PM Modi Meets Iran President Pezeshkian: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मुलाकात हुई है। दोनों नेताओं की यह बैठक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन से इतर हुई। ऐसे समय में जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है, भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच पहली आमने-सामने मुलाकात
मिडिल ईस्ट में मौजूदा संकट के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात बताई जा रही है। इससे पहले मार्च में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बने तनावपूर्ण हालात के दौरान दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई थी।
उस बातचीत में पेजेशकियान ने पीएम मोदी को ईरान की स्थिति और क्षेत्र में तेजी से बदल रहे घटनाक्रम की जानकारी दी थी। अब बिश्केक में हुई आमने-सामने की बैठक में दोनों नेताओं को क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार रखने का मौका मिला।
ईरान के राष्ट्रपति ने बिश्केक रवाना होने से पहले भी साफ किया था कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी बाहरी हमले का जवाब ईरान पूरी ताकत और दृढ़ता के साथ देगा।
पेजेशकियान ने यह भी जोर दिया कि क्षेत्र में अस्थिरता किसी भी देश के हित में नहीं है। उनके मुताबिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग जरूरी है।
पेजेशकियान ने SCO को बताया स्वतंत्र आवाजों का मंच
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने SCO शिखर सम्मेलन को वैश्विक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें दुनिया पर एकतरफा प्रभाव कायम करने की कोशिश कर रही हैं, SCO विभिन्न देशों की स्वतंत्र आवाजों और विविधता का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने क्षेत्र के हजारों साल पुराने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
पेजेशकियान का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों तथा ईरान के बीच तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे में SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर क्षेत्रीय स्थिरता का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहना स्वाभाविक है।
आर्मेनिया के पीएम से भी मिले नरेंद्र मोदी
ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की।
दोनों नेताओं के बीच रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञान एवं तकनीक, संस्कृति और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक में मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात और व्यापक वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
भारत और आर्मेनिया के बीच हाल के वर्षों में रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी संपर्क बढ़ा है। ऐसे में SCO बैठक के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत को भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुतिन से भी मुलाकात करेंगे पीएम मोदी
बिश्केक दौरे के दौरान पीएम मोदी की अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक प्रमुख है।
पीएम मोदी और पुतिन की बातचीत में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, द्विपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस की भूमिका को देखते हुए दोनों नेताओं की बैठक पर भी नजर रहेगी।
वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन में भी शामिल होंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के विशेष निमंत्रण पर छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लेंगे।
यह आयोजन पारंपरिक खेलों और मध्य एशियाई संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता है। पीएम मोदी की इसमें भागीदारी भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच बढ़ते संपर्क को भी दर्शाती है।
1 सितंबर को होगा 26वां SCO शिखर सम्मेलन
SCO का 26वां शिखर सम्मेलन मंगलवार, 1 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटेंगे।
सम्मेलन के एजेंडे में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापारिक गलियारे, आर्थिक सहयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को देखते हुए इस बार SCO सम्मेलन की अहमियत और बढ़ गई है। भारत के लिए भी यह सम्मेलन कई देशों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत और रणनीतिक मुद्दों पर अपनी स्थिति रखने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है पेजेशकियान से मुलाकात?
पीएम मोदी और पेजेशकियान की बैठक को केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। ईरान पश्चिम एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति है और भारत के लिए ईरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है।
मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक जारी रहने वाला सैन्य तनाव भारत के व्यापारिक मार्गों, ऊर्जा कीमतों और क्षेत्रीय भारतीय हितों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भारत का सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना उसकी संतुलित कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यही वजह है कि बिश्केक में पीएम मोदी और पेजेशकियान की मुलाकात को मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।


