीदता है और उसी देश को 60 अरब डॉलर का सामान बेचता है, तो अमेरिका का उस देश के साथ 40 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट होगा।
यही आंकड़ा अब ट्रंप के व्यापार संबंधी बयान का केंद्र बन गया है।
अमेरिका का भारत के साथ भी व्यापार घाटा
अमेरिका के फेडरल ट्रेड डेटा के मुताबिक, चीन अमेरिका के सबसे बड़े ट्रेड डेफिसिट वाले देशों में सबसे ऊपर है। पिछले साल चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर से अधिक रहा था।
इसके बाद मेक्सिको और वियतनाम जैसे देश आते हैं। भारत भी उन देशों में शामिल है, जहां से अमेरिका का आयात उसके निर्यात की तुलना में अधिक है।
अमेरिका का सभी व्यापारिक साझेदारों को मिलाकर कुल ट्रेड डेफिसिट पिछले साल करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर रहा। ऐसे में ट्रंप का यह बयान वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?
अमेरिका भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार होता है। अगर अमेरिका ट्रेड डेफिसिट को कम करने के लिए अतिरिक्त टैरिफ, आयात प्रतिबंध या व्यापार में कटौती जैसे कदम उठाता है, तो इसका असर भारतीय एक्सपोर्टर्स पर पड़ सकता है।
खास तौर पर अमेरिका को निर्यात करने वाले टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
हालांकि, ट्रंप के बयान को फिलहाल एक राजनीतिक और नीतिगत चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इसे तत्काल व्यापार बंद करने के फैसले के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।
मजबूत जॉब्स रिपोर्ट के बाद आया बयान
ट्रंप की यह टिप्पणी अगस्त की मजबूत अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट के बाद सामने आई। रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त में अमेरिकी कंपनियों ने 1.62 लाख नए कर्मचारियों की भर्ती की। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा था।
मजबूत रोजगार आंकड़ों का मतलब है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अभी भी मजबूती दिखाई दे रही है। ऐसे में फेडरल रिजर्व के लिए महंगाई और रोजगार के बीच संतुलन बनाना अहम चुनौती है।
फेड पर लगातार दबाव बना रहे हैं ट्रंप
अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप कई मौकों पर फेडरल रिजर्व से ब्याज दरें कम करने की मांग कर चुके हैं। उनका तर्क है कि कम ब्याज दरों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को और गति मिल सकती है।
वहीं, फेड के सामने महंगाई को नियंत्रित रखने की चुनौती है। ब्याज दरों में कटौती से कर्ज सस्ता हो सकता है और आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे महंगाई पर भी दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है।
ट्रंप की ताजा धमकी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ब्याज दरों की बहस को सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति से जोड़ दिया गया है।
भारत समेत कई देशों पर नजर
अगर अमेरिका वास्तव में ट्रेड डेफिसिट वाले देशों के खिलाफ सख्त व्यापार नीति अपनाता है, तो इसका असर केवल चीन तक सीमित नहीं रह सकता। भारत, मेक्सिको और वियतनाम जैसे देशों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप प्रशासन इस बयान के बाद कोई ठोस व्यापारिक कदम उठाता है या नहीं। अगर अमेरिका आयात पर अतिरिक्त प्रतिबंध या शुल्क बढ़ाता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन और भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।


